मानसा में आयोजित संघ वर्ग में जीरो वेस्ट मॉडल से पर्यावरण संरक्षण की जगाई अलख
June 20, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम संघ @100

मानसा में आयोजित संघ वर्ग में जीरो वेस्ट मॉडल से पर्यावरण संरक्षण की जगाई अलख

पिछले 20 दिन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग प्रथम (सामान्य) में शारीरिक, बौद्धिक और अन्य गतिविधियों के साथ बड़ा फोकस जीरो वेस्ट पर है।

Written byराजेश शांडिल्यराजेश शांडिल्य
Jun 20, 2026, 06:58 pm IST
in संघ @100, चण्‍डीगढ़

पिछले 20 दिन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग प्रथम (सामान्य) में शारीरिक, बौद्धिक और अन्य गतिविधियों के साथ बड़ा फोकस जीरो वेस्ट पर है। सीधा बोलें तो कचरा प्रबंधन पर। अगर इसका मूलमंत्र ठीक से समझ लिया जाए तो इसका सकारात्मक असर जीवन शैली पर होगा। दरअसल इसका उद्देश्य मात्र कचरा निपटान नहीं, बल्कि यह समझ विकसित करना है कि जिसे हम कचरा मानते हैं, वह वास्तव में एक संसाधन है। यदि सही प्रबंधन किया जाए तो न दुर्गंध फैलेगी, न प्रदूषण होगा और न ही पर्यावरण पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

पर्यावरण संरक्षण गतिविधि में राष्ट्रीय टोली के सदस्य व जल प्रमुख एवं पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना के प्रोफेसर डा.राकेश शारदा के अनुसार इस प्रयोग की शुरुआत एक महत्वपूर्ण विचार से हुई। इसका उद्देश्य है कि गीला कचरा घरों, दफ्तरों, धार्मिक, सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं इत्यादि से बाहर ही नहीं निकलना चाहिए। आमतौर पर लोग रसोई का कचरा सफाई कर्मचारी को दे देते हैं और फिर वह डंपिंग प्वाइंट से डंपिंग ग्राउंड तक दुर्गंध फैलाते हुए पहुंचता है,जिससे आसपास वातावरण में प्रदूषण की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। जीरो वेस्ट मॉडल इस सोच को बदलने का प्रयास करता है।

पंजाब मानसा में संघ द्वारा आयोजित वर्ग में लगभग 300 स्वयंसेवकों की आवासीय व्यवस्था चल रही है। एक व्यक्ति यदि प्रतिदिन लगभग 350 से 500 ग्राम तक गीला कचरा उत्पन्न करता है तो इस हिसाब से प्रतिदिन सवा से डेढ़ क्विंटल तक गीला कचरा निकल रहा है। सवाल था कि इतने कचरे का क्या किया जाए। उसे जलाया जाए तो वायु प्रदूषण होगा और डंप किया जाए तो दुर्गंध का वातावरण बनेगा।

इसका समाधान खोजते हुए पांच फुट लंबा, पांच फुट चौड़ा और तीन फुट गहरा गड्ढा तैयार किया गया। सबसे पहले उसमें चार से पांच इंच मोटी सूखी पत्तियों की परत बिछाई गई। उसके ऊपर गीला कचरा डाला गया। जब यह परत लगभग एक फुट तक पहुंच गई तो फिर सूखी पत्तियों की नई परत बिछा दी गई। इस दौरान नमी बनाए रखने के लिए पानी का छिड़काव भी किया गया। बीस दिन बाद भी गड्ढा पूरी तरह नहीं भरा, क्योंकि नीचे की सामग्री लगातार बैठती और सड़कर खाद में बदलती जा रही थी। इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गीले कचरे में प्लास्टिक शून्य बराबर है।

