भुवनेश्वर। पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर में सदियों पुरानी अणसर परंपरा के तहत त्रयोदशी तिथि (द्वादशी क्षय) के अवसर पर पारंपरिक राजप्रसाद बिजे नीति संपन्न हुई। इस पावन अनुष्ठान के दौरान दइतापति एवं अन्य सेवायतों ने गजपति महाराज दिव्यसिंह देव को महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, महाप्रभु बलभद्र और देवी सुभद्रा के पारंपरिक उपचार के बाद पूर्णतः स्वस्थ होने का संदेश दिया।
यह अनुष्ठान महाप्रभु की वार्षिक धार्मिक परंपराओं का एक महत्वपूर्ण चरण है, जो स्नान यात्रा के बाद अणसर काल के दौरान संपन्न होता है। इस अवधि में श्रीविग्रह जनदर्शन से दूर रहते हैं। परंपरा के अनुसार, राजवैद्य द्वारा तैयार दशमूल मोदक महौषधि के सेवन के बाद श्रीविग्रहों के स्वस्थ होने की सूचना औपचारिक रूप से पुरी स्थित राजमहल (श्रीनहर) में गजपति महाराज को दी जाती है।
पारंपरिक शोभायात्रा के साथ श्रीनहर पहुंचे सेवायत
राजप्रसाद बिजे नीति के तहत पतिमहापात्र, दइतापति और देउलकरण सेवायत घंट, छत्र तथा काहाली की पारंपरिक ध्वनि के बीच शोभायात्रा निकालते हुए श्रीनहर पहुंचे। सेवायत चांदी की थालियों में श्रीअंग से स्पर्शित कराल, चंदन और पाटडोरी लेकर पहुंचे। गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने इन पवित्र वस्तुओं का स्पर्श कर उन्हें पारंपरिक रूप से स्वीकार किया और बाद में सेवायतों को वापस सौंप दिया।
यह संपूर्ण अनुष्ठान राजपुरोहित की देखरेख में संपन्न हुआ। इसके बाद श्रीमंदिर में दैनिक नीतियां संपन्न की गईं तथा महाप्रभु को चकटा और पणा भोग अर्पित किया गया। राजप्रसाद बिजे नीति पूर्ण होने के पश्चात श्रद्धालुओं के लिए जय-विजय द्वार पुनः खोल दिया गया। परंपरा के अनुसार सेवायतों को सम्मानस्वरूप शाल भी प्रदान की गई।
रथयात्रा विश्वव्यापी आस्था का पर्व : गजपति महाराज
राजप्रसाद बिजे नीति के बाद श्रीनहर में मीडिया से बातचीत करते हुए गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने श्रीजगन्नाथ रथयात्रा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह ऐसा दुर्लभ अवसर है जब श्रद्धालुओं को मंदिर के गर्भगृह से बाहर स्वयं महाप्रभु के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि महाप्रभु श्रीजगन्नाथ केवल ओडिशा या भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संपूर्ण विश्व के आराध्य हैं। रथयात्रा आज वैश्विक आस्था का महापर्व बन चुकी है, जिसमें विभिन्न देशों, धर्मों और समुदायों के लोग एक साथ श्रद्धा और भक्ति के साथ भाग लेते हैं।

गजपति महाराज ने कहा, “स्वयं महाप्रभु श्रीजगन्नाथ ने राजा को निर्देश दिया था कि उनके उत्सव इसी प्रकार संपन्न किए जाएं। स्नान यात्रा और रथयात्रा ऐसे अवसर हैं जब बिना किसी भेदभाव के सभी श्रद्धालुओं को महाप्रभु के प्रत्यक्ष दर्शन का अवसर मिलता है।” उन्होंने कहा कि यह उत्सव पूरी दुनिया के लोगों को भक्ति और प्रेम के सूत्र में जोड़ता है, लेकिन इसके सभी अनुष्ठान महाप्रभु की आज्ञा और शास्त्रीय परंपराओं के अनुरूप ही होने चाहिए।
अनुशासित और सुरक्षित रथयात्रा पर विशेष जोर
आगामी रथयात्रा की तैयारियों के बीच गजपति महाराज ने सेवायतों को अनुशासन बनाए रखने और श्रद्धालुओं के लिए सुगम व्यवस्था सुनिश्चित करने की सलाह दी। उन्होंने दइतापति सेवायतों से कहा कि पहंडी और रथयात्रा की सभी नीतियां सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हों ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं निर्बाध दर्शन मिल सके। उन्होंने निर्देश दिया कि रथों पर अनावश्यक भीड़ न हो तथा कोई भी सेवायत महाप्रभु के सामने अथवा उनके भुजों के बीच खड़ा न रहे। उन्होंने स्मरण कराया कि पिछले वर्ष रथों पर अधिक भीड़ होने से रथ खींचने में कठिनाइयां आई थीं। इस वर्ष ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए मंदिर प्रबंधन समिति की बैठकों में आवश्यक निर्णय लिए जा चुके हैं।
