युवा संवाद-मुंबई : ‘पुरानी पीढ़ी की अपेक्षा नई पीढ़ी अधिक निष्ठावान’
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युवा संवाद-मुंबई : ‘पुरानी पीढ़ी की अपेक्षा नई पीढ़ी अधिक निष्ठावान’

मुंबई में आयोजित ‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ के मंच से युवाओं से संवाद करते हुए रा.स्व. संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कहा कि नई पीढ़ी पर विश्वास, समाज में संवाद और सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर ही विकसित भारत का निर्माण संभव है

Written byPanchjanyaPanchjanya
Aug 8, 2026, 04:01 pm IST
inसंघ को जानें, संघ @100, महाराष्ट्र
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत मुंबई में ‘इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ के कार्यक्रम में सवालों के जवाब देते हुए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत मुंबई में ‘इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ के कार्यक्रम में सवालों के जवाब देते हुए।

गत 6 अगस्त को मुंबई में आयोजित ‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ के मंच से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने देश के सामाजिक, राजनीतिक, वैश्विक, शैक्षणिक तथा सांस्कृतिक परिदृश्य पर युवाओं के साथ अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने ‘भारतीय दृष्टिकोण से विश्व को एकजुट करने में युवाओं की भूमिका’ पर जोर देते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया कि देश की नई पीढ़ी (जेन-जी और जेन-एल्फा) देश का भविष्य है। उन्हें शंका की दृष्टि से देखने के बजाय अपनत्व, संवाद और मार्गदर्शन की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, शिक्षा सुधार, एलजीबीटीक्यू समुदाय, महिलाओं की सहभागिता, रोजगार, आरक्षण तथा सतत विकास जैसे समसामयिक विषयों पर संघ के दृष्टिकोण को प्रमुखता से रेखांकित किया।

संवाद के मुख्य बिंदु

  •  कार्यक्रम में देश के 100 से अधिक शहरों से आए 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के करीब 2,000 हाई स्कूल विद्यार्थी शामिल रहे।
  •  युवा राष्ट्रविरोधी नहीं हैं, उनकी मांगें जायज हैं; व्यवस्था सुधार के लिए संवाद व अपनत्व जरूरी।
  • शिक्षा व्यापार नहीं, आवश्यकता है; GDP के 6% बजट आवंटन का पूर्ण समर्थन।
  •  एलजीबीटीक्यू समुदाय हमारे समाज का अंग है। विवाह संस्था के स्थान पर समलैंगिक जोड़ों के लिए पृथक कानूनी ढांचा हो।
  • राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका पुरुषों के समान हो।
  •  भेदभाव रहने तक आरक्षण आवश्यक है, इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
  • मानवता सर्वोपरि है। पाकिस्तान के सभी नागरिक शत्रु नहीं हैं; सद्भाव और संवाद ही ध्येय है। 

युवा पीढ़ी एवं लोकतांत्रिक अधिकार

नीट पेपर लीक तथा अन्य मुद्दों को लेकर युवाओं द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में श्री भागवत ने स्पष्ट किया कि युवाओं की शिकायतें पूरी तरह जायज हैं।

  •  राष्ट्रविरोधी नहीं हैं युवा: यदि जेन-जी आंदोलन या विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं, तो इसका अर्थ यह कदापि नहीं कि वे राष्ट्रविरोधी हैं। वे हमारे अपने समाज और राष्ट्र का हिस्सा हैं तथा हमारी अगली पीढ़ी हैं।
  •  अपनत्व एवं संवाद: सार्थक और फलदायी संवाद के लिए अपनत्व का भाव होना अनिवार्य है। जब संवाद अपनत्व के साथ होता है, तभी एक-दूसरे की समस्याओं को सही ढंग से समझा जा सकता है। जब अन्य सभी प्रशासनिक रास्ते बंद हो जाते हैं, तब लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन भी संवाद का एक वैध माध्यम बन जाता है।
  •  पीढ़ीगत अंतर और ईमानदारी: आज की जेन-जी और जेन-एल्फा पुरानी पीढ़ी की तुलना में अधिक स्पष्ट और तर्कसंगत प्रश्न पूछती है। श्री भागवत ने कहा कि नई पीढ़ी अपनी पूर्ववर्ती पीढ़ियों की अपेक्षा अधिक निष्ठावान है और यदि उन्हें दोनों पीढ़ियों में से किसी एक पर विश्वास करने को कहा जाए, तो वे जेन-जी पर विश्वास करेंगे।
  • सिस्टम सुधार के लिए आंदोलन: युवाओं का आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि ‘सिस्टम सुधार’ के लिए होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज या पेलेट गन के प्रयोग संबंधी प्रश्नों पर उन्होंने कहा कि पूर्ण जानकारी के बिना अंतिम निर्णय देना उचित नहीं होगा।

