भारत को सशक्त करने का ‘सूत्र’
September 13, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

भारत को सशक्त करने का ‘सूत्र’

त्रिभाषा प्रणाली भारतीय शिक्षा व्यवस्था में बहुभाषिकता को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रही है। यह न केवल भाषाई विविधता को प्रोत्साहित करती है, बल्कि राष्ट्रीय एकता और संज्ञानात्मक विकास को भी मजबूती प्रदान करती है।

Written byप्रणय कुमारप्रणय कुमार
May 7, 2026, 12:53 pm IST
inभारत, विश्लेषण, शिक्षा

त्रिभाषा प्रणाली को भारतीय शिक्षा व्यवस्था में बहुभाषिकता को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा गत 9 अप्रैल को जारी एक आधिकारिक परिपत्र के माध्यम से शैक्षणिक सत्र 2026–27 से कक्षा 6 में तीसरी भाषा (आर 3) को अनिवार्य करने का स्वागत योग्य निर्णय लिया गया है। इस प्रावधान के अंतर्गत अब कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों के लिए चरणबद्ध तरीके से तीन भाषाओं (आर 1, आर 2 एवं आर 3) का अध्ययन अनिवार्य होगा। इस सत्र में इसे केवल कक्षा 6 के लिए लागू किया गया है, परंतु हर वर्ष इसमें अगली कक्षा को जोड़ा जाएगा। यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक या पाठ्यक्रमीय परिवर्तन भर नहीं है, अपितु भारतीय शिक्षा व्यवस्था में बहुभाषिकता को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विद्यालय आधारित होगा मूल्यांकन

सीबीएसई के दिशा-निर्देशों के अनुसार आर 1 को सामान्यतः प्रथम भाषा, अर्थात मातृभाषा या बोर्ड द्वारा प्रस्तावित किसी भाषा के रूप में रखा जाएगा। आर 2 द्वितीय भाषा होगी, जो हिंदी, अंग्रेजी अथवा आर 1 से भिन्न कोई अन्य मानक भाषा हो सकती है। आर 3 को तृतीय भाषा के रूप में किसी अन्य भारतीय या विदेशी भाषा के रूप में चुना जा सकेगा, किंतु यह अनिवार्य होगा कि तीन में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की हों। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि तीनों भाषाएं अलग-अलग होंगी और एक ही भाषा को एक से अधिक स्तरों यानी आर 1, आर 2 या आर 3 पर नहीं पढ़ाया जा सकेगा। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी विद्यार्थी कक्षा 10 की माध्यमिक परीक्षा में तब तक बैठने के लिए पात्र नहीं होगा, जब तक उसने तीसरी भाषा अर्थात आर 3 में उत्तीर्णता प्राप्त नहीं कर ली हो। वर्तमान शैक्षणिक सत्र में कक्षा 6 में अध्ययनरत विद्यार्थी 2030-31 में कक्षा 10 में पहुंचने पर इस व्यवस्था के अंतर्गत आने वाले पहले बैच होंगे।

पाठ्यक्रम के अनुसार, 2031 में तीसरी भाषा के लिए बोर्ड परीक्षा के बजाय विद्यालय आधारित आंतरिक मूल्यांकन होगा। हर विद्यालय को यह तय करना होगा कि वह तीसरी भाषा के रूप में कौन सी भाषा पढ़ाएगा और उसके बाद उसे यह जानकारी सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय को उपलब्ध करानी होगी। साथ ही, उसे इसे ओएसिस पोर्टल पर भी अद्यतन (अपडेट) करना होगा। यह व्यवस्था स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि बोर्ड इस नीति को गंभीरता से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसे केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रखना चाहता।