गजपति महाराज ने इस बात पर भी संतोष व्यक्त किया कि इस वर्ष राजप्रसाद बिजे कार्यक्रम में सेवायतों के साथ मंदिर प्रशासन और पुलिस के अधिकारी भी शामिल हुए, जिससे रथयात्रा के सफल संचालन के लिए बेहतर समन्वय सुनिश्चित होगा।
आवश्यकता पड़ने पर सूर्यास्त के बाद भी खींचे जा सकेंगे रथ
गजपति महाराज ने कहा कि यदि आवश्यकता हुई तो धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए मशालों की रोशनी में सूर्यास्त के बाद भी रथ खींचे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन, मंदिर प्रबंधन, पुलिस और सेवायतों के बीच बेहतर समन्वय ही विशाल जनसमूह के बीच रथयात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अंतिम चरण में पहुंचीं रथयात्रा की तैयारियां
इस बीच विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथयात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, महाप्रभु बलभद्र और देवी सुभद्रा के तीनों भव्य रथों के निर्माण और सजावट का कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है। हर वर्ष परंपरा के अनुसार नए रथों का निर्माण किया जाता है। रथ निर्माण में लगे महाराणा सेवायतों ने बताया कि यह कार्य निर्धारित धार्मिक परंपराओं और विधियों के अनुसार मंदिर के अधिकृत सेवायतों की निगरानी में किया जा रहा है।
रथ निर्माण का कार्य अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ प्रारंभ हुआ था और अब अंतिम चरण में है।
वर्ष 2026 की श्रीजगन्नाथ रथयात्रा 16 जुलाई को प्रारंभ होगी, जब तीनों रथ गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे। नौ दिवसीय महापर्व का समापन 24 जुलाई को बहुड़ा यात्रा के साथ होगा, जबकि 27 जुलाई को नीलाद्रि बीजे के अवसर पर महाप्रभु पुनः श्रीमंदिर में विराजमान होंगे।
इस्कॉन की रथयात्रा तिथियों पर गजपति महाराज ने दोहराया अपना रुख
इस्कॉन द्वारा पारंपरिक शास्त्रसम्मत तिथि से अलग समय पर आयोजित की जाने वाली रथयात्रा के संबंध में गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने कहा कि संगठन को कई बार शास्त्रों में निर्धारित तिथि के अनुसार ही रथयात्रा आयोजित करने की सलाह दी गई है। उन्होंने कहा कि चूंकि इस्कॉन ने इस सलाह का पालन नहीं किया, इसलिए उन्होंने उसके कार्यक्रमों में भाग लेना बंद कर दिया है।
स्नानयात्रा के दौरान दीप बुझना अशुभ संकेत नहीं : गजपति महाराज
स्नानयात्रा के दौरान दीपक बुझने की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए गजपति महाराज ने कहा कि इसे किसी भी प्रकार का अशुभ संकेत नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने इसे सामान्य घटना बताते हुए श्रद्धालुओं से धार्मिक परंपराओं को लेकर अनावश्यक अटकलें या भ्रांतियां न फैलाने की अपील की। गुंडिचा मंदिर के विकास कार्यों पर उन्होंने कहा कि कई वर्षों बाद मंदिर के सौंदर्यीकरण और संरक्षण का व्यापक कार्य चल रहा है। मंदिर परिसर के भीतर और बाहर शेष बचे कार्य नीलाद्रि बीजे के बाद पूरे किए जाएंगे।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अगले वर्ष श्रद्धालु गुंडिचा मंदिर के नए और आकर्षक स्वरूप के दर्शन कर सकेंगे। गजपति महाराज ने अंत में सेवायतों, मंदिर प्रशासन, पुलिस, जिला प्रशासन और श्रद्धालुओं से सामूहिक सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सभी के समन्वित प्रयासों से वर्ष 2026 की श्रीजगन्नाथ रथयात्रा शांतिपूर्ण, सुरक्षित और महाप्रभु की गौरवशाली परंपराओं के अनुरूप संपन्न होगी।
रथयात्रा से पहले ओडिशा पुलिस का व्यापक मॉक ड्रिल