शिक्षा व्यवस्था एवं नई पीढ़ी का निर्माण

शिक्षा प्रणाली में मूलभूत सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए श्री भागवत ने कहा कि शिक्षा कोई व्यापार नहीं है, बल्कि यह जीवन की एक अनिवार्य आवश्यकता है, जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुलभ होनी चाहिए। शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 6 प्रतिशत व्यय करने की लंबे समय से चली आ रही मांग का समर्थन करते हुए उन्होंने इसे पूरी तरह उचित तथा लागू करने योग्य बताया।

श्री भागवत ने कहा कि शिक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का सामूहिक कर्तव्य है। संघ से जुड़े ‘विद्या भारती’ संगठन द्वारा लगभग 23,000 विद्यालयों का सफल संचालन इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।

शिक्षा सुधार की शुरुआत शिक्षकों के गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण से होनी चाहिए। केवल विद्यालय चलाना या धन अर्जित करना शिक्षा का ध्येय नहीं हो सकता, इसका मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ी का चरित्र-निर्माण करना है। इसके लिए हर बार आंदोलन की आवश्यकता नहीं होती, समाज की सजगता से भी सुधार संभव है।

सोशल मीडिया एवं डिजिटल विवेक

डिजिटल युग में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर बोलते हुए उन्होंने जिम्मेदारी और विवेक की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि सोशल मीडिया पर किसी प्रभावशाली व्यक्ति के कारण 10 लाख लोग कोई गलत निर्णय लेते हैं, तो उसकी नैतिक जिम्मेदारी उस व्यक्ति की भी बनती है। सोशल मीडिया पर केवल प्रामाणिक और विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही विश्वास करना चाहिए तथा हमेशा सकारात्मक और समाजहितकारी सामग्री ही साझा करनी चाहिए। जेन-जी में यह विवेक विकसित होना चाहिए कि डिजिटल जगत में क्या सही है और क्या गलत। इसमें वरिष्ठ पीढ़ी का दायित्व है कि वह युवाओं का सही मार्गदर्शन करे।

राष्ट्रीय दृष्टिकोण एवं वैश्विक संबंध

अंतरराष्ट्रीय संबंधों और राष्ट्रीय सुरक्षा के संतुलन पर विचार रखते हुए उन्होंने भारतीय जीवन-दर्शन को प्रस्तुत किया।

  •  हिंसक रोल मॉडल से दूरी: जेन-जी को हिंसक या उग्र रोल मॉडल का अनुसरण करने से बचना चाहिए।
  • राष्ट्रीय संकट में एकजुटता: जब देश की संप्रभुता या सुरक्षा पर संकट आए, तो सभी आंतरिक मतभेदों को भुलाकर नागरिकों को अपनी सरकार और सशस्त्र बलों के साथ दृढ़ता से खड़ा होना चाहिए।
  •  शाश्वत मानवीय संबंध: राजनीतिक सीमाओं और संघर्षों के बावजूद सांस्कृतिक संबंध समाप्त नहीं होते। चीन के लोग स्वीकार करते हैं कि भारत ने उन्हें 2000 वर्षों तक जीवन-मूल्य दिए हैं और लगभग 80 वर्ष पूर्व पाकिस्तान भी भारत का ही भाग था।
  • स्थायी शत्रुता नहीं: सभी पाकिस्तानी नागरिक भारत के शत्रु नहीं हैं। भारत का ध्येय किसी राष्ट्र को मिटाना या पराजित करना नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से सद्भाव स्थापित करना है। संघर्ष के बाद भी शांति के प्रयास जारी रहने चाहिए, क्योंकि अंततः “Humanity is One” (मानवता सर्वोपरि है)।
    सामाजिक समरसता एवं आरक्षण
  • आरक्षण का आधार: सामाजिक भेदभाव और असमानता के कारण ही आरक्षण की व्यवस्था की आवश्यकता उत्पन्न हुई है।
  • निरंतरता की शर्त: जब तक समाज में सामाजिक भेदभाव रहेगा, तब तक आरक्षण की आवश्यकता और उसकी प्रासंगिकता बनी रहेगी।
  •  आरक्षण के विषय पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। यदि सभी कल्याणकारी उपायों को ईमानदारी और प्रभावशीलता से लागू किया जाए, तो कालांतर में आरक्षण की आवश्यकता स्वतः समाप्त हो सकती है।

