ईरान में महिलाओं पर अत्याचारों के नए मामले लगातार सामने आ रहे हैं। वहाँ पर महिलाओं को जेल में यातनाओं की कहानियाँ आ रही हैं। परंतु दुर्भाग्य यही है कि इन महिलाओं की पीड़ा पर कोई भी विमर्श नहीं है। ईरान में नोबेल पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी भी जेल की प्रताड़ना का शिकार होकर अस्पताल पहुँच गई हैं।
वे ईरान की जेल में बंद थीं। वे इसलिए बंद थीं क्योंकि वे सरकार की कट्टर नीतियों के खिलाफ थीं। मगर अब वे जेल से सीधे अस्पताल पहुँच चुकी हैं। पिछले दिनों यह खबर आई भी थी कि वे जेल में बंद हैं और वे दिल की मरीज भी हैं। अब नरगिस मोहम्मदी फाउंडेशन का यह कहना है कि नोबेल पुरस्कार विजेता का स्वास्थ्य पूरी तरह से बिगड़ चुका है। फाउंडेशन का कहना है कि नोबेल पुरस्कार विजेता की चेतना कई बार जा चुकी है और उनके दिल में भी समस्या है।
जेल में बिगड़ी नरगिस मोहम्मदी की तबीयत, अस्पताल में भर्ती
इससे पहले शुक्रवार को मोहम्मदी की हालत जंजान जेल में दो बार बिगड़ी थी और वे बेहोश हो गई थीं। उन्हें मार्च के अंत में दिल का दौरा पड़ा था और उनके वकील के अनुसार वे जेल मे काफी पीली दिख रही थीं, और उनका वजन काफी कम हो गया था। उन्हें चलने के लिए भी एक नर्स की जरूरत पड़ रही थी। ऐसा पहले भी कहा गया था कि उनकी जो स्थिति है, उसके अनुसार उन्हें विशेष चिकित्सा सहायता चाहिए होगी, मगर उन्हें ऐसी कोई भी सहायता नहीं मिली। उनके फाउंडेशन का कहना है कि अब जब हालत हाथ से बाहर हो गए तो जेल के डॉक्टर्स ने उन्हें अस्पताल भेजा है। नरगिस का परिवार कई दिनों से जेल प्रशासन से अनुरोध कर रहा था कि वह उन्हें अस्पताल में बढ़ती करवा दें। 24 मार्च को मोहम्मदी के साथ कैदियों ने उन्हें बेहोश पाया था और फिर बाद में पता चला था कि जेल के क्लिनिक के डॉक्टर्स के अनुसार उन्हें संभवतया दिल का दौरा पड़ा था।
इलाज में लापरवाही के बीच नरगिस की रिहाई की मांग तेज
यह भी सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि जेल के क्लीनिक में और वहीं के डॉक्टर्स के अनुसार उन्हें तत्काल ही विशेष चिकित्सा की आवश्यकता थी, जो कि पूरी नहीं की गई थी। गौरतलब है कि नरगिस को मौत की सजा और जबरन हिजाब का विरोध करने के कारण वर्ष 2016 से लगातार ही जेल की जा रही है। उन्हें फरवरी 2026 में एक बार फिर से 7.5 वर्ष की सजा सुना दी गई थी। उन पर आरोप है कि वे देश के खिलाफ काम कर रही हैं। नरगिस मोहम्मदी की रिहाई को लेकर हालांकि काफी प्रयास किये जा रहे हैं, मगर उनकी आवाज सरकार तक नहीं पहुँच रही है। nobelwomensinitiative.org ने भी नरगिस मोहम्मदी के जीवन को लेकर अपील जारी की है। इस संगठन के अनुसार नरगिस की ज़िंदगी खतरे में है।
नरगिस की बिगड़ती हालत से परिवार में बढ़ी चिंता
इसमें लिखा है कि वह केवल पूरे विश्व मे मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाली महिला ही नहीं है बल्कि वह बच्चों की माँ भी है, जिसे अपने बच्चों से दूर रखा गया है। वह एक ऐसी फेमिनिस्ट हैं, जो मानवाधिकारों के लिए, महिलाओं की आजादी और सम्मान के लिए आवाज उठा रही हैं और अपना जीवन इसीलिए समर्पित कर रखा है। उनके भाई हामिदरेज़ा मोहम्मदी का कहना है कि उनका पूरा परिवार सिहर गया है। हर रोज वे इस डर के साथ जागते हैं कि कहीं उन्हें उनकी बहन की मौत की खबर न सुनाई दे। वह केवल जेल की कैद नहीं है, बल्कि वह उन्हें धीरे-धीरे दी जा रही मौत है। इसे रुकना चाहिए। सोशल मीडिया के अनुसार उनकी स्थिति अभी भी गंभीर है और वे बेहोश हैं। वे अभी जंजान शहर में कोरोनरी केयर यूनिट में भर्ती हैं जहां पर उन्हें लगातार ऑक्सीजन पर रखा हुआ है और उनका ब्लड प्रेशर बहुत अधिक है।
तेहरान शिफ्ट कर विशेष इलाज की मांग तेज
इसमें यह भी लिखा है कि एंजियोग्राफी करवाने, सटीक निदान प्राप्त करने और विशेष उपचार जारी रखने के लिए, उन्हें तत्काल तेहरान स्थानांतरित किए जाने और अपनी स्वयं की मेडिकल टीम तत्काल ही उपलब्ध कराए जाने की आवश्यकता है।
भारत में फेमिनिस्ट वर्ग की इस विषय पर भी चुप्पी
भारत में फेमिनिस्ट महिलाओं के बहुत बड़े वर्ग ने इस बात को लेकर प्रसन्नता लगातार जाहिर की है, कि ईरान में महिलाएं अमेरिकी सेना के सामने डटी रहीं, मगर ये फेमिनिस्ट समूह कभी भी नोबेल विजेता नरगिस मोहम्मदी जैसी महिलाओं के पक्ष मे नहीं आते हैं, जो न जाने कितने वर्षों से ईरान की कट्टरपंथी सरकार का विरोध लगातार कर रही हैं, जिनकी जान पर बनी हुई है। नरगिस जैसी असंख्य महिलाएं हैं, जो ईरान की जेल में कैद हैं, और जो रोज ही मौत के करीब पहुँच रही हैं, मगर भारत का फेमिनिस्ट समूह उनमें से किसी पर भी न ही कोई कविता लिखता है और न ही कोई विमर्श चलाता है। ये जो महिलाएं ईरान मे अपनी आजादी के लिए देह से आजाद हो रही हैं, उनकी पीड़ाओं को विमर्श से ही मुक्त किया जा रहा है। वे बिसराई जा रही हैं, बिसराई क्या जा रही हैं, वे दरअसल दर्ज ही नहीं की जा रही हैं। क्या बहनापे के दायरे मे वे हैं ही नहीं?

















