अमेजन की घटिया और लापरवाही वाली ‘सर्विस’ परेशान करने लगी है। दुख तो यह है कि शिकायत करने पर भी आपकी परेशानी को कम या समाप्त करने के लिए ‘अमेजन इंडिया’ की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है। मैंने अमेजन के जरिए ब्रिटिश काल के भारतीय राजा-महाराजाओं के निजी जीवन, भव्य महलों, शाही जीवनशैली और उनसे जुड़े ऐतिहासिक वृत्तांतों पर आधारित हिंदी की पुस्तक ‘महाराजा’ मंगाने के लिए 25 मई, 2026 को 1 बजकर 21 मिनट पर 315 रु. जमा किए।
इस पुस्तक के लेखक हैं दीवान जरमनी दास। पांच दिन बाद 30 मई, 2026 को एक डिलीवरी ब्वॉय केशव कुंज, देशबंधु गुप्ता मार्ग, झंडेवाला, नई दिल्ली के पते एक पैकेट दे भी गया। उस समय कुछ जरूरी काम कर रहा था, तो पैकेट को तुरंत खोला नहीं। इसे मेरी गलती भी कह सकते हैं। कुछ घंटे बाद समय मिला और पैकेट खोला तो दंग रह गया। पुस्तक ‘महाराजा’ मंगाई थी, लेकिन पैकेट के अंदर अंग्रेजी की पुस्तक ‘ReWork : Change the Way You Work Forever’ थी। पहले सोचा कि गलती हो गई होगी। फिर सोचा कि ऐसा कैसे हो सकता है! अगर हिंदी की ही कोई पुस्तक आती तो मान लेता कि चलो ध्यान में नहीं रहा होगा और संबंधित व्यक्ति से गलती हो गई होगी।
लेकिन यह क्या पुस्तक देने वाले को यह भी पता नहीं चला कि वह हिंदी की जगह अंग्रेजी की पुस्तक भेज रहा है, वह भी ऐसी पुस्तक जिसका विषय बिल्कुल अलग है। खैर, आनलाइन देखा तो पता चला कि इस तरह की शिकायत आठ दिन के अंदर की जा सकती है। इसके बाद दो—तीन के अंदर ही मैंने शिकायत की। उधर से उत्तर भी आया कि एक—दो दिन में पुस्तक वापस मंगा ली जाएगी। इसके लिए मेरे पास कई संदेश भी आए। संदेश देखकर अच्छा लगा कि चलो गलती हो गई है, तो उसे सुधारने के लिए भी अमेजन इंडिया के लोग तत्पर हैं। मैंने कई दिनों तक इंतजार किया कि कोई आएगा और पुस्तक वापस ले जाएगा, लेकिन आज तक कोई नहीं आया है।
अमेजन की लापरवाही
निराश होकर मैंने 2 जुलाई को अमेजन इंडिया को ‘एक्स’ पर लिखा भी कि इस गलती को ठीक करें। इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ। अभी भी मेरे पास वह पुस्तक रखी हुई है। अब फिर से ‘महाराजा’ पुस्तक मंगाने के लिए लिंक खोलने पर लिखा आता है— ‘यह पुस्तक उपलब्ध नहीं है।’ पहली बार तो ऐसा नहीं आया था। इसलिए मैंने पैसा जमा भी किया था। अब सवाल उठता है कि जब पुस्तक ही उपलब्ध नहीं है, तो 30 मई को ‘आर्डर बुक’ कैसे हो गया! इसका उत्तर अमेजन से अपेक्षित है।











