बांग्लादेश में फिर लहूलुहान हिंदू : लापता साधु नयन दास की संदिग्ध मौत! घर से ले गए थे अज्ञात, शव पर मिले चोट के निशान
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बांग्लादेश में फिर लहूलुहान हिंदू : लापता साधु नयन दास की संदिग्ध मौत! घर से ले गए थे अज्ञात, शव पर मिले चोट के निशान

बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में हिंदू साधु नयन दास का शव संदिग्ध स्थिति में मिलने से हड़कंप मच गया है। 19 अप्रैल से लापता साधु के शरीर पर चोट के निशान मिले हैं। जानिए क्यों बांग्लादेश में नई सरकार बनने के बाद भी हिंदू और उनके धार्मिक प्रतीक सुरक्षित नहीं हैं।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by Shivam Dixit
Apr 26, 2026, 08:56 pm IST
in विश्व
प्रतीकात्मक चित्र

प्रतीकात्मक चित्र

बांग्लादेश मे हिंदुओं का कत्लेआम अभी भी जारी है। बांग्लादेश में सरकार बनने के बाद ऐसा लोगों को लगा होगा कि अब उन्हें शांति मिलेगी और वे कम से कम जिहादी हिंसा से मुक्त होंगे। परंतु उनकी यह आशा भी कहीं न कहीं पानी के बुलबुले जैसी ही साबित हुई और उनके साथ हिंसा की घटनाएं अभी तक जारी हैं।

हालिया घटना ने बढ़ाई चिंता

हाल ही में जो घटना हुई है, उसने एक बार फिर से हिंदुओं की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। बांग्लादेश में एक बार फिर से हिन्दू लहूलुहान हुआ है और इस बार कोई आम हिन्दू नहीं बल्कि एक धार्मिक प्रतीक वाले हिन्दू की संदिग्ध मृत्यु हुई है।

हिंदू साधु का शव संदिग्ध स्थिति में मिला

बांग्लादेश में एक हिन्दू साधु का शव कॉक्स बाजार के पहाड़ी क्षेत्र में संदिग्ध स्थिति में मिला। मृतक साधु की पहचान नयन दास के रूप में हुई। नयन दास की उम्र महज 35 वर्ष की ही थी। और वे चट्टोग्राम ज़िले के सतकानिया उपज़िला के दोहाज़ारी क्षेत्र के निवासी थे, और कॉक्स बाज़ार सदर उपज़िला के अंतर्गत खुरुशकुल यूनियन में स्थित एक स्थानीय मंदिर में पुजारी (सेबायत) के रूप में सेवा करते थे।

घर से बुलाकर ले गए अज्ञात लोग

मगर 19 अप्रेल की रात को उनके घर पर कुछ लोग उन्हें लेने के लिए आए। कुछ अनजान लोगों ने उन्हें उनके घर से बाहर बुलाया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार नयन दास अपने घर से उसी समय निकल गए थे और वे जब काफी देर तक नहीं लौटे तो परिवार वालों ने उनकी खोज की। और जब वे कहीं नहीं मिले तो उन्होनें 20 अप्रेल को कॉक्स बाजार के सदर मॉडल पुलिस स्टेशन में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। मगर उनका कहीं पता नहीं चला।

निर्जीव देह मिली

परिवार वालों ने नयनदास की तलाश की मगर वे नहीं मिले। मगर लोगों ने तलाश जारी रखी। बुधवार 22 अप्रेल को जब वहीं के कुछ लोग हार न मानते हुए उनकी तलाश कर रहे थे तो मंदिर के पास के पहाड़ी क्षेत्र में एक पेड़ पर उनकी निर्जीव देह लटकती हुई दिखाई दी। उनकी गर्दन के आसपास एक कपड़ा बंधा हुआ था। पुलिस को तत्काल ही सूचित किया गया और उसके बाद वहाँ से उनकी निर्जीव देह को उतारा गया।

शरीर पर चोट के निशान

उनके शरीर पर चोटों के भी निशान मिले हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि वे जांच कर रहे हैं कि यह मृत्यु आत्महत्या है या हत्या, मगर परिवार के लोगों का कहना है कि कुछ तो गड़बड़ है।

सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर से बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर प्रश्न उठा दिए हैं। लोगों को यह समझ नहीं आ रहा है कि आखिर हिंदुओं के साथ होने वाली हिंसा पर रोक कब लगेगी? कब हिन्दू अपने ही देश में सुरक्षित अनुभव करेंगे।

सरकार बनने के बाद भी नहीं बदली स्थिति

बांग्लादेश में एक लंबी राजनीतिक अस्थिरता के बाद चुनाव हुए थे और उनमें बीएनपी विजयी हुई थी। सरकार के गठन के साथ ही यह आशा व्यक्त की गई थी कि जहां देश मे राजनीतिक स्थिरता आएगी वहीं देश में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाली हिंसा पर रोक लगेगी।

अप्रैल में कई घटनाएं सामने आईं

परंतु ऐसा होना दिखता नहीं है। क्योंकि अप्रेल के महीने में ही तीन अलग अलग घटनाओं में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर प्रश्न उठ खड़े हुए हैं। कुछ ही दिनों पहले दसपारा बाजार क्षेत्र में, जहां हिंदुओं की अच्छी खासी संख्या है, वहाँ पर एक मुस्लिम युवक हसन की हत्या नशीले पदार्थों की तस्करी को लेकर मोहम्मद मोमिन नामक तस्कर ने कर दी थी, मगर भीड़ ने इस बात के बावजूद भी कि उस हत्या में हिंदुओं का हाथ नहीं था, हिन्दू परिवारों पर हमला कर दिया था।

परिजनों ने भी किया इनकार

यहाँ तक कि मृतक के परिजनों ने भी इस बात से इनकार किया था कि उनके बेटे की हत्या में हिन्दुओ का कोई हाथ है।

हिंसा के आंकड़े

बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने नौ अप्रैल को कहा था कि इस साल एक जनवरी से 31 मार्च के बीच सांप्रदायिक हिंसा की 133 घटनाएं हुई हैं।

हत्या के मामलों में वृद्धि

बांग्लादेश में वर्ष 2026 की पहली तिमाही में ही हत्या के मामलों में 14% की वृद्धि देखी गई है और उनमें हिन्दू समुदाय को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है।

विमर्श का अभाव

यह और भी दुर्भाग्य की बात है कि बांग्लादेश में हिन्दू साधु की हत्या हो या फिर आम किसी हिन्दू की, इन हत्याओं का विमर्श नहीं बनता है। धार्मिक असहिष्णुता का कोई भी बिंदू नहीं उठता है। ऐसा क्यों है, इस पर विचार करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि हिंदुओं को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर ही निशाना बनाया जा रहा है, मगर उनके धार्मिक अस्तित्व की सुरक्षा का प्रश्न ही विमर्श में नहीं आता है।

अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में सवाल

बांग्लादेश से लेकर पाकिस्तान तक, हिंदुओं के साथ अत्याचार की घटनाएं आम हैं, परंतु इन्हें धार्मिक अस्तित्व पर हमले के रूप में क्यों नहीं देखा जाता है, यह प्रश्न महत्वपूर्ण है।

Topics: Cox's BazarChittagong NewsBangladesh Violence 2026हिन्दू साधु की हत्याबांग्लादेश समाचारBangladesh Hindu PersecutionNayan DasHindu Monk Death
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