महाराष्ट्र के ठाणे में मुंब्रा की पार्षद सहर शेख की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। फर्जी जाति प्रमाणपत्र के बाद अब वह मराठी में बोलने से मना करने को लेकर विवादों में हैं। अब्बा युनूस शेख के साथ AIMIM की पार्षद ने मंगलवार (21 अप्रैल) को प्रेस कांफ्रेंस की। इस दौरान युनूस शेख की बेटी सहर शेख ने स्थानीय मीडियाकर्मियों के सवालों का जवाब मराठी भाषा में देने से मनाकर दिया और हिंदी में अपनी बात रखी। सोशल मीडिया पर उनका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह पत्रकारों से अपनी बात स्थानीय भाषा की बजाय हिंदी में रखने को कह रही हैं।
‘मैं थोड़ी फेमस हूं इसलिए मराठी बोलकर ट्रोल नहीं होना चाहती’
वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जब मीडियाकर्मियों ने सहर शेख से मराठी में बात करने को कहा तो वह बोलीं, ”मैं मराठी बोलने में सहज नहीं हूं। मुझे नहीं चलता। आपको चलता है, लेकिन आप मुझे कोई भी भाषा बोलने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।” उन्होंने आगे कहा कि मेरी मराठी कमजोर है, क्योंकि मैं थोड़ी फेमस हूं। ऐसे में मैं नहीं चाहती मराठी बोलते हुए कोई एक भी शब्द गड़बड़ हो। मैं मराठी के लिए ट्रोल नहीं होना चाहती। मराठी महाराष्ट्र में सम्मानित भाषा है। मैं उसकी अस्मिता को खराब नहीं करना चाहती हूं। बाद में सहर शेख ने यह भी कहा कि आप मुझे जबरन मराठी बोलने के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं।
“मुंब्रा को हरा रंग देंगे”: कौन है सहर शेख जिसने फैलाया मजहबी उन्माद
इसके बाद युनूस शेख ने बेटी से माइक छीनकर कहा, “अगर आप कहोगे कि चैनल गुजराती है तो क्या हम गुजराती भी सीखकर आए। मैं बोलता हूं मराठी। चाहे मेरा मीम बनाओ, मुझे इसकी कोई परवाह नहीं। लेकिन मेरा मराठी इतना अच्छा नहीं है। मैं अभी भी इस भाषा को सीख रहा हूं।”
यूजर्स बोले- आपने मराठी लोगों के साथ विश्वासघात किया
यूजर्स वायरल वीडियो को शेयर कर उद्धव और राज ठाकरे को टैग करके कह रहे हैं कि क्या अब इसे भी महाराष्ट्र से बाहर निकालेंगे ये लोग। एक अन्य यूजर ने कहा कि वह मूल रूप से महाराष्ट्र की नहीं हैं, फिर भी उन्हें सरकारी पैसा चाहिए। वह मराठी बोलना नहीं चाहती, लेकिन उसे सरकारी पैसा, सरकारी नौकरी और सरकारी फंड चाहिए। ये कैसे नेता हैं?
मोनोतोष दत्ता लिखते हैं कि तो फिर आपको इस्तीफा दे देना चाहिए, क्योंकि आप मराठी बोल नहीं पातीं। ऐसे में आप लोगों की मदद कैसे कर पाएंगी? क्या यह वहां के स्थानीय लोगों के साथ आपकी तरफ से किया गया विश्वासघात नहीं है?
फर्जी जाति प्रमाणपत्र पर क्या बोलीं सहर शेख
फर्जी जाति प्रमाणपत्र मामले में एआईएमआईएम की पार्षद सहर शेख ने कहा, “हमें फरार करार दिया। बड़े-बड़े आरोप लगाए गए। हम संविधान को मानने वाले हैं। इस लड़ाई को कानूनी तौर पर लड़ेंगे। मैं उनको (शिकायतकर्ता) कोर्ट में देखूंगी।” प्रतिद्वंदी उम्मीदवार की शिकायत पर जाति प्रमाणपत्र को फर्जी बताए जाने पर सहर शेख के अब्बा ने यह भी कहा कि उन पर और उनकी बेटी पर ओबीसी प्रमाणपत्र फर्जी होने का आरोप लगाया गया, जो पूरी तरह गलत है। उनका ओरिजिनल ओबीसी प्रमाणपत्र तहसीलदार कार्यालय द्वारा जारी किया गया है।
अधिकारियों को गुमराह कर फर्जी जाति प्रमाण पत्र हासिल करने का आरोप
रिपोर्ट्स के मुताबिक, तहसीलदार उमेश पाटिल द्वारा की गई जांच के बाद यूनुस शेख के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की गई। यह जांच एनसीपी की प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार सिद्दीकी फरहा शबाब अहमद की शिकायत पर की गई थी। जांच में यह भी सामने आया था कि यूनुस शेख का परिवार मूल रूप से गाजियाबाद का रहने वाला है। कुछ सालों बाद वे महाराष्ट्र आकर बस गए थे। उन पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित ‘फॉर्म 8’ का इस्तेमाल करके अधिकारियों को गुमराह करते हुए जाति प्रमाण पत्र हासिल किया।
एसपी नेता जितेंद्र आव्हाड का उड़ाया था मजाक
सहर शेख महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में ठाणे के मुंब्रा इलाके से एआईएमआईएम के टिकट पर जीती थीं। यहां शरद पवार की अगुवाई वाली पार्टी (एसपी) के नेता और विधायक जितेंद्र आव्हाड का दबदबा माना जाता है। जीतने के बाद सहर शेख ने जितेंद्र आव्हाड पर टिप्पणी की थी और कहा था, ”कैसा हराया।” साथ ही मुंब्रा को अगले पांच सालों में हरा रंगने का विवादित बयान था। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी खूब वायरल हुआ था। तब भाजपा नेता किरीट सोमैया ने सहर शेख के खिलाफ मुंब्रा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

















