चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के चुनाव में कांग्रेस पार्टी का मुस्लिम विरोधी चेहरा उजागर हो गया है। कांग्रेस पूरे देश में अपने को मुस्लिम समुदाय का रहनुमा साबित करने का कोई भी मौका नहीं जाने देती है। संसद से सड़क तक हर मुद्दे को मुस्लिमों से जोड़ने वाली कांग्रेस पार्टी की मुस्लिम विरोधी मानसिकता उजागर हो गई है। मुस्लिम राजनीति ही कांग्रेस पार्टी के राजनीति का आधार है। मगर 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद से ही कांग्रेस पार्टी का मुस्लिम समुदाय के प्रति दोहरा रवैया लगातार उजागर होने लगा था जो अब पूर्णतः सबके समक्ष आ गया है।
2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने 2014 और 2019 के बाद पहले बार नेता विपक्ष की हैसियत प्राप्त करने लायक संसद की सीट जीतने में कामयाब हुई थी। कांग्रेस पार्टी को लोकसभा में नेता विपक्ष और उपनेता विपक्ष की भूमिका के लिए मौका मिला था। 2024 के लोकसभा चुनाव में देश में सर्वाधिक मतों से अंतर से असम के धुबरी से कांग्रेस पार्टी के रकीबुल हुसैन ने 1012476 मतों से जीत दर्ज़ की थी। हुसैन की जीत का अंतर कांग्रेस पार्टी के एक तिहाई से अधिक 34 सांसदों के जीत के अंतर से अधिक था। रकीबुल हुसैन सांसद बनने से पूर्व असम विधानसभा में कांग्रेस पार्टी ने उपनेता थे अतएव विधानसभा में विधानसभा में पार्टी के उपनेता की भूमिका में थे।
रकीबुल हुसैन रहे हैं पांच बार विधायक
रकीबुल हुसैन सामगुरी विधानसभा सीट से लगातार पांचवीं बार विधायक थे। 2011 में उन्होंने इस सीट पर राज्य के दो बार के निर्वाचित मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत को चुनाव में करारी मात दी थी। इसके अलावा हुसैन ने असम के सबसे बड़े मुस्लिम नेता बदरुद्दीन अजमल को चुनावी मात दी थी, जो 2009 से लगातार तीन बार से धुबरी लोकसभा की सीट से चुनाव जीत रहे थे। कांग्रेस पार्टी की धुबरी की जीत 2024 के लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ी और अहम जीत मानी जा रही थी। कांग्रेस पार्टी की धुबरी की जीत वायनाड, अमेठी और राय बरेली की जीत से भी बड़ा मानी जा रही थी। अतएव यह उम्मीद की जा रही थी कि रकीबुल हुसैन को लोकसभा में पार्टी का नेता आया उपनेता का पद अवश्य नवाजा जाएगा। मगर गांधी परिवार ने रकीबुल हुसैन के बदले अपने परिवार के समर्पित नेता गौरव गोगोई को लोकसभा में पार्टी का उपनेता नियुक्त कर दिया। यह केवल शुरुआत मात्र थी।
गौरव गोगोई को कांग्रेस ने बनाया था सीएम चेहरा
दूसरा असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने जोरहाट के सांसद गौरव गोगोई को पार्टी का मुख्यमंत्री का चेहरा बनाया था। गौरव गगोई महज 144393 मतों से लोकसभा का चुनाव जीते हैं। वहीं धुबरी से गोगोई के मुकाबले सात गुना अधिक मतों से विजयी रकीबुल हुसैन को पार्टी ने पूर्णतः नज़रअंदाज कर दिया था। यह कांग्रेस पार्टी का मुस्लिमों के प्रति असली नीति को उजागर करता है। क्या कांग्रेस पार्टी ने भविष्य में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के साथ गठबंधन का रास्ता खुला रखने के लिए रकीबुल हुसैन को हर मौके पर नज़रअंदाज करती रही है?
काग्रेस ने मुस्लिमों की ही पीठ में घोंपा छूरा
इसके अलावा पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिमों के साथ नाइंसाफी की है। कांग्रेस पार्टी 1977 से पश्चिम बंगाल में सत्ता से बाहर है और इस समय काल में कांग्रेस पार्टी ने पांच बार नेता विपक्ष की भूमिका अदा की थी। जिसमें तीन मुस्लिम वर्ग के थे। मुर्शिदाबाद जिले के लालगोला विधानसभा सीट से निर्वाचित अब्दुस सत्तार लगातार दो बार 1982 से 1991 तक विपक्ष के नेता थे। कांग्रेस पार्टी ने 1991 से 1996 तक उत्तर दिनाजपुर जिले के इटाहार विधानसभा सीट से निर्वाचित जैनल आबेदीन को विपक्ष का नेता पद दिया था। उसके बाद 2016 से 2021 तक कांग्रेस पार्टी ने हुगली जिले के चंपदानी विधानसभा सीट से निर्वाचित अब्दुल मन्नान नेता विपक्ष की भूमिका में थे।
मगर 2026 के विधानभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी 2006 के बाद पहली बार अपने बूते चुनाव लड़ रही थी। 2006 में कांग्रेस पार्टी ने 262 सीटों पर चुनाव लड़ा था। वहीं इस बार कांग्रेस पार्टी बिना किसी गठबंधन के 292 सीटों पर अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में दिए है। अतएव पूर्व के अनुमानों के अनुसार, ऐसी उम्मीद थी कि कांग्रेस पार्टी किसी मुस्लिम नेता के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में विधानसभा का चुनाव लड़ेगी। मगर कांग्रेस पार्टी ने किसी भी नेता का नाम स्पष्ट नहीं किया था। यह कांग्रेस पार्टी की मुस्लिम विरोधी मानसिकता को परिलक्षित करती है।
केरल में IUML को खुश करने में लगी कांग्रेस
केरल कांग्रेस पार्टी ही नहीं, बल्कि गाँधी परिवार के लिए भी महत्वपूर्ण राज्य है। मगर इस महत्वपूर्ण राज्य में भी कांग्रेस पार्टी का कोई भी मुस्लिम चेहरा नहीं है। इसका कारण बहुत साफ़ है। इस राज्य में कांग्रेस पार्टी अपने सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को खुश करने के लिए किसी भी मुस्लिम नेता को आगे नहीं बढ़ाती है। अगर कांग्रेस पार्टी किसी मुस्लिम नेता को कोई बड़ा पद देगी तो आईयूएमएल उससे नाराज हो जाएगी।
वहीं केरल की तरह ही तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी और इसके धर्मनिरपेक्ष विकाशशील गठबंधन मुस्लिम मतदाताओं को खुश रखने के लिए आईयूएमएल को अपने गठबंधन का हिस्सा बनाकर रखा है और विगत दो बार से रामनाथपुरम लोकसभा की सीट आईयूएमएल को दे रही है। आईयूएमएल के दो सांसद केरल से एक सांसद तमिलनाडु से निर्वाचित हो रहा है।











