केरल विधानसभा चुनाव में बाद इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट गठबंधन में बड़ा विस्फोट करने की तैयारी में है। आईयूएमएल की नज़र अब सिर्फ कांग्रेस पार्टी की पिछलग्गू बनकर राजनीति करने से बहुत आगे तक बढ़ चुकी है। अब यह पार्टी इस गठबंधन का नेतृतव सँभालने की मंशा से इस बार चुनावी मैदान में उतर रही है।
आईयूएमल को है कांग्रेस की बदहाली की खबर
कांग्रेस पार्टी की पूरे देश में विलुप्त होते जनाधार की जानकारी केरल में उसके सहयोगी आईयूएमएल को भी है और यह पार्टी अब कांग्रेस के मजबूरी का लाभ लेने का पूरा मन बना चुकी है। आईयूएमएल को इस तथ्य का भान है कि कांग्रेस पार्टी किसी भी शर्त को मानने के लिए मजबूर है और पार्टी गठबंधन बनाये रखने के लिए मुख्यमंत्री का पद भी आईयूएमएल को सौंप सकती है। आईयूएमएल के संज्ञान में है कि केंद्रशासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में कांग्रेस पार्टी किस तरह से अपने इज़्ज़त की परवाह ना करते हुए जम्मू कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्लाह के सरकार को समर्थन कर रही है।
जम्मू और कश्मीर में उमर अब्दुल्ला ने निर्दलीय विधायक को मंत्रिमंडल में स्थान दिया है, मगर कांग्रेस पार्टी को स्थान नहीं दिया है फिर भी कांग्रेस पार्टी समर्थन कर रही है। आईयूएमएल इस तथ्य का भी गहराई से आकलन कर रही है कि तमिलनाडु में द्रमुक पार्टी के हाथों बेइज्जती के बावजूद भी कांग्रेस पार्टी उसके साथ गठबंधन में है। अतएव कांग्रेस पार्टी के इस मजबूरी का लाभ लेने का पूरा मन आईयूएमएल चुनाव बाद लेने जा रही है।
मुख्यमंत्री पद पर है मुस्लिम लीग की नजर
इस बार आईयूएमएल अंदरखाने चुनाव बाद विधानसभा में विपक्ष के नेता की कुर्सी या सरकार बनाने की स्थिति में कई प्रकार के मांग करने का मन बना चुकी है। इस दल की नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर टिक गई है और सरकार बनाने की स्थिति में मुख्यमंत्री पद पर भी दावेदारी करने की तैयारी में है। आईयूएमएल के लिए इस बार मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी करना आसान है क्योंकि कांग्रेस पार्टी में कोई भी इस पद के लिए स्पष्ट दावेदार नहीं है। राज्य में कांग्रेस पार्टी के आखिरी मुख्यमंत्री ओमेन चंडी का निधन ही चुका है और कांग्रेस के वर्तमान नेतागणों में इस पद के लिए मारामारी मची हुई है।
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केरल में पहले भी रहा है मुस्लिम लीग का सीएम
ऐसा नहीं है कि इससे पूर्व आईयूएमएल का राज्य में मुख्यमंत्री नहीं बना है। 1979 में केरल में सी एच मोहम्मद कोया मुख्यमंत्री रह चुके हैं। ये मुस्लिम बाहुल्य मलप्पुरम विधानसभा सीट से विधायक थे। इस सीट से अभी तक केवल आईयूएमएल का ही विधायक चुना गया है। सी एच मोहम्मद कोया कांग्रेस पार्टी के एक ढर्रे के सहयोग से मुख्यमंत्री बने थे। मोहम्मद कोया जिन्ना के समय काल में मुस्लिम लीग की पत्रिका चन्द्रिका में महत्वपूर्ण पद पर भी काम कर चुके थे और इनका जिन्ना और उनके साथियों से गहरा नाता था। चुनाव बाद के परिदृश्य में आईयूएमएल कई तरह के विकल्पों के बारे में पूर्व से टटोल रही है। कांग्रेस पार्टी के साथ मुख्यमंत्री पद के अद्ल बदल वाली नीति पर पार्टी विचार कर रही है। उपमुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल में बड़ी भूमिका तो पार्टी के लिए सबसे निचले पायदान का विकल्प हैं।

