विश्वप्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथयात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप देते हुए ओडिशा पुलिस ने सोमवार को पुरी में व्यापक रथ-खींचने का मॉक ड्रिल और आपातकालीन प्रतिक्रिया अभ्यास आयोजित किया। इसका उद्देश्य रथयात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी संभावित स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों का आकलन करना था।रिजर्व ग्राउंड में आयोजित इस बड़े अभ्यास की निगरानी पूर्वी रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) पिनाक मिश्रा ने की, जो श्रीजगन्नाथ मंदिर की आंतरिक सुरक्षा के प्रभारी हैं। इस दौरान पुरी के जिलाधिकारी दिव्यज्योति परिडा, पुलिस अधीक्षक प्रतीक सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, ओडिशा पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान भी उपस्थित रहे।

मॉक ड्रिल का उद्देश्य विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करना, परिचालन तैयारियों की समीक्षा करना तथा रथों के सुचारु और दुर्घटनारहित संचालन को सुनिश्चित करना था।
भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया पर विशेष फोकस
अभ्यास के दौरान रथयात्रा के समय उत्पन्न होने वाली विभिन्न संभावित परिस्थितियों, जैसे भीड़ नियंत्रण, आपातकालीन प्रतिक्रिया और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय का अभ्यास किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इसका उद्देश्य सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाना तथा लाखों श्रद्धालुओं के आगमन के दौरान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए उन्हें पूरी तरह तैयार करना है।
हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु श्रीजगन्नाथ रथयात्रा में शामिल होते हैं। इसे देखते हुए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इस वर्ष रथयात्रा के दौरान 13,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। पुलिस बलों की तैनाती के अलावा निगरानी प्रणाली, संचार नेटवर्क और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को भी और मजबूत किया गया है ताकि पुलिस, जिला प्रशासन, मंदिर प्रशासन तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।
पुरी समुद्र तट पर भी बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था
रथयात्रा के दौरान पुरी समुद्र तट पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। इसे देखते हुए समुद्र तट पर सुरक्षा व्यवस्था और बचाव तैयारियों को भी मजबूत किया गया है। सोमवार को पुरी लाइफगार्ड एसोसिएशन ने समुद्र में संभावित दुर्घटनाओं से निपटने के लिए विशेष मॉक रेस्क्यू ड्रिल आयोजित की। इसमें ऊंची लहरों, रिप करंट तथा भीड़भाड़ जैसी परिस्थितियों में बचाव अभियान का अभ्यास किया गया।
अभ्यास के दौरान लाइफगार्ड्स ने समुद्र में फंसे लोगों तक तेजी से पहुंचने, उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने, तट पर प्राथमिक उपचार देने तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का प्रदर्शन किया। अधिकारियों के अनुसार, इन अभ्यासों का उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में प्रतिक्रिया समय कम करना, लाइफगार्ड्स के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना तथा श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि ओडिशा पुलिस, जिला प्रशासन, मंदिर प्रशासन, अर्धसैनिक बलों, लाइफगार्ड्स और आपातकालीन सेवाओं के समन्वित प्रयासों से इस वर्ष की श्रीजगन्नाथ रथयात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो तथा देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु निर्बाध रूप से इस ऐतिहासिक महापर्व में भाग ले सकें।

















