BJP in Kerala Politics 2026 : केरल में दशकों पुरानी वामपंथी और कांग्रेसी राजनीति का तिलस्म भाजपा ने तोड़ दिया है। केरल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा ने केरल की राजनीति में नए अवतार में प्रवेश किया है। भाजपा ने दो सीट जीतकर राज्य में अपनी पहचान बनाई है।
इसके पूर्व 2016 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने नेमोम सीट जीतकर राज्य में पहली बार खाता खोलने में सफलता प्राप्त की थी।
एलडीएफ के वोट बैंक में सेंध : कैसे सत्ता से बेदखल हुआ वामपंथ?
मगर भाजपा ने इस बार लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के वोट बैंक में बंटवारा करके उसे सत्ता से बेदखल किया है। केरल में अभी तक द्विध्रुवीय राजनीति एलडीएफ और यूडीएफ के बीच होती रही है। इस कारण भाजपा को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलता था क्योंकि भाजपा के मतदाता आखिरी समय में अपने दूसरे विकल्प के आधार पर मुख्यतः एलडीएफ के साथ चले जाते थे। मगर इस बार भाजपा ने दो सीट जीतने के साथ ही कई सीटों पर दूसरे पायदान पर आकर इस द्विध्रुवीय राजनीति को पूरी तरह से पलट दिया है।
आगामी चुनावों में सीधी टक्कर : भाजपा बनाम यूडीएफ का नया दौर
अब आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा-नीत एनडीए की लड़ाई सीधे कांग्रेस पार्टी-नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के खिलाफ होगी। भाजपा पूरे देश में सबसे आसानी से कांग्रेस पार्टी को ही हराने में सक्षम होती है। अतः भाजपा अब आगामी चुनावों में देश के अन्य राज्यों— गुजरात, मध्य प्रदेश, दिल्ली सहित अन्य प्रदेशों की तरह ही केरल में आसानी से मात दे सकती है।
नगर निगम से विधानसभा तक : भाजपा के बढ़ते कदम और चुनावी प्रदर्शन
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा 11 विधानसभा सीटों पर प्रथम पायदान पर और 9 सीटों पर दूसरे पायदान पर रहकर कुल 20 सीटों पर सीधे मुकाबले में रही थी। इसके अलावा भाजपा त्रिशूर लोकसभा सीट जीतने के साथ ही तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट पर दूसरे पायदान पर रही थी। इसके अतिरिक्त भाजपा ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के चुनाव में 45 वर्षों का वाम दल शासन को समाप्त करते हुए अपनी सरकार बनाई है।
केरल की राजनीति में बदलाव की बयार : परिवारवाद के खिलाफ जनादेश
इन सभी बदलावों के बदौलत अब भाजपा केरल में नए अवतार में आ गई है। केरल की जनता अब एलडीएफ के शासन को कभी भी स्वीकार नहीं करेगी क्योंकि मुख्यमंत्री पी विजयन ने अपने परिवार को आगे बढ़ाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ा है।
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