स्वतंत्रता संग्राम से सांस्कृतिक पुनर्जागरण तक: गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का प्रेरक जीवन
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स्वतंत्रता संग्राम से सांस्कृतिक पुनर्जागरण तक: गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का प्रेरक जीवन

आगरा जिला गजेटियर में आजादी के आन्दोलन की घटना ‘जरारा आन्दोलन’ के रूप में विस्तार से दर्ज है।

Written byपूनम नेगीपूनम नेगी
Aug 15, 2026, 10:52 pm IST
inभारत
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक/संरक्षक और गायत्री महाविद्या के सिद्ध साधक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य वैचारिक क्रांति के प्रणेता माने जाते हैं। “युग निर्माण योजना” के तहत मानव चेतना, समाज और संस्कृति के उत्थान के लिए 3000 से अधिक पुस्तकों के सृजन द्वारा ‘इक्कीसवीं सदी उज्जवल भविष्य’ की आधारशिला रखने वाले इस महामनीषी का समूचा जीवन ‘साधना से सिद्धि’ की अनूठी प्रयोगशाला माना जाता है। उन्होंने किशोर उम्र में स्वाधीनता संग्राम में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। आगरा प्रान्त के जिला गजेटियर में दर्ज विवरण के अनुसार उन्होंने श्रीराम ‘मत्त’ के रूप वर्ष 1927 से 1933 तक स्वतंत्रता संघर्ष में सक्रिय योगदान दिया था।

बेहोश हो गये पर राष्ट्रध्वज को अपमानित नहीं होने दिया

नमक आंदोलन के दौरान अंग्रेजों ने जुलूस निकालने वाले सत्याग्रहियों पर लाठी व कोड़े बरसाये और राष्ट्रध्वज को पैरों तले कुचलने व जलाने का कुत्सित प्रयास किया। सिपाही उन्हें पीटते और झंडा छीनने का प्रयास करते रहे। उन्होंने अपने मुंह में झंडा दबा लिया, मार खाते-खाते बेहोश हो गए पर अंग्रेज सिपाही लाख कोशिशों के बाद भी उनके मुंह से उसे निकाल नहीं सके। आगरा जिला गजेटियर में आजादी के आन्दोलन की यह घटना ‘जरारा आन्दोलन’ के रूप में विस्तार से दर्ज है। उक्त घटना के उपरांत वह किशोर ‘मत्त’ नाम से आजादी के मतवाले के रूप में समूचे क्षेत्र में लोकप्रिय हो गए।

सरदार भगत सिंह की फांसी का विरोध

जब महान क्रांतिकारी सरदार भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दिये जाने की घटना से आक्रोशित होकर समूचे देश में जगह-जगह उग्र प्रदर्शन होने लगे तो श्रीराम शर्मा आचार्य भी भूमिगत होकर केबल काटने व ट्रेन रोकने जैसी तमाम गतिविधियों में शामिल हुए और अपना असंतोष प्रदर्शित किया

आजादी के संघर्ष के दौरान कई बार गए जेल

अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग आन्दोलन के क्रम में महात्मा गांधी के आह्वान पर वर्ष 1933 में कलकत्ता में कांग्रेस का एक बड़ा अधिवेशन होने वाला था, जिसमें शामिल होने के लिए देशभर से सत्याग्रही कलकत्ता जा रहे थे। अपने कुछ साथियों के साथ श्रीराम शर्मा आचार्य भी कलकत्ता जाने वाली ट्रेन में आगरा से रवाना हुए। पकड़े न जाएं, इसलिए कई ट्रेनें बदलीं। आसनसोल स्टेशन पर आगरा के ही सब इंस्पेक्टर ने पहचान कर उतार लिया व उसी जेल में बंद कर दिया जहां महामना मदनमोहन मालवीय बंद थे।

आसनसोल जेल में साथियों को अक्षर ज्ञान सिखाया

आसनसोल जेल में उन्होंने निरक्षर साथियों को अक्षर ज्ञान सिखाया और अंग्रेजी दैनिक ‘लीडर’ की एक पुरानी प्रति से लोहे के तसले पर कोयले से लिख-लिखकर स्वयं भी अंग्रेजी सीखी। जेल अवधि में अपने दीक्षा गुरु महामना पंडित मदनमोहन मालवीय से जन-जन की साझेदारी बढ़ाने के लिए हर व्यक्ति के अंशदान से, मुट्ठी फंड से रचनात्मक प्रवृत्तियां चलाने का मूलमंत्र भी लिया जो बाद में करोड़ों की भागीदारी वाले अखिल विश्व गायत्री परिवार का मूल आधार बना।

जब संयुक्त प्रान्त में लगान माफी का हुआ आदेश

तत्कालीन भारत में एक अति महत्वपूर्ण विषय लगानबंदी का भी था। आगरा उन दिनों संयुक्त प्रान्त का सबसे बड़ा हिस्सा था। श्रीराम ने अकेले गांव गांव घूम-घूम कर किसानों के नाम, रकबा लगान की रकम आदि की पूरी छान-बीन कर आंकड़े तैयार किये। इतनी विस्तृत, प्रामाणिक जानकारी जब संयुक्त प्रान्त के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविन्दवल्लभ पंत के पास पहुंची तो उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। महात्मा गांधी ने भी प्रशंसा करते हुए कहा था कि देश के हर कार्यकर्ता को इसी स्तर का होना चाहिए तभी हम अपने लक्ष्य को पूरा कर पाएंगे। महात्मा गांधी ने अपनी प्रशस्ति के साथ वे प्रामाणिक आंकड़े ब्रिटिश पार्लियामेन्ट में भेजे थे तथा उन्हीं आंकड़ों के आधार पर पूरे संयुक्त प्रान्त में लगान माफी का आदेश पारित हुआ था।

स्वतंत्रता सेनानी की सुविधाएं प्रधानमंत्री राहत कोष में दी

देश के आजाद होने के 50 साल बाद जब भारत सरकार ने उन्हें स्वतंत्रता सेनानी को मिलने वाली सुविधाओं व पेंशन का पत्रक सौंपा तो उन्होंने सुविधाएं लेने से इंकार कर दिया। अपनी पेंशन प्रधानमंत्री राहत कोष के लिए समर्पित कर दी और राष्ट्र के सांस्कृतिक पुनरुत्थान के लिए मथुरा में गायत्री तपोभूमि और कालांतर में हरिद्वार में गायत्री तीर्थ ‘शांतिकुंज’ की स्थापना के अभियान में संलग्न हो गये।

 

Topics: पंडित श्रीराम शर्मा आचार्यशांतिकुंज हरिद्वारभारत का स्वाधीनता संग्रामगायत्री तीर्थ
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