पहले की सरकारें नहीं कर सकीं

विद्यालयों को यह निर्देश दिया गया है कि वे आर 3 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु समयबद्ध योजना बनाएं, योग्य शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करें तथा आवश्यक पाठ्यसामग्री की व्यवस्था करें। इस व्यवस्था को चरणबद्ध रूप से लागू करने का उद्देश्य है कि इस प्रणाली से सीखने-सिखाने (शिक्षण और अधिगम) और मूल्यांकन की प्रक्रिया में सुविधा हो। नए पाठ्यक्रम में कक्षा 6 से तीसरी भाषा का शिक्षण नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क-2023 द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप होगा। इसके अनुसार मध्य स्तर (कक्षा 6 से 8) में विद्यार्थियों से अपेक्षा की जाएगी कि वे तीसरी भाषा में दैनिक जीवन से जुड़े संवाद कर सकें। यह दृष्टिकोण भाषा को केवल परीक्षा के विषय के रूप में नहीं, बल्कि जीवनोपयोगी कौशल के रूप में स्थापित करता है। यह संपूर्ण पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के बहुभाषिक दृष्टिकोण को लागू करने की दिशा में एक ठोस और बहुप्रतीक्षित कदम है। उल्लेखनीय है कि 1968 और 1986 की शिक्षा नीतियों में भी त्रिभाषा सूत्र का प्रस्ताव किया गया था, किंतु उसका प्रभावी और समान रूप से क्रियान्वयन नहीं हो सका। वर्तमान पहल प्रकारांतर से उस ऐतिहासिक संस्तुति को भी व्यावहारिक रूप देने का एक सुविचारित प्रयास है।

सकारात्मक और दूरदर्शी पहल को भी कुछ राजनीतिक दलों द्वारा संकीर्ण दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। इसे “हिंदी थोपने का प्रयास” बताकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि वस्तुस्थिति यह है कि इस नीति में किसी एक भाषा को अनिवार्य रूप से थोपने का कोई प्रावधान नहीं है। अपितु यह नीति अधिक लचीला विकल्प उपलब्ध कराती है और स्थानीय भाषा एवं आवश्यकता को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि तीनों भाषाओं का चयन राज्यों, क्षेत्रों और विद्यार्थियों की पसंद के अनुसार होगा।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि यह व्यवस्था केवल उन विद्यालयों पर लागू होगी जो सीबीएसई से संबद्ध हैं। अनेक ऐसे विद्यालय हैं, जो पहले से ही विद्यार्थियों को तीसरी भाषा का विकल्प प्रदान करते रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कोई बिल्कुल नई या अप्रत्याशित व्यवस्था नहीं है। गत वर्ष लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु के 3.2% विद्यालयों (राज्य के कुल 1905 विद्यालय) में तीन भाषाएं पढ़ाई जाती रही हैं, जबकि तमिलनाडु में सीबीएसई से संबद्ध विद्यालयों की कुल संख्या ही 1800 के आसपास है।

इन आंकड़ों से स्वाभाविक रूप से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि “हिंदी थोपे जाने” का आरोप कितना असत्य, आधारहीन और भ्रामक है। भाषा के नाम पर राजनीति करने वालों के लिए एक और तथ्य ध्यान देने योग्य है। कर्नाटक में शैक्षिक वर्ष 2026 के दौरान राज्य बोर्ड के 93% छात्रों (8.1 लाख में से 7.5 लाख से अधिक) ने तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को चुना है। दक्षिण भारतीय राज्यों में “हिंदी विरोध” अथवा “हिंदी थोपे जाने” के आरोप की पोल खोलने के लिए यह एक उदाहरण ही पर्याप्त है। दरअसल भाषा-भेद के आधार पर उत्तर-दक्षिण को बांटने वाली राजनीति करने वाले नेताओं और दलों के मन में यह आशंका बनी रहती है कि कहीं त्रिभाषा सूत्र के सफल होने से उनकी राजनीति कमजोर न पड़ जाए।

मानसिक सुदृढ़ता

त्रिभाषा की शिक्षा से बच्चों पर अनावश्यक बोझ बढ़ने जैसी तर्कहीन बातें कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी करते हैं, किंतु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए अनेक शोध इस धारणा का स्पष्ट खंडन करते हैं। विशेष रूप से इलेन बायलिस्टोक (कनाडा की प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक) के अध्ययनों से यह सिद्ध होता है कि बहुभाषी बच्चों में संज्ञानात्मक लचीलापन, एकाग्रता तथा समस्या-समाधान की क्षमता अधिक विकसित होती है। वे एक साथ अनेक कार्यों को कुशलतापूर्वक संपन्न करने में सक्षम होते हैं तथा उनकी निर्णय-क्षमता भी अपेक्षाकृत अधिक परिपक्व होती है।

