रत्नागिरी (महाराष्ट्र)। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित पेपर लीक मुद्दे की आड़ में फैलाई गई अराजकता, हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों और देश के वीर सैनिकों के अपमान के विरोध में महाराष्ट्र के रत्नागिरी में जनआक्रोश देखने को मिला. इसके विरोध में ‘संविधान सम्मान मंच’ के बैनर तले हजारों नागरिकों और ‘Gen Z’ युवाओं ने एकजुट होकर विशाल ‘राष्ट्र रक्षा मौन पदयात्रा’ निकाली.
इस मौन पदयात्रा में बड़ी संख्या में युवाओं और नागरिकों ने भाग लेकर राष्ट्रहित, संविधान के सम्मान और देश के सांस्कृतिक स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपनी अभूतपूर्व एकजुटता का परिचय दिया.

मारुति मंदिर से शुरू होकर आंबेडकर प्रतिमा पर हुआ समापन
राष्ट्र रक्षा मौन पदयात्रा की शुरुआत रत्नागिरी के ऐतिहासिक मारुति मंदिर परिसर से हुई. हाथों में तिरंगा और संविधान के प्रति सम्मान प्रकट करती पट्टिकाएं लिए हजारों का जनसैलाब बिना कोई नारेबाजी किए अनुशासित तरीके से मौन धारण कर शहर की मुख्य सड़कों से गुजरा.
पदयात्रा का औपचारिक समापन भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की विशाल प्रतिमा के समक्ष एक विशाल जनसभा के रूप में हुआ, जहां उपस्थित प्रबुद्धजनों और युवाओं ने संविधान की मर्यादा बनाए रखने की शपथ ली.
“आंदोलन के नाम पर हमारे पूज्य देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणियां करना और देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जांबाज सैनिकों का अनादर करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश को बांटने और अराजकता फैलाने वाली ताकतों को देश का युवा करारा जवाब देगा।” – संविधान सम्मान मंच प्रतिनिधि
राष्ट्रहित और संविधान सम्मान के लिए Gen Z युवाओं की हुंकार
संविधान सम्मान मंच के प्रतिनिधियों ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन में जिस तरह से असामाजिक तत्वों ने धार्मिक भावनाओं और राष्ट्रीय प्रतीकों को ठेस पहुंचाने का काम किया, उसने पूरे देश को आक्रोशित किया है.
राष्ट्र रक्षा मौन पदयात्रा की मुख्य बातें:
- विशाल जनभागीदारी: हजारों की संख्या में रत्नागिरी के नागरिक, छात्र और ‘Gen Z’ युवा पदयात्रा में शामिल हुए.
- पूर्णतः शांतिपूर्ण आंदोलन: मारुति मंदिर से आंबेडकर प्रतिमा तक मौन जुलूस के जरिए कड़ा संदेश दिया गया.
- अराजक तत्वों पर कार्रवाई की मांग: दिल्ली के जंतर-मंतर पर असामाजिक और राष्ट्रविरोधी बयानबाजी करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई.
समापन सभा में वक्ताओं ने रेखांकित किया कि देश का संविधान जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, वहीं राष्ट्र की अखंडता, सेना के सम्मान और धार्मिक सद्भाव की रक्षा का कर्तव्य भी सिखाता है.













