हरिद्वार: श्रावण का पावन मास आते ही पावन गंगानगरी हरिद्वार मानो आस्था के विराट सागर में परिवर्तित हो जाती है। देश के विभिन्न क्षेत्रों से लाखों शिवभक्त कांवड़िए पावन गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। थके चरण, कंधों पर कांवड़ और अधरों पर निरंतर “बम बम भोले” “हर-हर महादेव”—यह दृश्य भारत की जीवंत श्रद्धा का दर्शन कराता है।
करोड़ों शिव भक्तों की इस विशाल कांवड़ यात्रा के मध्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक और सेवा भारती के कार्यकर्ता, चिकित्सक, फार्मासिस्ट, मिलकर सेवा के विभिन्न कार्यों में जुटे हैं। सिंहद्वार हरिद्वार, जटवाड़ा पुल ज्वालापुर तथा बहादराबाद टोल प्लाज़ा के निकट सेवा केंद्रों के माध्यम से शिवभक्तों के लिए भोजन, जल, स्वास्थ्य सेवा, प्राथमिक उपचार, विश्राम तथा आवश्यक सहायता की व्यवस्था की जा रही है।
प्रतिदिन लगभग दो से तीन हजार शिवभक्तों तक किसी न किसी रूप में सेवा पहुँच रही है। संघ शाखा में प्राप्त संस्कार जब समाज में उतरते हैं तो सेवा का रूप लेते हैं। सेवा से संपर्क बढ़ता है, संपर्क से आत्मीयता जन्म लेती है, आत्मीयता से समन्वय बनता है और समन्वय से समाज की सामूहिक शक्ति जागृत होती है। एक स्वयंसेवक के लिए सेवा किसी पर उपकार नहीं, समाज के प्रति अपना दायित्व निभाने का अवसर है।

















