MP में लिव-इन का रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य, समिति ने मुख्यमंत्री को सौंपा UCC का फाइनल प्रतिवेदन
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MP में लिव-इन का रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य, समिति ने मुख्यमंत्री को सौंपा UCC का फाइनल प्रतिवेदन

राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति को विभिन्न व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विषयों, जैसे विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण तथा लिव-इन संबंधों से संबंधित प्रचलित व्यवस्थाओं के अध्ययन करने का दायित्व सौंपा गया था।

Written byएजेंसीएजेंसी
Jul 13, 2026, 11:38 pm IST
inमध्य प्रदेश
समान नागरिक संहिता के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रतिवेदन सौंपा।

समान नागरिक संहिता के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रतिवेदन सौंपा।

भोपाल। मध्य प्रदेश में लिव इन संबंधों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाएगा। यदि कोई पंजीयन नहीं कराता है और लिव इन में रहता है तो यह अपराध की श्रेणी में आएगा। लिव इन से यदि कोई अलग होना चाहता है तो उसे रजिस्ट्रार को आवेदन देना होगा। यह अनुशंसा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक के फाइनल प्रारूप में की गई है।

समान नागरिक संहिता के लिए गठित सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति ने सोमवार देर शाम मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर संहिता का प्रतिवेदन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंपा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समय-सीमा में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने पर अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया। इस अवसर पर समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर एवं समिति के सदस्य सचिव अजय कटेसरिया उपस्थित थे।

प्रतिवेदन में समिति की रिपोर्ट 3 खण्डों में संकलित है। पहले खंड में समिति की अनुशंसाओं का प्रतिवेदन है और इसमें समिति ने अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं राज्य के विभिन्न विधियों एवं प्रथाओं का विश्लेषण कर अपनी अनुशंसाएं प्रतिवेदित की है। इस खंड में 10 अध्याय है। प्रतिवेदन का दूसरा खंड विधेयक के प्रारूप के रूप में है। समिति द्वारा प्रस्तावित विधेयक के प्रारूप को मध्यप्रदेश में प्रचलित विधियों एवं नियमों के दृष्टिगत तैयार किया गया है। प्रस्तावित विधेयक के 4 भाग, 404 धाराएं एवं 7 अनुसूचियां है।

समिति को 9.58 लाख से अधिक परामर्श मिले

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सौंपे गए तीसरे खंड में जन परामर्श प्रतिवेदन है, जिसमें समिति द्वारा जिला स्तर, राज्य स्तर एवं वेबसाइट के माध्यम से किये गए व्यापक जन-परामर्श का विवरण है। समिति को 9.58 लाख से अधिक परामर्श प्राप्त हुए थे। उनका प्रश्नवार, लिंगवार एवं समुदायवार विश्लेषण इस खंड में शामिल है।

अनुसूचित जनजातियां यूसीसी से बाहर

समिति ने अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता से बाहर रखने की अनुशंसा की है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति को विभिन्न व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विषयों, जैसे विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण तथा लिव-इन संबंधों से संबंधित प्रचलित व्यवस्थाओं के अध्ययन करने का दायित्व सौंपा गया था। समिति ने उक्त अनुसार मध्यप्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप प्रारूप तैयार करने का कार्य किया है। समिति ने मूल आधार, लैंगिक समानता सुनिश्चित करना, विविध अनुष्ठानिक प्रथाओं को अप्रभावित रहने देना, प्रचलित रीति-रिवाजों एवं प्रथाओं का सम्मान करना एवं संवैधानिक उपबंधों एवं लोकनीति की दिशा में कार्य किया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा समिति की अध्यक्ष उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश, न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई, समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह एवं सदस्य अनूप नायर का भी धन्यवाद ज्ञापित किया जो व्यक्तिगत कारणों से उपस्थित नहीं हो सकें। समिति द्वारा प्राप्त प्रतिवेदन राज्य शासन के विधि विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया है। विधेयक के परिमार्जन एवं वरिष्ठ सचिव समिति की प्रक्रिया के बाद विधेयक मंत्रि-परिषद की स्वीकृत के बाद 20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में विधानसभा में रखे जाने की संभावना है।

लिव इन के लिए रजिस्ट्रार के पास आवेदन देना होगा

यूसीसी के फाइनल प्रतिवेदन में लिव इन संबंधों को प्रावधान प्रस्तावित किया गया है कि इसमें रहने वालों को पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। यदि कोई बिना पंजीयन लिव इन में रहता है और इसका जानकारी मिलती है तो आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाएगा। पंजीयन कराने पर इसकी सूचना संबंधित थाने और स्वजन को दी जाएगी यानी कोई चोरी छुपे नहीं रह सकेगा। यदि दोनों के बीच अनबन हो जाती है या स्वेच्छा से अलग होना चाहते हैं तो इसके लिए भी पंजीयन जैसी ही व्यवस्था रहेगी। यानी रजिस्ट्रार के यहां आवेदन देना होगा। लिव इन में जन्मी संतान को सभी उत्तराधिकार मिलेंगे। इसके साथ ही यह प्रविधान भी किया गया है कि बच्चे की संपत्ति माता-पिता, दोनों को मिलेगी। पति की मृत्यु होने पर हक मां का रहेगा। यूसीसी के दायरे में आदिवासी, घुमंतु-अर्द्धघुमंतु और मतांतरित आदिवासी नहीं आएंगे। ये सभी यूसीसी के दायरे से बाहर रखेंगे। विवाह और विवाह विच्छेद के लिए सबके लिए एक जैसे प्रविधान रखेंगे। किसी को कोई विशेषाधिकार नहीं रहेगा।

विधानसभा से पारित होने पर राज्यपाल की अनुमति से सरकार राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेजेगी। यहां से अनुमोदन होने यह लागू होगा। सूत्रों का कहना है कि इस प्रक्रिया में चार-पांच माह लग सकते हैं। इसके बाद नियम बनेंगे। इसके साथ ही मध्य प्रदेश यूसीसी लागू करने वाला देश का चौथा राज्य होगा। उत्तराखंड में इसे लागू किया जा चुका है। गुजरात और असम विधानसभा से यह पारित हो चुका है और लागू होने की प्रक्रिया में है।

 

Topics: मध्य प्रदेश में यूसीसीदेसाई समितिसमान नागरिक संहितासीएम मोहन यादवलिव इन रजिस्ट्रेशन कानून
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