क्या धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर सार्वजनिक सड़कों को घंटों जाम करना और न्यायपालिका के आदेशों को ठेंगा दिखाना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य हो सकता है? विश्व हिन्दू परिषद ने सड़कों पर नमाज़ की ज़िद के खिलाफ एक बार फिर बड़ा मोर्चा खोल दिया है।
सड़कों पर नमाज़ केवल संविधान विरोधी ही नहीं, बल्कि न्यायपालिका की भी अवमानना: डॉ. सुरेंद्र जैन
विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा कि सड़कों पर नमाज़, नमाज़ नहीं फसाद है। यह केवल संविधान विरोधी ही नहीं है, अपितु मानवता और इस्लाम विरोधी भी है।
इसके दुष्परिणामों को देखते हुए ही सात उच्च न्यायालयों ने सड़कों पर नमाज़ रोकने के आदेश दिए थे। सर्वोच्च न्यायालय भी ऐसे संकेत दे चुका है। इसका अर्थ है कि सड़क पर नमाज़ पढ़ने की जिद न्यायपालिका की अवमानना भी है।
घंटों बाधित रहती थीं ट्रेनें और स्कूल बसें: गुरुग्राम व दिल्ली के ट्रैफिक जाम का किया जिक्र
डॉ. जैन ने जाम की समस्या पर प्रहार करते हुए कहा कि यह केवल पांच मिनट का मामला नहीं है। इसके प्रभाव दूरगामी और पीड़ादायक हैं-
- रेलवे पर असर: दिल्ली के सभी महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों पर घंटों ट्रेन बाधित हो जाती थी, जब पटरियों पर बैठकर नमाज़ पढ़ी जाती थी।
- हाईवे जाम: गुरुग्राम से गुजरने वाले जयपुर हाईवे पर 8-8 घंटे ट्रैफिक जाम होता था।
- मासूमों की पीड़ा: स्कूल बसें जाम में फंस जाती थी और मासूम बच्चे बिलखते रहते थे।
मुस्लिम देशों और हदीसों में भी रोक : डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा कि कई हदीसों में भी सड़क पर नमाज़ पढ़ने के लिए मना किया है। इसलिए कई मुस्लिम देशों में भी इस पर प्रतिबंध है। किसी भी सभ्य समाज में इसको अनुमति नहीं दी जा सकती।
मस्जिदें खाली, फिर भी सड़क पर उतरने की ज़िद, आतंकित करने की साजिश
उन्होंने पूछा कि भारत में यह ज़िद क्यों करना चाहते हैं? वे कहते हैं कि हमें मस्जिदों में जगह नहीं मिलती तो हम सड़क पर उतरते हैं। डॉ. जैन ने गुरुग्राम का उदाहरण देते हुए इस तर्क की पोल खोली-
जब गुरुग्राम में 38 जगह सड़कें रोक कर नमाज़ पढ़ी जाती थी, तब समाज को गुस्सा आया और इसे रोकने के लिए आंदोलन हुए। उस समय पत्रकारों ने दिखाया था कि गुरुग्राम से 40 किलोमीटर दूर से ट्रकों में चटाइयां और लोग लाए जा रहे हैं। जबकि, रास्ते में पड़ने वाली बीसियों मस्जिदें खाली रहती थीं।
विहिप नेता ने स्पष्ट किया कि यह तर्क केवल धोखा देने की कोशिश के अलावा कुछ नहीं है। वास्तव में तो यह एक शक्ति प्रदर्शन है। वे प्रशासन और हिन्दू समाज को अपना संख्या बल दिखाकर आतंकित करना चाहते हैं।
डॉ. जैन ने जोर देकर कहा- “यह आतंकवाद का ही एक प्रकार है,”
राज्य सरकारों और मौलवियों से अपील
उन्होंने कहा कि सभी राज्य सरकारों से अपील है कि वे सख्ती से सड़कों पर नमाज़ पढ़ने पर रोक लगाकर न्यायपालिका और संविधान का पालन करने के लिए सबको प्रेरित करें। मौलवियों को भी चाहिए कि वे मुस्लिम समाज को कानून का पालन करने की प्रेरणा दें, ना कि उन्हें आतंकवाद के एक और मार्ग पर धकेलें।

















