वॉशिंगटन/नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने अमेरिका की धरती से संघ और भारत के खिलाफ फैलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव पर करारा प्रहार किया है।
हडसन इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित ‘न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस’ में सरकार्यवाह होसबाले जी ने स्पष्ट किया कि आरएसएस को अमेरिका के कुख्यात श्वेत वर्चस्ववादी समूह ‘कु क्लक्स क्लान’ (KKK) से जोड़ना न केवल गलत है, बल्कि एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।
‘भारत सपेरों का नहीं, टेक हब का देश है’
सरकार्यवाह होसबाले जी ने पश्चिमी देशों में भारत की पुरानी और रूढ़िवादी छवि पर सवाल उठाते हुए कहा, “अमेरिका में आज भी कई लोग मानते हैं कि भारत केवल मलिन बस्तियों, गरीबी और सपेरों का देश है। जबकि हकीकत यह है कि भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और एक वैश्विक टेक हब (Tech Hub) बन चुका है।” आम अमेरिकी सोच में ये बातें कहीं न कहीं छूट जाती हैं।
उन्होंने जोर दिया कि भारत के इस आधुनिक स्वरूप को अक्सर जानबूझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
#WATCH | Washington, DC | On what the Americans get wrong about the RSS, RSS General Secretary Dattatreya Hosabale says, “Americans’ misunderstanding is not only about the RSS… America’s misunderstanding about India is that it is overpopulated, full of slums, poverty, and is… pic.twitter.com/Rpf8sjQz8W
— ANI (@ANI) April 23, 2026
संघ को ‘KKK’ बताने पर कड़ा ऐतराज
सरकार्यवाह जी ने कहा कि दशकों से एक खास एजेंडे के तहत RSS के बारे में भी, जो नैरेटिव—जानबूझकर या अनजाने में, या किसी एजेंडे के तहत—बनाया गया है, वह यह है कि RSS हिंदू वर्चस्ववादी है और एक तरह से ईसाई-विरोधी, अल्पसंख्यक-विरोधी, महिलाओं के विकास के विरोधी और आधुनिकीकरण के विरोधी है।
लेकिन RSS किस चीज़ के पक्ष में है, यह हमेशा नहीं बताया जाता…”
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा- “हमें अक्सर ‘कु क्लक्स क्लान’ का भारतीय संस्करण बताकर पेश किया जाता है। हम वह बिल्कुल नहीं हैं। संघ एक हिंदू वर्चस्ववादी संगठन नहीं है। हिंदू जीवन पद्धति तो ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (पूरी दुनिया एक परिवार है) के सिद्धांत पर चलती है।”
हिंदू दर्शन और आक्रमण का इतिहास
हिंदू संस्कृति की व्याख्या करते हुए सरकार्यवाह जी ने कहा कि हमारा मूल दर्शन ‘एकत्व’ का है।
ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए उन्होंने ने याद दिलाया कि हिंदुओं ने अपने हजारों साल के इतिहास में कभी किसी दूसरे देश पर आक्रमण नहीं किया। ऐसे में ‘वर्चस्ववादी’ होने का आरोप निराधार है।
83,000 शाखाएं और समाज सेवा का संकल्प
संघ (RSS) की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए सरकार्यवाह जी ने बताया कि-
- आरएसएस प्रतिदिन देशभर में लगभग 83,000 शाखाएं आयोजित करता है।
- इन शाखाओं का उद्देश्य समाज में सेवा भाव, संस्कार और सामाजिक समरसता जगाना है।
- प्राकृतिक आपदाओं से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण तक, स्वयंसेवक हर क्षेत्र में सक्रिय हैं।
संस्कृति और आधुनिकीकरण का मेल
सरकार्यवाह जी ने ‘आधुनिकता बनाम संस्कृति’ की बहस को खारिज करते हुए जापान और चीन का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि जिस तरह इन देशों ने अपनी सभ्यता को बचाते हुए खुद को आधुनिक बनाया, वैसे ही भारत भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से प्रेरणा लेकर तकनीक और आधुनिकीकरण के पथ पर अग्रसर है।

















