IUML impact on Kerala Congress Government : क्या केरल में कांग्रेस सिर्फ नाम की मुख्यमंत्री वाली पार्टी बनकर रह जाएगी है? ये सवाल इस लिए उठ रहा है कि आज केरल विधानसभा चुनाव परिणाम के बीच में कांग्रेस पार्टी के लिए राहत भरी खबर सिर्फ दक्षिणी राज्य केरल से मिली है। मगर यह जीत भी कांग्रेस पार्टी के लिए अधूरी है। कांग्रेस पार्टी नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की सरकार बन रही है। मगर इस सरकार की कुंजी कांग्रेस पार्टी के पास नहीं बल्कि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के हाथों में होगी।
केरल में चुनावी गणित : 71 का जादुई आंकड़ा और कांग्रेस की ‘IUML’ पर निर्भरता
केरल में सरकार चलाने के लिए 71 सीटों की जरूरत होती है। वर्तमान के चुनावी रुझानों के मुताबिक कांग्रेस पार्टी लगभग 60 सीट जीतने की स्थिति में है। अतः पूरे सरकार के कार्यकाल में कांग्रेस पार्टी को अपने सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ेगा।
IUML की सांप्रदायिक राजनीति का इतिहास
आईयूएमएल की सांप्रदायिक राजनीति को कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार के पास बर्दाश्त करने के अलावा कोई उपाय नहीं है। अगर आईयूएमएल की सांप्रदायिक राजनीति की बात करें तो यह फेहरिस्त काफी लंबी है।
26 अक्टूबर 2023 को कोझिकोड में आईयूएमएल केरल प्रदेश के अध्यक्ष पनक्कड़ सैयद सादिक अली शिहाब थंगल ने अपने भाषण में भारत सरकार पर हमेशा इजरायल का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए कहा-
जो भी इजराइल के साथ हाथ मिलाता है वह आतंकवाद का समर्थन करता है।
इस बयान के माध्यम से सैयद सादिक अली ने दूसरे शब्दों में इजराइल को एक आतंकवादी देश बोलने की कोशिश की थी।
जब हमास की तुलना स्वतंत्रता सेनानियों से की गई
इसी रैली में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के वरिष्ठ नेता और विधायक एम. के. मुन्नेर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस और अमर बलिदानी भगत सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की तुलना हमास आतंकियों से करने के आरोप भी लगे थे। मगर कांग्रेस पार्टी इसके बावजूद भी आईयूएमएल के खिलाफ कोई भी वक्तव्य तक जारी करने का हिम्मत नहीं जुटा सकी थी।
IUML पर भड़काऊ नारों और नीतिगत फैसलों के आरोप
जुलाई 2023 में मुस्लिम लीग की युवा शाखा ने केरल के कासरगोड की एक रैली में हिंदुओं के खिलाफ भयंकर भड़काऊ नारे लगाए थे।
यूडीएफ सरकार के दौरान इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के शिक्षा मंत्री पी. के. अब्दुर रब्ब ने अपने आधिकारिक आवास का नाम गंगा से बदलकर ग्रेस कर दिया था।
इतना ही नहीं, बल्कि उन्होंने यह भी कहा था कि क्लास में लड़के और लड़कियां को एक साथ नहीं बैठना चाहिए और इनके अलग-अलग क्लासेस होना चाहिए।
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की सांप्रदायिक राजनीति और गांधी परिवार का संबंध
मजहबी मान्यताओं और शिक्षा से जुड़े विवाद
2015 में मुस्लिम लीग ने अपने मंत्रालय से जुड़े किसी भी कार्यक्रम में दीपक जलाने से इंकार कर दिया था क्योंकि उनके अनुसार दीप प्रज्वलन इस्लामिक मान्यताओं के खिलाफ है।
वहीं फरवरी 2013 में मुस्लिम लीग के एक नेता ने केरल यूनिवर्सिटी के सिंडिकेट में मुस्लिम सदस्यों के लिए अधिक से अधिक सीटों की मांग की, जिससे विवाद खड़ा हो गया था और इसे सांप्रदायिक आधार पर शिक्षा नीति को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखा गया था।
राहुल की राजनीतिक मजबूरी और वायनाड समीकरण
कांग्रेस और राहुल गांधी की मजबूरी का आलम अब इससे पता चलता है कि राहुल गांधी को अपने परिवार के लिए वायनाड लोकसभा सीट बचाए रखने के लिए आईयूएमएल को धर्मनिरपेक्ष पार्टी बताना पड़ता है।
तमिलनाडु तक विस्तार : क्या कांग्रेस के कंधे पर चढ़कर पैर पसार रही है मुस्लिम लीग?
आईयूएमएल ने कांग्रेस पार्टी पर दबाव बनाकर पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में भी अपना पैर पसारना शुरू कर दिया है। विगत दो बार से तमिलनाडु के रामनाथपुरम लोकसभा की सीट पर आईयूएमएल कांग्रेस के सहयोगी के तौर पर जीत दर्ज कर रही है। इसके अलावा पार्टी विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस और उसके सहयोगी द्रमुक से मनमुताबिक सीटों का आवंटन करवा लेती है।

















