आधुनिक जीवन में सफलता के लिए प्रबंधन (Management) भी बहुत जरूरी है। वह चाहे समय का हो या फिर कार्य का। आज के श्लोक में पढ़ें कैसे सफलता प्राप्त होती है।
श्लोक
निश्चित्य यः प्रक्रमते नान्तर्वसति कर्मणः।
अवन्ध्यकालो वश्यात्मा स वै पण्डित उच्यते॥
भावार्थ –
जो मनुष्य पहले से ही खूब सोच-विचार कर किसी कार्य को आरम्भ करता है और प्रारम्भ किये हुए कार्य को पूरा किये बिना बीच में ही उसे नहीं छोड़ता है और अपने समय को व्यर्थ नहीं खोता है, कुछ न कुछ करता ही रहता है, जिसने अपनी इन्द्रियों और मन को वश में कर रखा है- वही बांस्तव में पण्डित है।
आज क्यों है प्रासंगिक
आज का समय प्रतिस्पर्धा का है। इस दौर में भी महाभारत का यह श्लोक बेहद प्रासंगिक है। कॉर्पोरेट जगत से लेकर छात्रों तक, हर जगह ‘स्टार्टअप प्लानिंग’ (सोच-समझकर कार्य आरंभ करना) और ‘कंसिस्टेंसी’ (काम को बीच में न छोड़ना) की सबसे ज्यादा जरूरत है। सोशल मीडिया के इस युग में जहां ध्यान भटकना (Distraction) आम है, वहीं समय का सदुपयोग करना और आत्म-नियंत्रण (Self-Discipline) रखना ही किसी भी व्यक्ति को भीड़ से अलग और वास्तव में सफल बनाता है।
