सतत विकास एवं पर्यावरण

संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने की दिशा में भारत वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पर्यावरण और विकास का संतुलन: विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं; पर्यावरण को क्षति पहुंचाए बिना भी प्रगति संभव है। पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर और दैनिक जीवन की आदतों से करनी चाहिए।

नेतृत्व के सिद्धांत

  • स्वयं का नेतृत्व: सच्चा नेतृत्व दूसरों पर शासन करने से नहीं, बल्कि स्वयं को अनुशासित करने से शुरू होता है।
  •  शास्त्रोक्त गुण: एक कुशल नेता में शास्त्रों में वर्णित पांच मूलभूत गुण होने चाहिए।
  •  नेताओं का निर्माण: नेतृत्व का मुख्य ध्येय केवल अनुयायी बनाना नहीं, बल्कि नए और योग्य नेताओं का निर्माण करना है।

अपने संबोधन में श्री भागवत ने स्पष्ट संदेश दिया कि देश के युवाओं की शक्ति, उनके प्रश्न और उनकी ऊर्जा राष्ट्र-निर्माण के लिए अनिवार्य हैं। यदि समाज में संवाद, अपनत्व, शिक्षा का प्रसार, श्रम का सम्मान और सांस्कृतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना की जाए, तो भारत विश्व मंच पर एकजुटता और शांति का नेतृत्व कर सकता है।

प्रमुख बातें

  • एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोग हमारे ही समाज का अभिन्न अंग हैं और भारतीय परंपरा में उन्हें समायोजित व स्वीकार करने का इतिहास रहा है।
  • विवाह का सामाजिक स्वरूप: भारतीय परंपरा में विवाह केवल दो व्यक्तियों के साथ रहने का समझौता या सुविधा नहीं है। यह एक पवित्र सामाजिक संस्था (परिवार/कुटुंब) है, जो समाज की आधारभूत इकाई है और जहां अगली पीढ़ी का चरित्र-निर्माण होता है।
  • विवाह संस्था के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ करने के सामाजिक दुष्परिणाम हो सकते हैं। इसलिए समलैंगिक संबंधों को ‘विवाह’ का नाम देने के बजाय, समलैंगिक जोड़ों के साथ रहने के लिए एक पृथक कानूनी ढांचा या व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिसे समाज स्वीकार कर सके।
  • राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका पुरुषों के समान और पूरक है। उन्हें हर क्षेत्र में पुरुषों के समान अवसर और प्रशिक्षण मिलना चाहिए।
  • संघ स्थापना के समय की सामाजिक परिस्थितियों के कारण महिलाओं के लिए ‘राष्ट्र सेविका समिति’ का गठन किया गया था, जो एक स्वायत्त संगठन के रूप में संघ के साथ परस्पर सहयोग से कार्य करता है।
  •  संघ की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था ‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा’ में सार्वजनिक क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं की पूर्ण सहभागिता होती है और वे निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
  •  रोजगार का व्यापक अर्थ: रोजगार का तात्पर्य केवल सरकारी या वेतनभोगी नौकरी तक सीमित नहीं है। उद्यमिता और कौशल-आधारित कार्य भी इसके महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
  • देश में बेरोजगारी की भावना को समाप्त करने के लिए सभी प्रकार के कार्यों को सम्मान देना होगा। समाज में ‘श्रम-प्रतिष्ठा’ का भाव विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।
Topics: डिजिटल विवेकयुवा संवादसच्चा नेतृत्वराष्ट्रीय सुरक्षापाञ्चजन्य विशेषशिक्षा सुधारविरोध प्रदर्शनचरित्र निर्माणसामाजिक समरसतारा.स्व.संघजेन जीसोशल मीडियाजेन-एल्फामोहनराव भागवतपुरानी और नई पीढ़ीपर्यावरण संरक्षणसार्थक संवाद व अपनत्वआरक्षण
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