स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले पर होने वाले आधिकारिक कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी शामिल नहीं हुए। इस बात पर भाजपा ने उनकी आलोचना की है। पार्टी ने कहा कि यह फैसला उनके दिमागी नक्सल मानसिकता को दिखाता है।
कार्यक्रम में कौन-कौन मौजूद थे
लाल किले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आजादी का उत्सव मनाया गया। इसमें कई बड़े नेता और अधिकारी मौजूद रहे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस जयशंकर समेत सभी बड़े केंद्रीय मंत्री वहां थे। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा व शक्तिकांत दास भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
भाजपा प्रवक्ता ने क्या कहा
भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि राहुल गांधी लाल किले पर मौजूद नहीं रहे। भंडारी ने सवाल उठाया कि क्या कोई देशभक्त विपक्ष का नेता या कोई सार्वजनिक पद पर बैठा व्यक्ति खुद अपनी मर्जी से ऐसा कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का यह फैसला वंदे मातरम के प्रति उनकी नफरत को दर्शाता है। भंडारी ने आगे कहा कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता (लीडर ऑफ अपोजिशन) बनने लायक नहीं हैं। उनका मानसिकता दिमागी नक्सल इकोसिस्टम जैसी है।
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यह दूसरी बार हुआ
यह लगातार दूसरा साल है जब राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दोनों लाल किले के आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं हुए। पिछले साल भी उन्होंने इस कार्यक्रम को स्किप किया था।
मामले की मुख्य बातें
भाजपा का आरोप मुख्य रूप से राहुल गांधी की गैर-मौजूदगी पर आधारित है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष के नेता होने के नाते उन्हें इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में हिस्सा लेना चाहिए था। भंडारी ने अपनी पोस्ट में साफ शब्दों में राहुल गांधी को ‘दिमागी नक्सल’ मानसिकता वाला बताया। उन्होंने इसे देशभक्ति के खिलाफ कदम करार दिया।
कार्यक्रम में सरकारी स्तर पर पूरी तैयारी थी और तमाम उच्च अधिकारी व मंत्री मौजूद रहे। राहुल गांधी और खड़गे की अनुपस्थिति पर ही भाजपा ने अपना बयान जारी किया। प्रदीप भंडारी के ट्वीट या पोस्ट के जरिए ही यह आलोचना सामने आई। इसमें उन्होंने राहुल गांधी को विपक्ष के नेता के पद के लिए अनुपयुक्त बताया।
इस घटना को लेकर भाजपा ने राजनीतिक हमला बोला है। पार्टी का फोकस मुख्य रूप से राहुल गांधी के फैसले और उसके मतलब पर रहा। उन्होंने इसे वंदे मातरम से जुड़ी भावनाओं से भी जोड़ा।