जब गड्ढा पूरी तरह भर जाएगा, तब उसके ऊपर सूखी पत्तियां और मिट्टी डालकर बंद कर दिया जाएगा। लगभग तीन महीने बाद इसमें से उत्कृष्ट जैविक खाद तैयार होगी, जिसका उपयोग बागवानी और खेती में किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया को और तेज करने के लिए बायो डी कंपोजर का उपयोग भी किया जा सकता है। गुड़, बायो कंपोजर और 200 लीटर पानी का घोल सात दिन तक ढककर रखने से डी कंपोस्टर तैयार हो जाता है। इसे कचरे पर डालने से 45 से 50 दिनों में अच्छी गुणवत्ता की खाद तैयार हो सकती है।आधुनिक वातावरण और आवासीय व्यस्था में निजी घरों के साथ निरंतर सोसायटी और फ्लैट की संख्या बढ़ रही है,यानी जहां गड्ढे बनाने की स्थिति नहीं है,यहां रहने वाले लोगों के लिए बोकाशी बिन (जापानी डिब्बा) एक उपयोगी विकल्प है। लगभग 20 लीटर क्षमता वाला यह बिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 250 से 300 रुपये में उपलब्ध है। इसकी सहायता से घर में ही गीले कचरे का प्रबंधन किया जा सकता है।

इसी प्रकार प्लास्टिक कचरे के लिए भी वर्ग स्थान पर में अलग व्यवस्था बनाई गई है। एक बड़ा थैला लगाया गया है,ताकि सिंगल यूज सारा प्लास्टिक अलग एकत्रित हो। पंजाब मानसा के समीप सरदूलगढ़ क्षेत्र में ऐसी इकाइयां कार्य कर रही हैं,जो सिंगल यूज प्लास्टिक से पेवर ब्लॉक और खपरैल तैयार करती हैं। मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) के माध्यम से प्लास्टिक का रीसाइकिल किया जा सकता है।यह यूनिट दो रुपये प्रति किलो के हिसाब से सिंगल यूज प्लास्टिक खरीदती है। वहीं अलग अलग उपयोगों के लिए अन्य जगहों पर प्लास्टिक बोतलें 45 से 48 रुपये प्रति किलो तक, जबकि चिप्स और कुरकुरे जैसे मल्टी लेयर कटे फटे पैकेट 60 से 80 रुपये प्रति किलो तक खरीदे जाते हैं। इनसे फर्नीचर, गमले, टी शर्ट और अन्य उपयोगी वस्तुएं बनाई जा रही हैं।

इसके सहित अधिकांश लोगों को यह तक नहीं मालूम कि टॉफी, बिस्कुट और स्नैक्स के पाउच से बेहतर इको ब्रिक भी बनाई जा सकती है। इसके लिए इन पाउचों को खाली प्लास्टिक बोतलों में भरकर ठोस रूप दिया जाता है। बाद में इनका उपयोग बेंच, टेबल और पार्कों की संरचनाओं में किया जा सकता है। प्रशिक्षण वर्ग में जल संरक्षण और रसायन मुक्त जीवन शैली पर भी जोर दिया गया। फलों और सब्जियों के छिलकों, गुड़ और पानी से तैयार होने वाला बायो एंजायम इसका महत्वपूर्ण उदाहरण है। एक भाग गुड़, तीन भाग छिलके और दस भाग पानी के अनुपात से इसे तैयार किया जाता है। 90 दिनों बाद यह प्राकृतिक क्लीनर बन जाता है। इसका उपयोग फर्श पर पोछा लगाने,शीशे साफ करने, फलों और सब्जियों को धोने, टाइलों की सफाई, दुर्गंध नियंत्रण और घरेलू उपयोग के अनेक कार्यों में किया जा सकता है।

