खटीमा: ईसाई बने ग्राम कुटरी के थारू जनजाति समाज के 36 लोगों ने सनातन धर्म में घर वापसी कर ली है। प्रधान की मौजूदगी में शुद्धिकरण हवन के बाद सभी लोगों ने हाथों में कलेवा बांधने के साथ ही जनेऊ भी धारण किया। एक दिन पहल कुटरी में 70 लोग पुनः सनातनी हुए थे।
ईसाई मत अपनाने वालों का जनजाति प्रमाण पत्र रद्द करने का अभियान
बताया जा रहा है कि प्रशासन द्वारा ईसाई धर्म अपनाने वालों के खिलाफ जांच दल गठित करने के बाद जनजाति प्रमाणपत्र रद्द करने के अभियान की वजह से थारू बुक्सा ईसाई धर्म अपनाने वालों के भीतर एक दहशत का माहौल है।
मिशनरियों के झांसे में आकर बने थे ईसाई
ग्राम कुटरी निवासी थारु जनजाति समाज के 36 लोगों ने मतांतरण कराने वालों के झांसे में आकर धर्म परिवर्तन कर लिया था और ईसाई बन गए थे। इसके बाद से वे नियमित प्रार्थना सभाओं में जाने के साथ ही ईसाई धर्म की पुस्तकें पढ़ते थे। उन्होंने गले में ईसाई धर्म का क्रास भी धारण कर लिया था, जबकि हिंदू देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करनी बंद कर दी थी। उन्होंने टीका, चंदन लगाना बंद करने के साथ ही प्रसाद भी नहीं लेते थे। अब उक्त लोगों ने अपनी भूल को स्वीकारते हुए
स्वेच्छा से की घर वापसी
खटीमा के ग्राम कुटरी में चरणामृत ग्रहण करते पुनः सनातन अपनाने वाले थारू समाज के लोगों का स्वागत किया गया जागरण स्वेच्छा से सनातन धर्म में वापसी की है। शुक्रवार को ग्राम प्रधान दीपा देवी, राधेश्याम राणा की। मौजूदगी में पंडित हरीश जोशी, साधू मोहन गिरी ने शुद्धिकरण हवन कराया, जिसके बाद सनातन धर्म में लौटे 36 लोगों के हाथों में कलेवा बांधा गया एवं जनेऊ धारण कराकर चरणामृत एवं प्रसाद दिया गया। उन लोगों ने ईसाई धर्म का क्रास व पुस्तकें अपने से दूर कर दी।
10-12 साल पहले कराया गया था मतांतरण
ग्राम प्रधान ने बताया कि कुछ लोगों द्वारा करीब 10-12 वर्ष पहले थारू जनजाति समाज के सीधे-साधे लोगों को बहला-फुसलाकर उनका मतांतरण कराया गया था, लेकिन अब उन लोगों को अपनी गलती का अहसास होने लगा है और वे सनातन धर्म में वापसी कर रहे हैं। प्रधान ने ईसाई धर्म अपना चुके सभी लोगों से सनातन धर्म में वापसी करने की अपील की है। बता दें कि इससे पूर्व गुरुवार को भी कुटरी गांव के 70 लोग ईसाई धर्म छोड़कर सनातन धर्म में लौटे थे, जिनका विधिवत शुद्धिकरण हवन कराने के बाद सनातन धर्म में वापसी कराई गई थी।

















