महाराष्ट्र के नासिक में स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) कंपनी में हिंदू महिलाओं के यौन शोषण, जबरन कन्वर्जन और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मुंबई नाका थाने में दर्ज आठ मामलों में दो हजार पन्नों से अधिक की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की गई है। हर अपराध के लिए अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की गई है। आरोपियों में रजा रफीक मेमन, शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी, अश्विनी चैनानी, तौसिफ बिलाल अत्तार, शफी भीकन शेख, दानिश एजाज शेख, निदा खान और आसिफ आलम अंसारी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है जल्द ही पूरक चार्जशीट कोर्ट में पेश की जा सकती है।
आठ लोगों के खिलाफ कुल नौ मामले दर्ज
टीसीएस कंपनी से मिली अलग-अलग शिकायतों के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ कुल नौ मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें हिंदू महिलाओं के यौन शोषण, जबरन कन्वर्जन के मामले में एक केस देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में और बाकी आठ मामले मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज किए गए हैं। इस मामले में रजा रफीक मेमन, शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी, अश्विनी चैनानी, तौसिफ बिलाल अत्तार, शफी भीकन शेख, दानिश एजाज शेख, निदा खान और आसिफ आलम अंसारी आरोपी हैं। इन पर महिला कर्मचारियों के साथ छेड़छाड़, यौन शोषण, उन्हें मानसिक रूप से परेशान करने और उनकी धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप है। इन आरोपियों के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में चार्जशीट फाइल की गई है।
50 गवाहों के बयान दर्ज किए
जांच के दौरान पुलिस ने करीब 50 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। इसके अलावा साक्ष्यों में CCTV फुटेज, टेक्निकल-डिजिटल सबूत, अपराध में इस्तेमाल की गई चीजें शामिल हैं। पुलिस कहना है कि दर्ज अपराधों की जांच के दौरान मिले गवाहों के सबूतों के आधार पर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है, लेकिन इन अपराधों की जांच अभी जारी रहेगी और नए साक्ष्य मिलने के बाद कोर्ट में पूरक चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है। कोर्ट ने सभी आरोपियों की जमानत खारिज कर दी है।
पहले 1500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी
इससे पहले टीसीएस मामले में पुलिस नासिक रोड कोर्ट में दानिश शेख, तौसिफ बिलाल अत्तार, निदा खान और मतीन पटेल के खिलाफ 1500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में इनके खिलाफ यौन उत्पीड़न, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के अलावा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं लगाई भी गई थीं। इस केस की जांच एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम कर रही है। इस केस की मुख्य आरोपी निदा खान 40 दिनों से ज्यादा समय से पुलिस को चकमा देकर छिपी हुई थी। उसे छत्रपति संभाजीनगर से 7 मई को गिरफ्तार किया गया था। उस समय इस केस में 17 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। जांच के दौरान पीड़िता और आरोपी के मोबाइल फोन पर हुई बातचीत के स्क्रीनशॉट और फोटो जैसे डिजिटल सबूत इकट्ठा किए गए। जांच में घटनास्थल का पंचनामा, आरोपी के बैंक अकाउंट की डिटेल्स, जाति सर्टिफिकेट, अपराध में इस्तेमाल की गई गाड़ी और फाइनेंशियल फ्रॉड के डॉक्यूमेंट्स भी शामिल हैं।
कैसे सामने आई TCS कांड की सच्चाई?
नासिक के एक स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ता और पीड़ित महिला के परिजनों द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद यह मामला फरवरी 2026 में सबके सामने आया। शिकायत में दावा किया गया था कि टीसीएस कंपनी के बीपीओ में हिंदू महिला कर्मचारियों पर रोजे रखने, बुर्का पहनने और नमाज पढ़ने का दबाव बनाया जाता है। शिकायत के अनुसार, एक हिंदू महिला का इस कदर ब्रेनवॉश किया गया कि वह रमजान के दौरान रोजे रखने लगी थी। इसकी सूचना मिलने के बाद पुलिस को पूरे मामले में संदेह हुआ। नासिक पुलिस ने शुरुआती जांच के लिए कंपनी के अंदर सादे कपड़ों में महिला पुलिसकर्मियों को हाउसकीपिंग कर्मचारियों के रूप में तैनात किया, ताकि अंदर की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। इन महिला पुलिसकर्मियों ने कंपनी के भीतर होने वाली गतिविधियों की बारीकी से निगरानी की और कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाए। इसके बाद यह पूरा मामला उजागर हुआ। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कुछ टीम लीडर अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे थे। आरोप है कि वे केवल हिंदू कर्मचारियों को निशाना बनाकर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते थे व उन पर कन्वर्जन के लिए दबाव बनाते थे। इसके बाद पुलिस ने सात पुरुषों और एक महिला आरोपी को गिरफ्तार किया था। इस मामले की मुख्य आरोपी निदा खान को कई दिनों के सर्च ऑपरेशन के बाद छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार किया गया था।
















