आज के समय में नौकरी बदलना या कुछ समय के लिए करियर ब्रेक लेना आम बात हो गई है। कोई आगे की पढ़ाई के लिए नौकरी छोड़ता है, तो कोई परिवार या स्वास्थ्य संबंधी कारणों से काम से दूरी बना लेता है। ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि नौकरी छोड़ने के बाद उनके EPF (कर्मचारी भविष्य निधि) खाते में जमा पैसे का क्या होगा। क्या उस पर ब्याज मिलता रहेगा या नहीं? अगर आपके मन में भी यही सवाल है, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है।
EPF में बड़ा बदलाव
हाल ही में EPF को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने EPF की वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। हालांकि, यह बदलाव अभी लागू नहीं हुआ है। इसके लिए केंद्रीय कैबिनेट की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। सबसे पहले यह जान लें कि नौकरी छोड़ने के बाद आपके EPF खाते पर ब्याज मिलना तुरंत बंद नहीं होता। EPFO के नियमों के अनुसार, खाते में जमा राशि पर तय शर्तों के तहत ब्याज मिलता रहता है। हालांकि, यदि कोई कर्मचारी 55 वर्ष या उसके बाद नौकरी छोड़ता है, तो उसे अधिकतम तीन साल तक ही ब्याज मिलेगा। इसके बाद खाता निष्क्रिय माना जा सकता है।
अगर नौकरी छूटने के बाद आपको पैसों की जरूरत पड़ती है, तो आप अपने EPF खाते से 75 प्रतिशत तक राशि निकाल सकते हैं। वहीं, यदि आप लगातार 12 महीने तक बेरोजगार रहते हैं, तो बाकी 25 प्रतिशत राशि भी निकालने की सुविधा मिलती है। इस रकम में कर्मचारी और कंपनी दोनों का योगदान तथा उस पर मिला ब्याज शामिल होता है। EPF से पैसा निकालने पर टैक्स के नियम भी जानना जरूरी है। अगर आपने लगातार 5 साल की नौकरी पूरी नहीं की है और उससे पहले पैसा निकालते हैं, तो टैक्स लग सकता है। वहीं, 5 साल या उससे अधिक की सेवा पूरी होने के बाद नियमों के अनुसार निकाली गई राशि पूरी तरह टैक्स फ्री रहती है। अगर भविष्य में EPF की वेतन सीमा 25,000 रुपये हो जाती है, तो ज्यादा कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा और उनकी रिटायरमेंट बचत भी पहले से अधिक मजबूत हो सकेगी।













