अनहत सिंह ने इतिहास रच दिया। 18 साल की इस भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी ने विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप का खिताब जीत लिया। यह भारत के लिए पहला मौका है जब कोई खिलाड़ी इस टूर्नामेंट में चैंपियन बना हो।
फाइनल में शानदार जीत
कनाडा के नियाग्रा-ऑन-द-लेक में खेले गए फाइनल में अनहत ने मिस्र की रुकय्या सलेम को 3-0 से हरा दिया। स्कोर था 11-3, 11-7, 11-9। अनहत टॉप सीड थीं और रुकय्या दूसरी सीड। मैच बिना किसी गेम गंवाए खत्म हुआ। मिस्र के खिलाड़ी इस उम्र वर्ग के टूर्नामेंट पर पिछले 16 साल से कब्जा जमाए हुए थे। अनहत ने इस लंबे सिलसिले को तोड़ दिया। 2010 के बाद पहली बार कोई गैर-मिस्री खिलाड़ी (या मिस्री मूल की) यह खिताब जीती है। उस साल अमेरिका की अमांडा सोबी चैंपियन बनी थीं।
रास्ता आसान नहीं था
अनहत को पूरे टूर्नामेंट में मिस्र के खिलाड़ियों का सामना करना पड़ा। क्वार्टरफाइनल में उन्होंने बार्ब समेह को 3-1 से हराया — 11-3, 8-11, 11-4, 11-6। सेमीफाइनल में हबीबा रिज्क को 3-1 से हराया — 11-7, 11-5, 6-11, 11-9। तीन मिस्री खिलाड़ियों को लगातार हराना अपने आप में बड़ी बात है। अनहत भारत की पहली फाइनलिस्ट भी बनीं पिछले 20 साल में। इससे पहले जोशना चिनप्पा 2005 में फाइनल तक पहुंची थीं।
अनहत का सफर
अनहत दिल्ली की रहने वाली हैं। इस साल उन्होंने कहा था कि यह उनका आखिरी जूनियर टूर्नामेंट होगा क्योंकि वे सीनियर सर्किट पर फोकस कर रही हैं। वे पहले से ही विश्व रैंकिंग में टॉप-20 में हैं। पिछले साल इसी टूर्नामेंट में उन्हें ब्रॉन्ज मिला था। इस बार उन्होंने उस रंग को गोल्ड में बदल दिया। वे जूनियर एशियन चैंपियन भी रह चुकी हैं और सीनियर स्तर पर भी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। फाइनल में टॉप-टू क्लैश था, जहां उन्होंने अपनी तैयारी और फोकस दिखाया।
अनहत की यह जीत भारतीय स्क्वैश के लिए मील का पत्थर है। मिस्र जैसी मजबूत टीम वाले देश के खिलाड़ियों को लगातार हराकर उन्होंने साबित कर दिया कि वे इस स्तर की बेस्ट खिलाड़ियों में शामिल हैं।











