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असहज अवश्य किन्तु आस्था अडिग

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास पर जितने भी आरोप लग रहे हैं, उनका कोई आधार नहीं है। जिन लोगों ने भगवान राम के अस्तित्व को नकारा, जिन्होंने उनके मंदिर को बनने से रोकने के लिए छल—कपट किया, वे अब 'राम' की बात कर रहे हैं। ऐसे छलियों को करारा जवाब अयोध्या पहुंच रहे रामभक्त ही दे रहे हैं

Written byडॉ. सुरेंद्र कुमार जैनडॉ. सुरेंद्र कुमार जैन
Jul 13, 2026, 03:51 pm IST
inविश्लेषण, धर्म-संस्कृति
अयोध्या में स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज और श्री कृष्ण मोहन मीडिया को उन वस्तुओं को दिखाते हुए, जिनके बारे में कहा गया कि वे गायब हैं।

अयोध्या में स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज और श्री कृष्ण मोहन मीडिया को उन वस्तुओं को दिखाते हुए, जिनके बारे में कहा गया कि वे गायब हैं।

पूरा विश्व जानता है कि राम भारत की आस्था, आत्मा और पहचान हैं। रामभक्तों ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए 490 वर्ष तक निरंतर संघर्ष किया और बलिदान दिए। न्यायालय द्वारा राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने पर जिस प्रकार 65 करोड़ रामभक्तों ने मंदिर निर्माण में अपना योगदान दिया वह राम के प्रति अटूट श्रद्धा का ही प्रमाण है। राम और राम मंदिर के प्रति कई प्रकार के निहित स्वार्थों ने अनास्था निर्माण करने का असफल प्रयास किए हैं। लेकिन पिछले दिनों राम मंदिर में रामभक्तों के चढ़ावे में अनियमितताओं के आरोपों ने रामभक्तों को असहज अवश्य किया है, लेकिन उनकी आस्थाएं अडिग हैं।

एसआईटी की मांग

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास ने अनियमितताओं की जानकारी मिलते ही आंतरिक जांच की और गड़बड़ी की व्यापकता को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार से विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की मांग की। प्रदेश सरकार ने प्रदेश के शीर्ष अधिकारियों की एक टीम बनाई जिसने अपनी जांच का काम अविलंब प्रारंभ कर दिया। इस समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट में आठ आरोपियों के नाम थे। न्यास ने उन सब पर अविलंब एफआईआर दर्ज की तथा पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करके कानूनी कार्यवाही प्रारंभ कर दी। दोनों आरोपित न्यासियों ने भी नैतिकता के आधार पर न्यास से त्यागपत्र दे दिया। उन त्यागपत्रों पर विचार करने के लिए 6 जुलाई को न्यास की बैठक आहूत की गई।

भारत के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि आरोपित स्वयं एसआईटी के गठन की मांग कर रहे हैं और बिना किसी बहानेबाजी के उनके समक्ष जा रहे हैं तथा प्रश्नों का उत्तर दे रहे हैं। जो भी साक्ष्य मांगे गए एसआईटी को प्रस्तुत किए गए।

वस्तुओं का सत्यापन

न्यास की बैठक में त्यागपत्र स्वीकार कर लिया गया एवं एक अन्य न्यासी श्री कृष्ण मोहन जी को कार्यवाहक महामंत्री नियुक्त कर दिया। इस बैठक में एसआईटी की जांच प्रक्रिया पर संतोष व्यक्त किया गया और यह विश्वास दिलाया कि राम जन्मभूमि में भगवान राम को भेंट की गई हर वस्तु सुरक्षित है। पूज्य गोविंद देव गिरी जी महाराज ने जिन बहुमूल्य वस्तुओं के गायब होने के आरोप लग रहे थे उन्हें मीडिया को दिखाया और स्पष्ट किया कि जिसे भी शंका हो वह वहां पर आकर अपनी वस्तुओं का सत्यापन कर सकते हैं। जांच के लिए अगर किसी के पास कोई साक्ष्य है तो वह जांच समिति के सामने रखें। न्यास ने यह विश्वास भी व्यक्त किया कि कोई भी दोषी बच नहीं पाएगा और चढ़ावा संबंधी सभी व्यवस्थाएं पहले से अधिक मजबूत होंगी।