इसी प्रकार कैंब्रिज विश्वविद्यालय सहित विश्व के अन्य प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के अनुसंधानों में यह निष्कर्ष सामने आया है कि बहुभाषिकता मस्तिष्क को अधिक सक्रिय और सुदृढ़ बनाती है। इसके परिणामस्वरूप वृद्धावस्था में होने वाली न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियां, विशेषकर स्मृतिलोप (डिमेंशिया), बहुभाषी व्यक्तियों में अपेक्षाकृत देर से प्रकट होती हैं। इथियोपिया में मातृभाषा आधारित शिक्षा पर किए गए एक अध्ययन से यह तथ्य सामने आया कि जिन विद्यार्थियों ने प्रारंभिक शिक्षा अपनी मातृभाषा में ग्रहण की और बाद में माध्यमिक कक्षाओं में अंग्रेजी जैसी दूसरी भाषा में स्थानांतरित हुए, उनका शैक्षणिक प्रदर्शन अधिक प्रभावी रहा। इस शोध को यूनेस्को का भी समर्थन प्राप्त रहा है।

भारतीय भाषाओं में सहअस्तित्व

आज के भारत में, जहां लाखों प्रवासी श्रमिक एक राज्य से दूसरे राज्य में रोजगार के लिए जाते हैं, वहां उनके बच्चों की शिक्षा की निरंतरता एक बड़ी चुनौती बन जाती है। भाषा का अंतर उनके लिए एक प्रमुख बाधा होता है। ऐसे में बहुभाषिक शिक्षा व्यवस्था उनके लिए सेतु का कार्य कर सकती है, जिससे वे नए परिवेश में सहज रूप से समायोजित हो सकें। त्रिभाषा प्रणाली न केवल शैक्षिक निरंतरता सुनिश्चित करती है, बल्कि विद्यार्थियों के दृष्टिकोण को व्यापक बनाती है। यह उन्हें विविध संस्कृतियों, परंपराओं और विचारों से परिचित कराती है। एक से अधिक भाषाओं का ज्ञान व्यक्ति के संज्ञानात्मक विकास, रचनात्मकता और संप्रेषण कौशल को भी सुदृढ़ करता है। वैश्वीकरण के इस युग में, जहां बहुभाषिकता एक महत्वपूर्ण कौशल बन चुकी है, यह व्यवस्था विद्यार्थियों को भविष्य के लिए अधिक सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाती है।

भारतीय भाषाओं के संदर्भ में यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि उनमें भेद या संघर्ष नहीं, बल्कि विभिन्न स्तरों पर परस्पर गहरी समानताएं विद्यमान हैं। उन समानताओं का विस्तार भाव, विचार, संरचना, व्याकरण से लेकर लोकोक्ति, मुहावरों और लोक कथाओं तक फैला हुआ है। ध्वनि विज्ञान, पद विन्यास, वाक्य विन्यास, शब्द रचना और अर्थ निष्पत्ति के स्तर पर भारतीय भाषाओं में अद्भुत समानता देखने को मिलती है। इन सबको जानकर और पढ़कर सभी क्षेत्रों के छात्र परस्पर निकट आएंगे। विभिन्न भारतीय भाषाओं का अध्ययन कर उनमें पारस्परिक जुड़ाव और सांस्कृतिक एकता का सजीव संचार होगा।

‘वैविध्य में एकत्व’ की भारतीय जीवन दृष्टि का मूल आधार भी यही है। क्या यह सत्य नहीं कि तमाम कृत्रिम और प्रचारित भेदभावों के बावजूद उत्तर-दक्षिण, पूरब-पश्चिम के मध्य सतत सांस्कृतिक संवाद रहा है? क्या तीर्थों, मेलों और उत्सवों में इसकी अभिव्यक्ति नहीं दिखती? दक्षिण भारत से निकले आदिगुरु शंकराचार्य ने पूरे देश में सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ किया। इतिहास साक्षी है कि संतों, कवियों और दार्शनिकों ने भाषा, पंथ और प्रांत के भेद से ऊपर उठकर समरसता का संदेश दिया।

भाषा का उद्देश्य विभाजन नहीं, बल्कि संवाद और एकता को सुदृढ़ करना है। समय की मांग है कि हम भाषा को राजनीति का विषय बनाने के बजाय उसे सहयोग, संपर्क और सशक्तिकरण का माध्यम बनाएं। त्रिभाषा प्रणाली इसी दिशा में एक सार्थक पहल है, जो शिक्षा को अधिक समावेशी बनाएगी और भारत की सांस्कृतिक तथा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करेगी।

 

Topics: बहुभाषिकताकरने की क्षमता। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020आंतरिक मूल्यांकनशिक्षण और अधिगमभ्रामक प्रचाक्षेत्रीय भाषावैविध्य में एकत्वसांस्कृतिक एकतासमावेशी शिक्षापाञ्चजन्य विशेषत्रिभाषा प्रणाली
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

यायावर कायनात काजी और लेखक राहुल नील से चर्चा करते हुए तृप्ति श्रीवास्तव

ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘पूरा जीवन कम है भारत को समझने के लिए’

ओडिशा की उड़ान 2.0 में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अमित दुबे  से बातचीत करते हुए  वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा

ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘साइबर अपराध से सतर्कता ही बचाव’

‘सुशासन संवाद : ओडिशा की उड़ान 2.0’ में  विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र  कुमार जैन से वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा

ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘हमारी यात्रा राम मंदिर से राष्ट्रमंदिर की है’

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से बातचीत करते पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर

ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘हमारा लक्ष्य सुशासन और विकास’

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी से पाञ्चजन्य की सलाहकार संपादक तृप्ति श्रीवास्तव ने बातचीत की।

ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘वंदे मातरम्’ पर भारतवासियों को गर्व 

ओडिशा की उड़ान 2.0’ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी से बातचीत करते पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर

सुशासन संवाद : ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘अमेरिका में संघ को विरोध से अधिक समर्थन मिला’

Load More

ताज़ा समाचार

mcu bhopal special lecture on swami vivekananda chicago address mukul kanitkar

MCU भोपाल में बोले मुकुल कानिटकर- ‘शक्तिहीन शिकायत करता है, युवा समाधान देता’ है

उज्जैन में विश्व बंधुत्व दिवस पर बोले पराग अभ्यंकर: युवा शक्ति को दिशा देने के लिए संस्कार, विवेक और राष्ट्रबोध जरूरी

badhalganj gorakhpur rss centenary yuva samvad deepak visput address

बड़हलगंज में RSS शताब्दी वर्ष पर युवा संवाद: दीपक विस्पुते जी ने दिया ‘राष्ट्र प्रथम’ और सामाजिक एकता का मंत्र

गुवाहाटी: प्राग्ज्योतिषपुर विश्वविद्यालय पहुंचे सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, शिक्षा, संस्कृति व मूल्यों पर दिया जोर

ब्रिक्स में भारत की कूटनीतिक जीत: दिल्ली डिक्लेरेशन में पहलगाम हमले की निंदा

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दिल्ली घोषणापत्र जारी : UNSC सुधार, स्थानीय मुद्रा और आतंकवाद पर कड़ा प्रहार

ब्रिक्स समूह के सदस्यों ने साफ कहा कि आतंकवाद बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पाकिस्तान को कड़ा संदेश : ब्रिक्स देशों ने पहलगाम हमले की कड़ी निंदा की, कहा- आतंकवाद बर्दाश्त नहीं

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पौधरोपण करते ब्रिक्स समूह के सदस्य।

नई दिल्ली घोषणापत्र पर मुहर: ब्रिक्स नेताओं ने खिंचवाई ‘फैमिली फोटो’, फिर एक खास पौधे से दिया दुनिया को बड़ा संदेश

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (बाएं)।

प्रधानमंत्री मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक, सीमा सहित कई मुद्दों पर हुई बात

kisan sangh free uniforms notebooks and bags distributed to 7000 flood affected students

असम: शिवसागर में भारतीय किसान संघ की मानवीय पहल, बाढ़ प्रभावित 7,000 छात्रों को दी जा रही नि:शुल्क सहायता!

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies