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‘बड़ा मंगल’ का बड़ा संदेश

लखनऊ में वर्षों पुरानी परंपरा है कि ज्येष्ठ मास के हर मंगलवार को 'बड़ा मंगल' कहा जाता है और इस दिन हनुमान भक्त स्थान-स्थान पर भंडारा करते हैं। इस दाैरान पर्यावरण बचाने का संदेश भी दिया जाता है और भंडारों में पत्ते के दोनों का प्रयोग होता है

Written byपूनम नेगीपूनम नेगी
May 5, 2026, 02:08 pm IST
in उत्तर प्रदेश, धर्म-संस्कृति, पर्यावरण
भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते श्रद्धालु

भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते श्रद्धालु

सूर्य किरणों की प्रचंडता के कारण हिंदू नववर्ष का तीसरा महीना ‘ज्येष्ठ’ गर्मी के हिसाब से सबसे ज्यादा कष्टकारी होता है। सर्वाधिक बड़े दिनों वाले तपिश भरे ज्येष्ठ माह में जल और अन्न दान की अपार महिमा हमारी सनातन संस्कृति में बतायी गयी है। इसी कारण धर्मप्राण श्रद्धालु इस माह में जगह-जगह प्याऊ और भंडारे लगाने के साथ मूक पशु-पक्षियों के लिए भी दाना-पानी की व्यवस्था कर पुण्य बटोरते हैं। इस माह में जब सूर्य की किरणें धरती पर आग उगलती हैं, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हनुमतभक्तों में आस्था और जनसेवा का सागर सहज ही हिलोरें लेने लगता है। वीरवर लक्ष्मण की नगरी में ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगलवार को कलियुग के जागृत देवता महावीर हनुमान के पूजन-वंदन व भंडारों की सैकड़ों साल पुरानी परंपरा है। यहां ज्येष्ठ मास के मंगल ‘बड़े मंगल’ के नाम से जाने जाते हैं। ‘अतिथि देवो भव’ की हमारी सनातन भारतीय संस्कृति हमें दूसरों को खिलाकर आनन्दित होना सिखाती है और इस सेवाभाव के विराट दिग्दर्शन हम लखनऊ में ज्येष्ठ मास के हर मंगल के भंडारों में सहज ही कर सकते हैं।

मूल अवधारणा

‘रिसाइकिल’ और ‘रीयूज’ आधुनिक पर्यावरणीय अवधारणाएं नहीं, वरन पुरातन भारतीय लोकाचार का अभिन्न हिस्सा हैं। इससे कचरा तो कम होता ही है, इसमें पर्यावरण के प्रति सम्मान का भाव भी समाहित है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के लिए पंच प्रण निर्धारित हैं- 1. जाति-भेद रहित सामाजिक समरसता। 2. परिवार व्यवस्था की मजबूती के लिण् कुटुंब प्रबोधन। 3. जीवनशैली में सुधार के लिए पर्यावरण संरक्षण। 4. स्वदेशी आधारित जीवनशैली तथा 5. नागरिक कर्तव्यों के प्रति सजगता। ‘लोक भारती’ संस्था भी इसी अवधारणा की पोषक है। बृजेन्द्र कहते हैं कि अच्छाई हममें से अधिकांश लोग जानते हैं, पर उस अच्छाई के विपरीत व्यवहार करने का हमारा और हमारे समाज का जो अभ्यास बन गया है, उसे आस्था और व्यवस्था द्वारा बदलना जरूरी है। हमारे स्वच्छ बड़ा मंगल भंडारा अभियान का मकसद सहकारिता और सामाजिकता के विकास तथा स्थानीय कुटीर रोजगारों को बढ़ावा देना है। ऐसे आयोजनों के अभ्यास से हमारे पारिवारिक कार्यक्रमों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का महत्त्व बढ़ सकता है। ऐसे शुभ परिवर्तन जिन परिवारों में प्रारंभ हुए हैं; उन्हें लोक भारती ने ‘मंगल परिवार’ का नाम दिया है। उनके अनुसार ‘लोक भारती’ की प्रेरणा से लखनऊ में आज हजारों मंगल परिवार विकसित हो चुके हैं।

ज्येष्ठ मास के मंगलवार के दिन लखन नगरी की कोई गली, कोई मार्ग ऐसा नहीं होता; जहां ‘बड़े मंगल’ का भंडारा न चलता रहा हो। इन बड़े मंगलों पर ‘मारुतिनंदन केसरीनंदन सुन लो मेरी पुकार’ जैसे भक्ति गीतों तथा सुन्दरकांड व हनुमान चालीसा के पाठ के बीच हनुमान मंदिरों व सार्वजानिक स्थलों पर सुबह से शाम तक सैकड़ों की संख्या में सजने वाले इन भंडारों की रौनक देखते ही बनती है। इस अवसर पर हनुमान भक्त यह सुनिश्चित करते हैं कि इस दिन शहर में कोई भी भूखा-प्यासा न सोये। हर्ष की बात है कि लखनऊवासियों के इस सेवाभाव से प्रेरित होकर बड़े मंगल के भंडारे अब लखनऊ के आसपास के अनेक जिलों में भी आयोजित होने लगे हैं।

जानना दिलचस्प होगा कि पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक कृषि के प्रचार-प्रसार व प्रशिक्षण में बीते डेढ़ दशक से सक्रिय कार्यरत संघ के अनुषांगिक संगठन ‘लोक भारती’ ने 2022 से लखनऊ के बड़े मंगल के भंडारों में स्वच्छता के समावेश की जो सुखद पहल की थी; वह अब एक सफल अभियान में बदल चुकी है। ‘लोक भारती’ के अखिल भारतीय संगठन मंत्री बृजेन्द्र पाल सिंह बड़े मंगल के इन स्वच्छ भंडारों की शुभ शुरुआत से जुड़ा एक रोचक वाकया बताते हैं। उनके अनुसार चार साल पहले उनके पास हजरतगंज के परिवर्तन चौक पर वर्षों से नियमित पेयजल की प्याऊ तथा ‘बड़े मंगल’ के भंडारे संचालित करने वाले संघ से जुड़े दुर्गा मन्दिर समिति के संयोजक ताराचंद जी का फोन आया था।

उस वार्ता में उन्होंने कहा था कि आस्था, सेवा एवं समरसता के साथ होने वाले बड़े मंगल के भंडारों की समाप्ति पर आयोजन स्थल पर प्लास्टिक के दोना-पत्तल और गिलास तथा जूठन के ढेर इन आयोजनों की पवित्रता को धूमिल कर देते हैं। इस समस्या का कोई प्रेरक समाधान निकलना जरूरी है। उस बातचीत के बाद उनकी संस्था ‘लोक भारती’ ने पर्यावरण के अनुकूल बड़े मंगल के स्वच्छ भंडारों की रूपरेखा बनाकर स्वच्छ बड़ा मंगल भंडारे के लिए कुछ मानक निर्धारित किए। परिवर्तन चौक पर भंडारे के आयोजक ताराचंद की टीम ने 2022 में इन सभी स्वच्छता मानकों का पालनकर उस वर्ष ज्येष्ठ माह के मंगल भंडारों का आयोजन स्वच्छता के साथ संपन्न किया।

प्रमुख मानक

  •  भंडारे की एक कार्य टोली का गठन और उसकी बैठक में स्वच्छ मंगल की परिकल्पना पर चर्चा, सहमति और दायित्व निर्धारण।
  • भंडारे के स्थान पर पूर्ण स्वच्छता के साथ ही जहां आवश्यक हो चूने का प्रयोग करना।
  •  प्लास्टिक और थर्मोकोल पूर्णतया वर्जित तथा उसके स्थान पर पत्तल, दोना पत्ते के प्रयोग करना।
  • पानी पिलाने के लिए उड़ने वाले गिलासों के स्थान पर प्याऊ की भांति टोंटी वाले लोटे से पानी पिलाने की व्यवस्था, उसमें यदि किसी को कठिनाई हो तो छोटे जग द्वारा स्वयं हाथ से पानी पीने की व्यवस्था।
  •  बड़े कूड़ेदान की व्यवस्था, जिसके चारों ओर स्वच्छता के साथ चूना अवश्य पड़ा हो।
  •  प्रसाद देते समय ही बताने की व्यवस्था कि अपना दोना पत्तल वहां रखे कूड़ेदान में ही डालना है।
  • भंडारे के बाहर कार्यकर्ताओं की एक टोली जो ध्यान रखे कि कोई दोना इधर—उधर फेंकने की भूल न करने पाए, फिर भी यदि कोई भूल कर ही देता है तो वह कार्यकर्ता भूल करने वाले को कुछ न कहते हुए उसके सामने ही तुरन्त दोने को अपने आप उठाकर कूड़ेदान में डालने की व्यवस्था करना।
  •  यदि कूड़ादान दोपहर तक भर जाने की संभावना हो तो नगर निगम से पहले ही बात करके दो बार कूड़ा उठवाने की व्यवस्था सुनिश्चित करना।
  • कूड़ेदान में दूर से दोना फेंकने के स्थान पर निकट जाकर डालने का आग्रह रखना।
  • प्रातः भंडारे का प्रारंभ हनुमानजी की पूजा-अर्चना के साथ उन्हें आमंत्रित किया जाता है, उसी प्रकार संध्या काल में भंडारा स्थल की पुनः स्वच्छता के बाद पूजा-अर्चना के साथ हनुमान जी को विदा करने की व्यवस्था।

परिवर्तन चौक के स्वच्छ मंगल भंडारों ने नगर के आयोजकों को भी प्रेरित किया। तब हमने स्वच्छता मानकों के अनुपालन के साथ बड़ा मंगल पर भंडारों का आयोजन करने के इच्छुक लगभग 50 आयोजक बंधुओं और लखनऊ नगर निगम के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक आयोजित की। उक्त बैठक में लोक भारती एवं नगर निगम के ‘लोगो’ के साथ स्वच्छ भंडारे का एक बैनर भी सुनिश्चित हुआ, जिसमें एक ओर स्वच्छ भंडारे के मानक लिखे गए तथा दूसरी ओर भंडारा आयोजित करने वाले लोगों-संस्थाओं के लिए स्थान रिक्त छोड़ गया जहां पर वह अपना विवरण छाप सकें।

इस तरह नगर निगम ने बड़ा मंगल के स्वच्छ भंडारों का पंजीकरण भी प्रारंभ किया। बृजेन्द्र बताते हैं कि इन स्वच्छता मानकों का अनुपालन करते हुए बीते चार साल में नगर में अब तक बड़े मंगलों के 100 से ऊपर भंडारे हो चुके हैं। इन भंडारों में पत्ते से निर्मित दोना-पत्तल के साथ कुछ स्थानों पर कागज के गिलास प्रयोग हुए तथा अधिकांश स्थानों पर पीने के पानी के लिए कूल टैंक रखे गए। अधिकांश भंडारों में पंक्तिबद्ध प्रसाद वितरण किया गया। भंडारे के उपरांत सुनिश्चित किया गया कि भंडारे का कोई भी कचरा या अवशिष्ट आयोजन स्थल पर रह न जाए। नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराए गए नंबर पर फोन करने पर गाड़ी आकर पूरा कचरा ले गई।

इन भंडारों के दौरान यातायात व्यवस्था को सुगम रखने के लिए पुलिस भी सजग रही। बृजेन्द्र के अनुसार उनकी संस्था का प्रयास है कि अधिकाधिक आयोजकों को स्वच्छ मंगल अभियान से जोड़ते हुए स्वच्छता मानकों के अनुरूप भंडारा आयोजन के लिए प्रेरित किया जाए। विश्वास है कि इस अभियान के सहयोग से इस वर्ष 5 मई से लगने वाले बड़े मंगल के भंडारों में बड़ी संख्या में आयोजक स्वच्छता मानकों का पालन कर स्वच्छ मंगल भंडारा अभियान को और गति देंगे। यह अभियान लखनऊ को स्वच्छ व स्मार्ट सिटी बनाने में सहयोग देने के साथ पूरे देश के लिए आस्था, सेवा, स्वच्छता और अनुशासन का उत्तम उदाहरण बनेगा।

Topics: सांस्कृतिक विरासत‘अतिथि देवो भव’बड़ा मंगलपाञ्चजन्य विशेषज्येष्ठ मासहनुमत भक्ति लक्ष्मण नगरीभंडारा परंपरास्वच्छता एवं पर्यावरणप्लास्टिक मुक्तपर्यावरण संरक्षण
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