'गाय काटना मजहबी अधिकार नहीं': VHP ने की राज्यों से बड़ी मांग
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‘गाय काटना मजहबी अधिकार नहीं’: VHP ने कोलकाता HC के फैसले का किया स्वागत, कहा- हिंदू समाज गौ हत्या बर्दाश्त नहीं करेगा

कलकत्ता HC के निर्णय का विहिप ने किया भव्य स्वागत; VHP के डॉ. सुरेंद्र जैन ने मुस्लिम नेतृत्व और मौलवियों से किए तीखे सवाल और अन्य राज्य सरकारों से की सख्त कानून बनाने की मांग

Written byShivam DixitShivam Dixit
May 23, 2026, 02:19 pm IST
in भारत, धर्म-संस्कृति, दिल्ली, पश्चिम बंगाल
Calcutta High Court Cow Slaughter VHP Dr Surendra Jain

नई दिल्ली | विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कोलकाता उच्च न्यायालय के उस निर्णय का स्वागत किया है जिसमें बकरीद के अवसर पर गौहत्या पर लगाए गए प्रतिबंधों को उचित ठहराते हुए कहा गया है कि गाय काटना मुस्लिम समाज का मजहबी अधिकार नहीं है।

विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा है कि कोलकाता उच्च न्यायालय ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस संबंध में दिए गए एक निर्णय का संदर्भ भी दिया है जिसमें गौहत्या पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकारों द्वारा बनाए गए अधिनियमों को उचित ठहराया था।

अब यह स्पष्ट हो गया है कि भारत में गौहत्या करना कानूनी अपराध है और हिंदू समाज इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।

न्यायपालिका और जनभावना का सम्मान करें राज्य सरकारें

डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा कि भारत के अधिकांश राज्यों में गौ हत्या निषेध का कानून पहले से है। शेष राज्य सरकारों को भी न्यायपालिका व हिंदू समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए अपने-अपने राज्यों में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना चाहिए। इन राज्यों को भी स्पष्ट कर देना चाहिए कि वे भारतीय संविधान के साथ हैं या गौहत्यारों के।

प्रेस वक्तव्य:
गौ हत्या असंवैधानिक व अक्षम्य अपराध; हिंदू समाज इसे बर्दास्त नहीं करेगा: डॉ सुरेंद्र जैन

नई दिल्ली। मई 23, 2026। विश्व हिंदू परिषद ने कोलकाता उच्च न्यायालय के उस निर्णय का स्वागत किया है जिसमें बकरीद के अवसर पर गौहत्या पर लगाए गए प्रतिबंधों को उचित ठहराते हुए कहा… pic.twitter.com/P0vjmF5isn

— Vishva Hindu Parishad -VHP (@VHPDigital) May 23, 2026


विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. जैन ने कहा-

“बंगाल व दिल्ली की सरकारों ने अपने ताजा आदेशों में बकरीद के अवसर पर होने वाली गौहत्या ही नहीं रोकी अपितु उस के लिए ऐसी व्यवस्था भी बनाई है जो पर्यावरण को खतरा पैदा ना कर सके और बर्बर रक्तपात के सार्वजनिक प्रदर्शन द्वारा शांतिप्रिय समाज को भी आहत न करे। विहिप इन दोनों सरकारों का अभिनंदन करती है।”

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मुस्लिम नेतृत्व और मुल्ला मौलवियों से तीखे सवाल

विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री ने गौहत्या के लिए भड़काने वाले मुस्लिम नेताओं व मुल्ला मौलवियों से पूछा कि भारत के अलावा कहीं और का मुसलमान गौहत्या के लिए जिद क्यों नहीं करता? क्या केवल हिंदू समाज को चिढ़ाने के लिए वे सर्व कल्याणकारी गौ माता की हत्या करवाते हैं? ऐसा कर वे न केवल हिंदू समाज की भावनाओं को आहत करते हैं अपितु संविधान विरोधी कुकृत्य भी करते हैं।

उन्होंने कहा-

“सड़क पर नमाज के बाद अब गौ हत्या के लिए उकसा कर वे मुस्लिम समाज के मन में हिंदुओं और न्यायपालिका के प्रति घृणा निर्माण कर रहे हैं जो कि उन के हित में नहीं है। कानून व हिंदू समाज की भावनाओं का सम्मान करके ही वे शांतिपूर्ण सह अस्तित्व में सहभागी बन सकते हैं।”

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फेक नैरेटिव और राष्ट्रीय सम्मान

डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा कि गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित कराने के एक फेक नैरेटिव फैलाने वाले मुल्ले मौलवी बताएं कि जब वे राष्ट्र गीत वंदेमातरम् का ही खुल्ले में विरोध करते हैं तो भला वे कथित राष्ट्रीय पशु का सम्मान कैसे करेंगे? वे सब इस माध्यम से गौ हत्या के सजा से बचने का सिर्फ एक आसान मार्ग ढूंढ रहे हैं। गौ हत्यारों को कठोर सजा ही सही समाधान है।

विहिप और बजरंग दल का संकल्प

उन्होंने कहा कि गोहत्या के महापाप को रोकना हिंदू का हमेशा से संकल्प रहा है। विहिप के गौरक्षा विभाग और बजरंग दल की गौरक्षा समितियां पूरे देश में निगरानी करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि सब न्यायपालिका के आदेश और संविधान का पालन करें।

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Topics: Supreme Court Cow ProtectionWest Bengal Government NewsCalcutta High Court decisionCow Slaughter Law IndiaVHP Dr Surendra JainBakrid Cow Slaughter Ban
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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