यह पूरा प्रयोग एक संदेश देता है कि कचरा समस्या नहीं है, गलत प्रबंधन समस्या है। यदि हर घर, हर संस्था और हर नगर, गांव, डेरा के मोहल्ला, कालोनी, बस्तियां अपने स्तर पर गीले और सूखे कचरे को अलग कर उसका स्थानीय प्रबंधन शुरू कर दे, तो न केवल हमारे आसपास स्वच्छता और अच्छा वातावरण बनेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा बदलाव सामने होंगे। अब जीरो वेस्ट कोई सपना नहीं, बल्कि व्यवहार में उतारी जा सकने वाली जीवन शैली है।

Topics: RSSRashtriya Swayamsevak SanghWaste ManagementSangh Varg organised in MansaZero Waste Model
राजेश शांडिल्य
राजेश शांडिल्य
वरिष्ठ पत्रकार [Read more]
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

छत्रपति शिवाजी महाराज

छत्रपति शिवाजी महाराज से संघ तक: राष्ट्र पुनर्निर्माण की वह विचारधारा जिसे जानना जरूरी है

हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने पर उदयपुर में क्या बोले मोहन भागवत जी, सुनिए

रांची में RSS कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला

रांची में संघ कार्यालय पर हमला: क्या कानून-व्यवस्था मजाक बनकर रह गई है?

RSS सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

पिछले 100 वर्षों से RSS केवल भारत के कल्याण और भलाई के लिए काम कर रहा है- डॉ. मोहन भागवत जी

हिमालयन इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी जी।

समाज को देश विरोधी ताकतों और भारत को कमजोर करने की कोशिश कर रही विदेशी साजिशों से सावधान रहना चाहिए- प्रदीप जोशी

गोष्ठी को संबोधित करते हुए श्री अतुल लिमये

‘सज्जनों की सक्रियता से मिलती है समाज को दिशा’

Load More

ताज़ा समाचार

bangladesh dhaka shahbagh echoes with hindu protest ram statue desecration gaibandha

ढाका में जागा हिंदू समाज: श्रीराम के अपमान पर शाहबाग में अभूतपूर्व मशाल जुलूस, ‘हिन्दू महाजोत’ ने हिलाया बांग्लादेश

मानसा में आयोजित संघ वर्ग में जीरो वेस्ट मॉडल से पर्यावरण संरक्षण की जगाई अलख

Amit Shah Kolhapur Speech India Not Dharmashala Infiltrators

भारत कोई धर्मशाला नहीं, घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी : अमित शाह

चर्च नक्सल गठजोड़। ईसाई मिशनरियों के निशाने पर जनजातीय समाज। (चित्र - एआई निर्मित)

चर्च-नक्सल गठजोड़: देश के जनजातीय क्षेत्रों में सक्रिय नेटवर्क की परतें खोलती रिपोर्ट

Punjab Flesh Trade Case AAP Former MLA Amarjit Singh Sandoa Rupnagar

पंजाब की राजनीति में हड़कंप! देहव्यापार मामले में फंसे AAP के पूर्व विधायक अमरजीत सिंह संदोआ, पुलिस ने भेजा नोटिस

indian physicist jainendra k jain wins prestigious wolf prize in physics

गौरवमयी क्षण: राजस्थान के जैनेंद्र के. जैन को मिला प्रतिष्ठित ‘वुल्फ पुरस्कार’, यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय बने

विश्व योग चैंपियनशिप में प्रतिभागी। शिव के रूप में भी प्रस्तुति दी।

योग के जरिए विश्व को जोड़ता भारत

exceptional traffic management-in-udaipur-during-mohan bhagwat rashtra chetana sabha

स्वयंसेवकों ने पेश की मिशाल: राष्ट्र चेतना संकल्प सभा में भयंकर भीड़, बेजोड़ ट्रैफिक मैनेजमेंट से नहीं लगा रेंगता जाम

प्रतीकात्मक चित्र

शामली: वलीमे की दावत में बीफ, दूल्हा समेत 3 गिरफ्तार

मुश्ताक अहमद भट

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का घिनौना सच, आतंकियों की जेबों से मिले ‘लव लेटर्स’ और कंडोम, अय्याशी का गंदा खेल

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies