महाराष्ट्र में नासिक के टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) कंपनी में हिंदू महिलाओं के यौन शोषण और जबरन कन्वर्जन मामले में नया खुलासा हुआ है। पुलिस की जांच टीम को निदा खान की एक व्हाट्सऐप चैट मिली है, जिसमें उसने हिंदू पीड़िता के बदले हुए ‘हानिया’ नाम का जिक्र किया है। पुलिस के अनुसार, इससे स्पष्ट होता है कि पीड़िता को कन्वर्जन के जाल में फंसाने के लिए एक सुनियोजित साजिश रची गई थी। इस मैसेज से केस से जुड़े कई और अहम सबूत भी मिले हैं। पीड़िता का नाम बदलकर जानबूझकर हानिया रखा गया था, ताकि उसकी हिंदू पहचान मिटाई जा सके। चैट में टीसीएस मामले की मुख्य आरोपी निदा खान अपनी चचेरी बहन से कह रही है, “आज मैं हानिया के साथ बाहर जा रही हूं, जब उससे पूछा गया कि हानिया कौन है?, तो वह कहती है, वही जिसने कन्वर्जन किया है।”
एसआईटी ने कोर्ट में 1500 पेजों की चार्जशीट दाखिल की
इस गंभीर मामले की पहली सुनवाई सोमवार (25 मई) को नासिक रोड एडिशनल सेशंस कोर्ट में हुई। मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल ने कोर्ट में 1500 पेजों की चार्जशीट दाखिल की है, जिसके बाद कोर्ट ने तुरंत सुनवाई का आदेश दिया। 26 मार्च 2026 को देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई शिकायत के मुताबिक तीनों आरोपियों दानिश शेख, तौसीफ अत्तर और निदा खान के खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने दानिश और तौसीफ को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था।
निदा खान कई दिनों से फरार चल रही थी, जिसे पुलिस ने 7 मई को छत्रपति संभाजीनगर से पकड़ा था। छत्रपति संभाजीनगर के पूर्व एआईएमआईएम पार्षद मतीन पटेल पर आरोप है कि जब निदा खान पुलिस को चकमा देकर अपनी लोकेशन बदलकर छिप रही थी, तब उसने उसे पनाह दी थी। पुलिस ने मतीन पटेल को भी इस मामले में आरोपी बनाया है। जांच में यह भी पता चला है कि भले ही पीड़िता का असली नाम उसकी धार्मिक पहचान के लिए जरूरी था, लेकिन आरोपियों ने उसे मानसिक रूप से परेशान किया और उसे ‘हानिया’ नाम अपनाने के लिए मजबूर किया।
SIT ने जबरन कन्वर्जन से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत जुटाए
नासिक पुलिस आयुक्त संदीप कार्णिक ने मामले की गंभीरता को समझते हुए असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर संदीप मिटके के नेतृत्व में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई है। इस केस की मुख्य आरोपी निदा खान और उसके शौहर के बीच हुई चैट को सबसे अहम सबूत माना जा रहा है। पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक की टीम द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में बताया गया है कि आरोपों की जांच कर रही एसआईटी ने पीड़िता के जबरन कन्वर्जन से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत जुटाए हैं, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। पुलिस ने आरोपियों द्वारा पीड़िता का नाम और पहचान बदलने के लिए इस्तेमाल किए गए मूल दस्तावेज भी जब्त कर लिए हैं। इसके अलावा पीड़िता और आरोपियों के मोबाइल फोन से प्राप्त व्हाट्सऐप चैट स्क्रीनशॉट के रूप में डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं।
निदा खान ने 171 इस्लामिक लिंक्स पीड़िता को भेजे
निदा खान पर आरोप है कि उसने टीसीएस कंपनी के बीपीओ में काम करने वाली कई हिंदू महिलाओं का जबरन कन्वर्जन कराने की कोशिश की और उन्हें लव जिहाद के जाल में फंसाया। निदा खान की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) रिपोर्ट से पता चला है कि केस दर्ज होने के कुछ घंटों के भीतर उसने कई जगह फोन कॉल किए थे। इन कॉल्स ने जांच एजेंसियों का शक और गहरा दिया था। एसआईटी की जांच में सामने आया है कि निदा खान हिंदू पीड़िता का ब्रेनवॉश करने के लिए उसे 171 इस्लामिक लिंक्स भेजे थे। यही नहीं वह उसे अपने घर ले जाती थी। इस दौरान उसे जबरन नमाज पढ़ना, हिजाब और बुर्का पहनना सिखाती थी।
सभी आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज
इसके साथ ही मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज आठ अन्य मामलों की भी जांच चल रही है। पुलिस के अनुसार इन मामलों को भी समय सीमा के भीतर अदालत में पेश किया जाएगा। फिलहाल अदालत ने इस पूरे मामले में आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की सुनवाई विशेष अदालत में चल रही है।
