हमारा संकल्प

इस अवधि में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह भी हो गया कि कुछ लोग उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में अपनी याचिकाएं लेकर गए और सीबीआई, ईडी या किसी न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच की मांग प्रस्तुत कर दी गई। विहिप व न्यास की ओर से कहा गया कि न्यायपालिका इस संबंध में जो भी निर्णय लेगी हम उसका सम्मान करेंगे। जहां हमारा संकल्प है कि कोई दोषी बचने ना पाए, वहीं हम यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि केवल आरोप के आधार पर किसी को दोषी न माना जाए। निराधार आरोपों के आधार पर ‘मीडिया ट्रायल’ करना, न केवल उसका चरित्र हनन होता है, अपितु किसी भी प्रतिष्ठित व समाज के प्रति समर्पित व्यक्ति के लिए किसी भी सजा से कम नहीं होता। माननीय न्यायपालिका ने भी कई बार ‘मीडिया ट्रायल’ में यही सावधानी रखने के लिए आगाह भी किया है।

किसी को बचाने का प्रयास नहीं

न्यास ने किसी तथ्य को छिपाया नहीं, किसी व्यक्ति को बचाने का प्रयास नहीं किया। जांच एजेंसियों को हर संभव सहयोग किया है जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए। दुर्भाग्य से कुछ रामद्रोही राजनेताओं ने इस अवसर का दुरुपयोग अपनी राजनीतिक गोटियां खेलने के लिए किया। जिन्होंने रामभक्तों पर गोलियां चलाईं, राम के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगाए, राम जन्मभूमि पर न्यायपालिका के निर्णय को लटकाने, अटकाने या भटकाने का काम किया, जो बार-बार हिंदुओं की आस्थाओं पर प्रहार करते रहे वे अब रामभक्त बनकर न्यास पर निराधार आरोप लगा रहे हैं। जांच एजेंसियों के सामने साक्ष्य प्रस्तुत करने की बात कहने पर इनमें से कोई भी साक्ष्य लेकर नहीं आया। इसके विपरीत वे किसी आरोप के असत्य सिद्ध होने पर वे दूसरा अनर्गल आरोप लगाते थे। वामपंथियों की रणनीति ‘थूको और भागो’ का बहुत ही बेशर्मी के साथ प्रयोग किया गया।

असत्य का नहीं होता अस्तित्व

अनर्गल आरोप

अनेक अनर्गल आरोप लगाए जाते रहे। एक आरोप के झूठा सिद्ध होने पर ये राम विरोधी पहले गलती के लिए क्षमा याचना करने की जगह बहुत बेशर्मी के साथ दूसरा आरोप लगाते थे। आरोप लगाने वाले कुछ नेताओं का अनर्गल प्रलाप करने का पुराना इतिहास है। उन्हें कई बार इसके लिए क्षमा भी मांगनी पड़ी है। इस बार मीडिया का एक वर्ग भी इन अनर्गल आरोपों के प्रचार में सहयोगी बना। इस अनर्गल प्रचार के असत्य सिद्ध होने के बाद इन्होंने न्यास में सम्मिलित पूज्य संतों के चरित्र हनन का महापाप भी शुरू कर दिया।

इन सबका उद्देश्य न्यास के प्रति अविश्वास निर्माण कर राम जन्मभूमि और राम के प्रति अनास्था निर्माण करना ही था। इन सब ने पहले भी इस प्रकार के षड्यंत्र किए हैं, लेकिन ये कभी सफल नहीं हो पाए। भगवान राम के प्रति भक्तों की आस्था अटूट है। इन सब दुष्प्रचारों के बावजूद अयोध्या में आने वाले दर्शनार्थी रामभक्तों की संख्या कम नहीं हुई है। रामभक्तों को विश्वास है कि यह चोरी की घटना है जो व्यवस्था में चूक की कमी से हुई है।

इन चोरों को दंडित किया जा रहा है, कोई बचाने का प्रयास नहीं कर रहा। व्यवस्था में संलग्न सर्वोच्च व्यक्ति भी अपनी जांच के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। यह सबको विश्वास है कि व्यवस्था पहले से भी मजबूत तथा पारदर्शी बनेगी।

आस्था पर चोट सही, नीयत में खोट नहीं!

Topics: Shri Ram Janmabhoomi TeerthDr. Surendra Kumar Jain. VHPचरित्र हनन#रामद्रोही राजनीतिआस्था और संकल्पअडिगआस्थाAyodhyaअटूट श्रद्धाएफआईआरSITपाञ्चजन्य विशेषमीडिया ट्रायल
डॉ. सुरेंद्र कुमार जैन
डॉ. सुरेंद्र कुमार जैन
संयुक्त महामंत्री, विश्व हिंदू परिषद् [Read more]
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