तुर्किये में एक बड़ा कदम उठाया गया है। सिजेरियन सेक्शन डिलीवरी कराने वाले 100 से अधिक डॉक्टरों पर जुर्माना लगाया गया। उन्हें निलंबित भी कर दिया गया। सरकार के इस कदम से डॉक्टरों में रोष है और वे विरोध भी कर रहे हैं।
तुर्किये ने यह कदम क्यों उठाया है, इसकी बड़ी वजह सामने आई है। वहां वर्ष 2025 में बिना ठोस वजह के सी सेक्शन डिलीवरी पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसका बड़ा कारण यह है कि तुर्किये में जन्म दर घट रही है। सरकार जन्म दर को संतुलित करने के लिए नार्मल डिलीवरी को बढ़ावा दे रही है। इसीलिए डॉक्टरों को सी सेक्शन डिलीवरी करने के लिए दंड दिया गया है।
क्या है तुर्किये की राष्ट्रीय नीति
तुर्की का “परिवार और जनसंख्या दशक” (2026–2035), राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन द्वारा शुरू की गई एक बड़ी राष्ट्रीय नीति है। इसका मकसद जन्म दर में आ रही गिरावट से निपटना है। इस नीति का उद्देश्य बच्चों के जन्म में मदद, ‘परिवार और युवा कोष’ (Family and Youth Fund) और सख्त मेडिकल नियमों के जरिये जन्म दर को गिरने से रोकना है।
सी-सेक्शन डिलीवरी में तुर्किये दुनिया में दूसरे नंबर पर
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक तुर्किये सी सेक्शन डिलीवरी के मामले में दुनिया में दूसरे नंबर (50.8% – 58.4%) पर है। इससे पहले डोमिनिकन गणराज्य (58.1% – 62.9%) का नंबर आता है। तीसरे नंबर पर ब्राजील (55.5% – 56.4%)है। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) की रिपोर्ट के अनुसार, तुर्किये अपने सभी 38 सदस्य देशों में सी-सेक्शन (सिजेरियन) डिलीवरी के मामले में शीर्ष पर है।
मेडिकल एसोसिएशन ने उठाए सवाल
तुर्किये के मेडिकल एसोसिएशन (Antalya Chamber of Physicians) ने अपनी वेबसाइट पर बताया कि देश भर में सिजेरियन सेक्शन की उच्च दर का हवाला देते हुए डॉक्टरों को चेतावनी दी गई है। उन्हें निलंबित भी किया गया है। इतना ही नहीं, उन्हें प्रसव पूर्व प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में शामिल होने के लिए भी मजबूर किया गया है।
क्या है सी सेक्शन डिलीवरी
सी-सेक्शन या सिजेरियन डिलीवरी एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें मां के पेट और गर्भाशय में चीरा लगाकर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला जाता है। यह प्रक्रिया तब अपनाई जाती है जब सामान्य डिलीवरी से मां या बच्चे को कोई खतरा हो।
सी-सेक्शन की जरूरत क्यों पड़ती है?
- यदि बच्चा उल्टे (ब्रीच) पोजीशन में हो
- बच्चे का आकार बहुत बड़ा हो
- मां को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, या प्लेसेंटा से जुड़ी समस्या (प्लेसेंटा प्रिविया) हो
- प्रसव पीड़ा के दौरान बच्चे का दिल सही से काम नहीं कर रहा हो
- पूरी प्रक्रिया में लगभग 45 मिनट का समय लगता है
- रिकवरी के लिए अस्पताल में 3 से 5 दिन तक रुकना पड़ सकता है
- सर्जरी के बाद पूरी तरह से ठीक होने में लगभग 6 से 8 सप्ताह लगते हैं
जरूरत न होने पर भी सी सेक्शन डिलीवरी क्यों ?
मेडिकल जर्नल (जैसे कि The Lancet) इन 4 मुख्य कारण बताते हैं –
- निजी अस्पतालों में नॉर्मल डिलीवरी की तुलना में सी-सेक्शन के लिए दोगुने से तिगुने पैसे वसूले जाते हैं
- नॉर्मल डिलीवरी में 12 से 24 घंटे या उससे ज्यादा का समय लग सकता है, जबकि सी-सेक्शन 30-45 मिनट में प्लान किया जा सकता है। डॉक्टर और अस्पताल ज्यादा ऑपरेशन और समय को देखते हुए इस पर जोर देते हैं।
- आधुनिक जीवनशैली और काउंसलिंग की कमी से गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा को लेकर डर रहता है, जिससे वे सी-सेक्शन का विकल्प चुन लेती हैं
भारत में क्या है स्थिति
भारत में भी सी-सेक्शन डिलीवरी का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। यह लगभग 27% तक पहुंच गया है। यह दर विश्व स्वास्थ्य संगठन के आदर्श मानक (10 से 15%) से अधिक है। इस दर को बढ़ाने में निजी अस्पताल ज्यादा जिम्मेदार हैं। सरकारी अस्पतालों में अभी भी जहां यह दर 15-20% है, वहीं निजी अस्पतालों में यह 47% से 54% तक है। यानी निजी अस्पतालों में हर दूसरा बच्चा ऑपरेशन से पैदा हो रहा है।

















