पंजाब के पाकिस्तान सीमा से सटे ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित नहीं किए जाने के आरोपों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग की बेंच ने इस मामले में पंजाब सरकार के मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय से भी इस संबंध में जानकारी मांगी है, जबकि गृह मंत्रालय को पूरे मामले से अवगत कराया गया है। मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा कि पाकिस्तान सीमा से लगे पंजाब के कुछ इलाकों के सरकारी स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाया जाता। उनके अनुसार, गांवों के स्कूलों में न तो ध्वजारोहण किया जाता है और न ही राष्ट्रगान कराया जाता है।
‘ग्रामीण बच्चों के साथ भेदभाव’
प्रियंक कानूनगो ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों को स्वतंत्रता दिवस समारोह से वंचित करना उनके साथ भेदभाव है और उनके अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि देशभर में बच्चे स्वतंत्रता दिवस पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को याद करते हैं और देश के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं, लेकिन यदि पंजाब के ग्रामीण इलाकों के बच्चों को इससे वंचित किया जाता है तो यह गंभीर विषय है।
संविधान के अनुच्छेद 51 का दिया हवाला
आयोग के सदस्य ने संविधान के अनुच्छेद 51 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें नागरिकों के संवैधानिक कर्तव्यों का प्रावधान है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की ध्वज संहिता में स्कूलों में ध्वजारोहण की व्यवस्था है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से भी समय-समय पर स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित करने संबंधी निर्देश जारी किए गए हैं।
पंजाब सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
कानूनगो ने कहा कि सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को स्वतंत्रता दिवस आयोजन से वंचित करना पंजाब सरकार की नाकामी है। उन्होंने इस मामले में बेहद कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे ‘सरकारी देशद्रोह’ तक करार दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को देशभक्ति और स्वतंत्रता संग्राम के बारे में बताना तथा राष्ट्रीय पर्वों के महत्व से परिचित कराना आवश्यक है। ऐसे में किसी क्षेत्र के बच्चों को राष्ट्रीय पर्व के आयोजन से अलग रखना गंभीर चिंता का विषय है।
मुख्य सचिव से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
आयोग के सदस्य के मुताबिक आयोग ने पंजाब के मुख्य सचिव को नोटिस भेजकर मामले में विस्तृत रिपोर्ट और कार्रवाई की जानकारी मांगी है। इसके साथ ही भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय को भी नोटिस जारी कर जानकारी मांगी गई है। गृह मंत्रालय को भी मामले से अवगत कराया गया है। अब पंजाब सरकार की रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट होगा कि सीमावर्ती सरकारी स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित न किए जाने के पीछे क्या कारण रहे और इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।

















