महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों के निर्माण, परिवहन और बिक्री में शामिल आरोपियों के खिलाफ मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट) लागू किया है। एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने एक इंटरव्यू में बताया कि गुटखा बनाने वाले, ट्रांसपोर्ट करने वाले और उसे बेचने वाले एक संगठित नेटवर्क चलाते हैं, जिसके कारण राज्य को मकोका एक्ट लागू करना पड़ा।
तुकाराम मुंढे ने कहा, “महाराष्ट्र में ‘फूड सेफ्टी एक्ट’ की धारा 30 के तहत 2004 से ही गुटखा पर रोक लगी हुई है। जब एक बार इस पर रोक लग जाती है, तो इसे बनाया, ट्रांसपोर्ट, स्टोर या बेचा नहीं जा सकता।”
उन्होंने कहा कि मकोका लागू करने का फैसला तब लिया गया जब सप्लाई चेन में मिलकर काम करने वाले लोगों का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया। इसमें कई लोग शामिल हैं जैसे इसे बनाने वाले, ट्रांसपोर्ट करने वाले और बेचने वाले। ये सब मिलीभगत से काम कर रहे हैं। यह एक संगठित अपराध है।
मकोका के तहत 700 से अधिक FIR दर्ज
मकोका उन गैर कानूनी कामों पर लागू होता है, जिनमें तीन साल से ज्यादा (कुछ मामलों में उम्रकैद भी हो सकती है) की सजा हो सकती है। इस अपराध में दो से लोगों का शामिल होना जरूरी होता है। कमिश्नर मुंढे ने बताया कि एफडीए ने पूरे राज्य में गुटखे से जुड़े नियमों के उल्लंघन के लिए पहले ही 700 से अधिक एफआईआर दर्ज की हैं, जो इस कड़े कानून को लागू करने का आधार बनी हैं। एफडीए अब इस कारोबार से जुड़े हर व्यक्ति (निर्माण करने वाला, ट्रांसपोर्टर और बेचने वाला) के बारे में अलग-अलग फाइलें तैयार कर रहा है, ताकि मकोका के तहत मामले बनाए जा सकें।
‘महाराष्ट्र में एक ग्राम भी गुटखा नहीं मिलेगा’
मुंढे के अनुसार, इस कानून को लागू करने का उद्देश्य राज्य से प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों को पूरी तरह खत्म करना है। उन्होंने कहा, “हम इसमें शामिल हर व्यक्ति की फाइलें तैयार कर रहे हैं और एक बार ये तैयार होने के बाद हम महाराष्ट्र में एक ग्राम गुटखा भी नहीं आने देंगे।”
फूड सेफ्टी कानून ठीक से लागू नहीं होने पर उठाया सख्त कदम
गुटखे के खिलाफ की गई कार्रवाई एफडीए की ओर से मुंढे के नेतृत्व में चलाए जा रहे बड़े एनफोर्समेंट अभियान का हिस्सा है। उन्होंने विभाग का कामकाज संभालने के बाद से दूध, डेयरी उत्पादों, होटल, रेस्टोरेंट और नकली दवाओं पर भी कार्रवाई की है।
मुंढे ने आगे कहा कि विभाग ने यह तरीका इसलिए अपनाया है, क्योंकि पिछले कुछ सालों में मौजूदा फूड सेफ्टी कानूनों को ठीक से लागू नहीं किया गया। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006, 2011 और 2018 में बने नियमों को ठीक से लागू न किए जाने के कारण एफडीए को गुटखा, डेयरी और दवा उद्योग जैसे सभी क्षेत्रों में सख्त कदम उठाने पड़े हैं।
वह आगे कहते हैं कि महाराष्ट्र में फूड बिजनेस का दायरा बहुत बड़ा है, जिसमें 11 लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड फूड बिजनेस ऑपरेटर हैं। ऐसे में गैर कानूनी नेटवर्क के जरिये बिकने वाले प्रतिबंधित और हानिकारक उत्पादों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
मुढ़े के एक्शन से मिलावटखोरों में हड़कंप
महाराष्ट्र सरकार ने 19 मई 2026 को तुकाराम मुढ़े को एफडीए का नया कमिश्नर नियुक्त किया था। उन्होंने मई के आखिरी हफ्ते में अपना कार्यभार संभाला था। तुकाराम मुढ़े की कार्यशैली से पूरे महाराष्ट्र में मिलावटखोरों में हड़कंप हैं।
एनर्जी ड्रिंक्स के नाम पर गुमराह करने वाली पेप्सिको, रेड बुल, स्टिंग जैसी कंपनियों ने भी सरेंडर कर दिया है। इसको लेकर कंपनियों ने कहा था कि वे आगे से ऐसा नहीं करेंगी। बताया जाता है कि तुकाराम मुढ़े का 21 साल की नौकरी में यह 25वां ट्रांसफर है।











