संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित पटना महानगर एकत्रीकरण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार जी ने कहा कि संघ की शाखा एक अमोघ वरदान है। यहां व्यक्ति खेल-खेल में ही देशभक्ति और समाज संगठन का संस्कार सीख जाता है। यह व्यक्ति निर्माण की पाठशाला है।
कलयुग में संगठन शक्ति का महत्व
उन्होंने कहा कि कलयुग में संगठन शक्ति की महत्ता है। सतयुग में ज्ञान शक्ति, त्रेता युग में मंत्र शक्ति और द्वापर में युद्ध शक्ति का प्रभाव था। कलयुग में वही व्यक्ति, संगठन या देश शक्तिशाली है, जिसके पीछे जन बल खड़ा है। कलयुग में कैसे संगठन खड़ा करना है, इसकी व्यवस्था ऋग्वेद के श्लोक में दी गई है। आज जिसको भी संगठन करना है, उसको साथ-साथ चलना और साथ-साथ बोलना होगा। देश की ताकत संगठन में है, इसलिए समाज का संगठित होना आवश्यक है।
शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों का उल्लेख
उन्होंने संघ शताब्दी वर्ष की चर्चा करते हुए कहा कि संघ के प्रयास से आज हिन्दू सम्मेलनों में चार करोड़ से अधिक लोग जुटे हैं। पांच हज़ार से अधिक सद्भाव बैठकें हो चुकी हैं। इसी प्रकार पांच हज़ार से अधिक प्रमुख नागरिक संगोष्ठी हो गई है। संपर्क विभाग द्वारा 10 हजार से अधिक प्रमुख लेखक, कवि, पत्रकार, कलाकार, राजनीतिज्ञों इत्यादि से संपर्क किया जा चुका है।
संघ के संगठन कौशल पर वैश्विक शोध
संघ के संगठन कौशल्य पर अमेरिका के चार विश्वविद्यालयों में शोध हो रहा है। चीन अपने विशेषज्ञों को भेज कर संघ के व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला पर शोध कर रहा है। इस बार शताब्दी वर्ष के अंत में विजयदशमी के समय संघ का प्रयास है कि 2 लाख से अधिक स्थानों पर कम से कम एक सप्ताह के लिए संघ की शाखा लगे। इससे व्यक्ति संघ की शाखा में आकर स्वयं इसके महत्व को समझ पाएगा।
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स्वयंसेवकों की सहभागिता
एकत्रीकरण में पटना महानगर के चार उपभाग के स्वयंसेवक उपस्थित थे। मंच पर दक्षिण बिहार प्रांत संघचालक राजकुमार सिन्हा जी तथा पटना महानगर संघचालक डॉ. राजीव कुमार जी उपस्थित रहे।

















