पंजाब सरकार युवाओं को रोजगार देने के लम्बे-चौड़े दावे कर रही है जबकि हालत यह है कि बेरोजगारी की औसत में कमी आने के बाद भी यह समस्या राष्ट्रीय औसत से बहुत अधिक बनी हुई है। केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में जानकारी दी कि वर्ष 2022 में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की बेरोजगारी दर 19.1 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2025 में घटकर 17 प्रतिशत रह गई है। हालांकि यह दर अब भी राष्ट्रीय औसत 9.9 प्रतिशत से काफी अधिक है। केंद्र ने यह भी माना कि पंजाब में शिक्षित युवाओं के बीच बेरोजगारी की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल के प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
क्या बताया केंद्रीय मंत्री ने?
उन्होंने बताया कि अक्टूबर-दिसंबर 2025 के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के अनुसार पंजाब की युवा बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। उत्तर भारत के राज्यों में हिमाचल प्रदेश 29.9 प्रतिशत के साथ सबसे ऊपर रहा, जबकि जम्मू-कश्मीर में यह दर 22.8 प्रतिशत और पंजाब में 19.3 प्रतिशत दर्ज की गई। राजस्थान में यह 18.3 प्रतिशत रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 14.3 प्रतिशत रहा।
शिक्षित वर्ग में भी बेरोजगारी चिंताजनक
सरकार ने कहा कि केवल युवाओं ही नहीं, बल्कि शिक्षित वर्ग में भी बेरोजगारी चिंता का विषय बनी हुई है। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के ऐसे लोगों, जिन्होंने माध्यमिक या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त की है, उनमें बेरोजगारी दर वर्ष 2025 में 9.3 प्रतिशत रही। यह राष्ट्रीय औसत 6.5 प्रतिशत से काफी अधिक है। इससे स्पष्ट है कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
उद्योगों में गिरावट पर क्या बोले केंद्रीय मंत्री?
सांसद हरसिमरत कौर बादल ने उद्योगों में गिरावट और युवाओं के बढ़ते पलायन का मुद्दा भी उठाया। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि पंजाब में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), औद्योगिक प्रोत्साहन और स्वरोजगार योजनाओं के माध्यम से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार के अनुसार प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत पिछले चार वर्षों में पंजाब में 2,990 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं के लिए 145.93 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की गई, जिससे 29,782 लोगों को रोजगार मिला। इसके अलावा पंजाब औद्योगिक एवं व्यापार विकास नीति-2026 के माध्यम से नए निवेश आकर्षित करने और मौजूदा उद्योगों को मजबूत करने के लिए पूंजी अनुदान, रोजगार सृजन प्रोत्साहन, एसजीएसटी प्रतिपूर्ति तथा बिजली शुल्क में छूट जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। केंद्र सरकार ने यह भी दावा किया कि औद्योगिक सुस्ती की आशंकाओं के बावजूद पंजाब का संगठित विनिर्माण क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण के अनुसार राज्य में पंजीकृत विनिर्माण इकाइयों की संख्या वर्ष 2017-18 के 12,726 से बढक़र वर्ष 2023-24 में 13,166 हो गई है।

















