यं शैवाः समुपासते शिव इति ब्रह्मेति वेदान्तिनो
बौद्धा बुद्ध इति प्रमाणपटवः कर्तेति नैयायिकाः ।
अर्हन् इत्यथ जैनशासनरला कर्मेति नैयायिकाः ।
सोयं नो विदधातु वाञ्छितफलं वैलोक्यनाथो हरिः।।
हिन्दी अर्थ-
शैव जिसे शिव, वेदान्ती जिसे ब्रह्म, बौद्ध जिसे बुद्ध, प्रमाणपटु नैयायिक जिसे कर्ता, जैन जिसे अर्हत् तथा मीमांसक जिसे कर्म नाम से व्यवहृत करते हैं, वह त्रिलोकी का स्वामी परमेश्वर हरि हमें वाञ्छित फल प्रदान करें।

















