नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने ‘संघ प्रार्थना : गीता के परिप्रेक्ष्य में’ पुस्तक के भव्य लोकार्पण कार्यक्रम में भारतीय चिंतन परंपरा, भगवद्गीता के सार्वकालिक संदेश और राष्ट्रजीवन में प्रार्थना के गहरे महत्त्व पर विचार रखे. उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता ने संपूर्ण विश्व के समक्ष एक नवीन एवं अद्वितीय दर्शन प्रस्तुत किया है, जो मनुष्य को उसके परम कर्तव्य का बोध कराता है.
झंडेवाला स्थित विचार विनिमय न्यास सभागार (केशव कुंज) में सुरुचि प्रकाशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में गीता मनीषी एवं जीओ गीता के संस्थापक स्वामी ज्ञानानन्द महाराज जी ने उपस्थित जनसमूह को अपना दिव्य आशीर्वचन प्रदान किया.

“अर्जुन के मोह निवारण की भांति राष्ट्रभाव जागृत करेगी यह पुस्तक”
मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि लेखक ने कुछ पंक्तियों के माध्यम से उस दिव्य भाव को जागृत करने का सफल प्रयास किया है, जिसकी आज समाज को सर्वाधिक आवश्यकता है.
“जिस प्रकार कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के मोह का निवारण किया था, ठीक उसी प्रकार यह पुस्तक स्वयंसेवकों और पाठकों के मन में कर्तव्यबोध, समर्पण और राष्ट्रभाव को जागृत करने का कार्य करेगी।” – डॉ. कृष्ण गोपाल जी, सह सरकार्यवाह, RSS
स्वामी ज्ञानानन्द महाराज जी ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि संघ की प्रार्थना का मूल भाव गीता के निष्काम कर्म और ज्ञान मार्ग से ही प्रेरित है. इसका मुख्य उद्देश्य मन पर पड़े अज्ञान के आवरण को दूर करना है. उन्होंने सूर्य और बादलों का उदाहरण देते हुए कहा कि सत्य सदैव विद्यमान रहता है, बस उस पर छाए बादलों को हटाने की आवश्यकता होती है.

पुस्तक लोकार्पण समारोह प्रमुख विवरण एवं संक्षेप
| महत्वपूर्ण बिंदु | समारोह का ब्योरा |
|---|---|
| पुस्तक का शीर्षक | ‘संघ प्रार्थना : गीता के परिप्रेक्ष्य में’. |
| पुस्तक के लेखक | डॉ. मार्कंडेय आहूजा. |
| प्रकाशन संस्थान | सुरुचि प्रकाशन, नई दिल्ली. |
| मुख्य वक्ता & अतिथि | डॉ. कृष्ण गोपाल जी (सह सरकार्यवाह, RSS) एवं स्वामी ज्ञानानन्द महाराज जी. |
| कार्यक्रम का स्थल | विचार विनिमय न्यास सभागार, केशव कुंज, झंडेवाला (नई दिल्ली). |
संघ प्रार्थना शब्दों का समूह नहीं, राष्ट्रचेतना का सजीव घोष है
पुस्तक के लेखक डॉ. मार्कंडेय आहूजा ने रचना-प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ प्रार्थना मात्र कुछ पंक्तियों या शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह भारतीय जीवन-दृष्टि, राष्ट्रचेतना, कर्तव्यबोध और आध्यात्मिक मूल्यों का सजीव उद्घोष है. पुस्तक में भगवद्गीता के श्लोकों के आलोक में प्रार्थना के विविध आयामों का दार्शनिक विश्लेषण किया गया है.
सुरुचि प्रकाशन की साहित्यिक यात्रा:
- विस्तृत तंत्र: सुरुचि प्रकाशन के प्रबंध निदेशक रजनीश जिंदल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि देशभर के 150 से अधिक केंद्रों और ऑनलाइन माध्यमों पर 600 से अधिक शीर्षक पाठकों के लिए उपलब्ध हैं.
- सामूहिक प्रार्थना: स्वामी ज्ञानानंद महाराज जी ने प्रेक्षागृह में उपस्थित सभी गणमान्य जनों से सामूहिक प्रार्थना भी करवाई.
- समारोह का समापन: मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अंकुर पाठक ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया. कार्यक्रम का कुशल संचालन संपूर्ण बागड़ी ने किया तथा ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गान के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ.
यह कार्यक्रम उपस्थित पाठकों, प्रबुद्धजनों और स्वयंसेवकों में भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा के प्रति नया उत्साह और गहरी निष्ठा जागृत करने वाला सिद्ध हुआ.











