नासिक टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) केस में एक नया और गंभीर मामला सामने आया है। इस केस में पकड़े गए 4 आरोपियों पर यहां काम करने वाले एक 35 वर्षीय हिंदू कर्मचारी ने यौन उत्पीड़न, धार्मिक अपमान और जबरन कन्वर्जन के प्रयास के नए गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने इस मामले में चारों आरोपियों को अदालत के सामने पेश किया था, नए आरोपों को देखते हुए जज ने उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया।
नासिक के मुंबईनाका पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, पीड़ित व्यक्ति जो कि एक वरिष्ठ विश्लेषक (सीनियर एनालिस्ट) के पद पर कार्यरत है, उसे लंबे समय से उसके सहकर्मियों मानसिक और धार्मिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। शुक्रवार को पुलिस ने अदालत में आरोपियों की हिरासत मांगते हुए इस मामले की संवेदनशीलता पर प्रकाश डाला।
नमाज पढ़ने के लिए किया मजबूर
पीड़ित का आरोप है कि चारों आरोपियों तौसीफ अत्तार, दानिश शेख, शाहरुख कुरैशी और रजा रफीक मेमन अक्सर हिंदू देवी-देवताओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां करते थे, जिससे उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती थी। शिकायत के मुताबिक, एक बार इन आरोपियों ने पीड़ित को जबरन मुस्लिम टोपी पहनाई और उसे नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया। इतना ही नहीं, इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर उन्होंने कर्मचारियों के एक व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर कर दिया ताकि उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जा सके।
इस मामले में केवल धार्मिक प्रताड़ना ही नहीं, बल्कि यौन उत्पीड़न के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिसके कारण पुलिस ने इसे एक विशेष श्रेणी का अपराध माना है।
मांसाहारी भोजन करने के लिए भी किया विवश
सुनवाई के दौरान सरकारी वकीलों ने कोर्ट को बताया कि यह केवल सहकर्मियों के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित तरीके से किया गया कन्वर्जन का प्रयास प्रतीत होता है। इसके लिए आरोपियों में पीड़ित को मांसाहार करने का भी दबाव बनाया था। मुंबईनाका पुलिस ने चारों आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, आपराधिक धमकी देने और अन्य अपराधों के लिए मामला दर्ज किया है।
कोर्ट ने आरोपियों को 29 अप्रैल तक रिमांड पर भेजा
पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि शिकायतकर्ता का धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से उसे जबरन मांसाहारी भोजन करने के लिए भी विवश किया गया। यह पीड़ित की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक मान्यताओं का सीधा उल्लंघन है। मजिस्ट्रेट ने मामले की गंभीरता और आगे की जांच की आवश्यकता को देखते हुए तौसीफ, दानिश, शाह रुख और रजा को 29 अप्रैल 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क या बाहरी प्रभाव शामिल था।
वर्क कल्चर पर बड़े सवाल
TCS जैसी प्रतिष्ठित वैश्विक कंपनी की इकाई में इस तरह की घटना का होना कार्यस्थल की सुरक्षा और ‘वर्क कल्चर’ पर बड़े सवाल खड़े करता है। जैसे क्या कंपनियों के भीतर कर्मचारियों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए पर्याप्त तंत्र मौजूद नहीं हैं? कॉर्पोरेट ग्रुप्स का इस्तेमाल किसी कर्मचारी को परेशान करने और उसके अपमानजनक वीडियो साझा करने के लिए किया जाना चिंताजनक है। पुलिस तो अपना काम कर रही है लेकिन अब यह कंपनियों की भी जिम्मेदारी है कि वे अपनी आंतरिक जांच को सख्त करें ताकि किसी भी कर्मचारी को उसकी आस्था के कारण प्रताड़ित न किया जा सके।















