महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) कंपनी में हिंदू महिलाओं के यौन शोषण और जबरन कन्वर्जन मामले की मुख्य आरोपी निदा खान को गर्भवती होने के कारण जमानत दे दी गई है। जमानत देते हुए नासिक की स्पेशल कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणी इन दिनों चर्चा में है। एडिशनल सेशंस जज केजी जोशी ने पांच माह की गर्भवती निदा खान की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए 6 जुलाई को अपने आदेश में कहा, “भगवान कृष्ण की तरह जेल में बच्चे को जन्म देने का मानसिक आघात या उससे जुड़ा सामाजिक कलंक किसी के लिए भी सहने योग्य नहीं है। ऐसी दर्दनाक स्थिति से बचने, नवजात शिशु के स्वागत और समग्र कल्याण के लिए आरोपी याचिकाकर्ता के पक्ष में न्यायिक विवेक का इस्तेमाल करना उचित होगा।”
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इसलिए आरोपी को न्यायिक हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने निदा खान पर शिकायतकर्ता या गवाहों से संपर्क न करने, शिकायतकर्ता के कार्यस्थल या निवास क्षेत्र में नहीं जाने, बिना अदालत की अनुमति देश से बाहर नहीं जाने और जांच में पूरा सहयोग करने समेत कई शर्तें भी लगाई हैं।
इसी मामले में अन्य आरोपी दानिश शेख की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि दानिश ने शादी का झूठा वादा कर पहले पीड़िता का विश्वास जीता और फिर उसके साथ संबंध बनाए। वहीं आरोपी तौसीफ को जमानत तो मिली, लेकिन वह दूसरे मामले में गिरफ्तारी के कारण अभी भी जेल में है।
कोर्ट का फैसला चौंकाने वाला
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने अदालत के फैसले को चौंकाने वाला बताया। उन्होंने प्रश्न किया कि निदा खान की स्थिति की तुलना भगवान कृष्ण के जन्म के हालात से करना क्या सच में सही है? एक अन्य यूजर ने कहा कि अदालत ने भगवान कृष्ण का हवाला देकर निदा खान को जमानत दे दी है। शायद उन्हें यह नहीं पता कि वह मूर्ति पूजा करने वालों से नफरत करती है और भगवान कृष्ण के बारे में अपमानजनक बातें करती है। सेक्युलरिज्म हमें बहुत महंगा पड़ने वाला है। एक यूजर ने एक्स पर लिखा, ”बांग्लादेश में सिर्फ इस्लाम के खिलाफ बोलने पर बिना किसी ट्रायल के जेल में डाल दिया जाता है, लेकिन भारत की अदालतों में एक महीने के अंदर ही कन्वर्जन रैकेट के मास्टरमाइंड को जमानत दे दी जाती है।”
निदा खान पर गंभीर आरोप?
नासिक पुलिस की एसआईटी टीम टीसीएस बीपीओ ऑफिस से जुड़े नौ एफआईआर की जांच कर रही है। इस मामले में मुख्य आरोपी निदा खान पर गंभीर आरोप हैं। उसने कंपनी के बीपीओ में काम करने वाली कई हिंदू महिलाओं का जबरन कन्वर्जन कराने की कोशिश की और उन्हें लव जिहाद के जाल में फंसाया। उनकी धार्मिक भावनाएं आहत कीं। एसआईटी की जांच में यह भी सामने आया है कि निदा खान हिंदू पीड़िता को अपने घर ले जाती थी। इस दौरान उसे जबरन नमाज पढ़ना, हिजाब और बुर्का पहनना सिखाया जाता था। इस मामले में पुलिस ने बताया था कि आरोपी ने मालेगांव पार्टी के जरिए पीड़िता का हिंदू नाम बदलकर मुस्लिम नाम रख दिया था। निदा पर यह भी आरोप है कि उसने ब्रेनवॉश के लिए 171 इस्लामिक लिंक्स पीड़िता को भेजे थे।
मामले की शुरुआत कहां से हुई
इस पूरे मामले की शुरुआत 26 मार्च 2026 को हुई थी। एक हिंदू पीड़िता ने नासिक के देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि जुलाई 2022 से उसे शादी का झूठा वादा कर धोखा दिया गया, जिसके बाद इस मामले की जांच के लिए महिला पुलिसकर्मियों को कंपनी में बतौर कर्मचारी बनाकर भेजा गया। वहां रहते हुए उन्होंने सभी गतिविधियों पर पैनी नजर रखी और आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य इकट्ठा किए। पुलिस के मुताबिक, टीसीएस कंपनी में जबरन कन्वर्जन, यौन शोषण और कार्यस्थल पर धार्मिक उत्पीड़न के आरोपों से संबंधित नौ एफआईआर दर्ज की गई हैं। आरोपियों में सात पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं।
















