हरिद्वार में बना दुनिया का अनोखा हर्बल आर्ट म्यूज़ियम, 65 हजार से ज्यादा दुर्लभ वनस्पति कलाकृतियां
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हरिद्वार में बना दुनिया का अनोखा हर्बल आर्ट म्यूज़ियम, 65 हजार से ज्यादा दुर्लभ वनस्पति कलाकृतियां

भारत की आयुर्वेदिक और वनस्पति विरासत को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने वाला एक अद्भुत और अनूठा हर्बल आर्ट म्यूज़ियम अब पतंजलि के हरिद्वार में आकार ले चुका है।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by Mahak Singh
Aug 19, 2026, 04:21 pm IST
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हरिद्वार: भारत की आयुर्वेदिक और वनस्पति विरासत को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने वाला एक अद्भुत और अनूठा हर्बल आर्ट म्यूज़ियम अब पतंजलि के हरिद्वार में आकार ले चुका है। यह केवल एक संग्रहालय नहीं, बल्कि औषधीय वनस्पतियों का दृश्य विश्वकोश है, जिसमें दुनिया भर के औषधीय और जैव-विविधता से समृद्ध पौधों की 65,000 से अधिक वनस्पति कलाकृतियां संरक्षित की गई हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इतने विशाल स्तर पर औषधीय पौधों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बनाये गए रंगीन कैनवास कलाकृतियां तथा रंगहीन रेखाचित्रों का संग्रह वर्तमान समय तक  दुनिया में कहीं और उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि यह संग्रहालय वैश्विक स्तर पर वनस्पति कला और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण का एक नया मानक स्थापित कर रहा है।

30,500 कैनवास चित्र और 35,000 रेखाचित्रों का अनूठा संग्रह

हस्तनिर्मित 30,500 रंगीन कैनवास चित्र और 35,000 रेखाचित्रों के संग्रह को इस संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है। हर चित्र केवल कलात्मक प्रस्तुति नहीं, बल्कि एक प्रमाणिक वैज्ञानिक दस्तावेज भी है। वनस्पतियों की संरचना, पुष्प, फल, बीज, पत्तियों और अन्य विशेषताओं को इतनी बारीकी से दर्शाया गया है कि शोधकर्ता और विद्यार्थी उन्हें अध्ययन सामग्री के रूप में उपयोग कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये हस्तनिर्मित चित्र इस संग्रहालय में 300 वर्षों तक अपने इसी मूल रूप में जीवंत रहेंगे।

1762 स्लाइडर्स और 50 अलमारियों में व्यवस्थित है पूरा संग्रह

इस विशाल संग्रह को वर्णानुक्रम (Alphabetical Order) में व्यवस्थित किया गया है।जिसमे रंगीन कैनवास चित्रों को 1762 विशेष स्लाइडर्स में व्यवस्थित किया गया है, जबकि रेखाचित्रों को 50 विशेष रैक्स वाली 50 लकड़ी की अलमारियों में सुरक्षित रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संग्रह आने वाली कई पीढ़ियों तक वनस्पति विज्ञान, आयुर्वेद और जैव विविधता अध्ययन के लिए अमूल्य धरोहर बना रहेगा।

एक संकल्प जिसने रच दिया इतिहास

इस विश्वस्तरीय संग्रहालय की कहानी भी उतनी ही प्रेरणादायक है जितना कि इसका स्वरूप। पतंजलि योगपीठ के  आचार्य बालकृष्ण जब कोलकाता प्रवास पर थे, तब उन्होंने लगभग 3,000 संरक्षित वनस्पति चित्रों का एक संग्रह देखा। उन चित्रों को भारतीय कलाकारों ने तैयार किया था। उसी समय उनके मन में यह विचार आया कि जब विदेशी संस्थान भारतीय वनस्पतियों को इतने व्यवस्थित तरीके से संरक्षित कर सकते हैं, तो भारत स्वयं अपनी समृद्ध औषधीय परंपरा का विश्व का सबसे बड़ा दृश्य संग्रह क्यों नहीं तैयार कर सकता। हरिद्वार लौटने के बाद उन्होंने वनस्पति वैज्ञानिकों और कलाकारों की अलग-अलग टीमें गठित कीं। वर्षों की मेहनत, शोध और कलात्मक साधना के बाद वह सपना आज एक भव्य वास्तविकता के रूप में दुनिया के सामने खड़ा है।

जब कैनवास चित्र जीवंत पौधों जैसी दिखने लगती हैं

संग्रहालय की सबसे बड़ी विशेषता इसके हैंडमेड कैनवास चित्र हैं। एक-एक मीटर आकार की इन चित्रों वाली कैनवास को ऐक्रेलिक माध्यम से तैयार किया गया है। पहली नजर में इन्हें देखकर यह विश्वास करना कठिन हो जाता है कि ये चित्र हैं क्योंकि इनमें पौधों की आकृति, रंग, बनावट और सूक्ष्म संरचनाएं लगभग वास्तविक स्वरूप में दिखाई देती हैं।

नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस लेटर्स में भी मिली जगह

इस अनूठे प्रयास को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय ने भी सराहा है। प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल National Academy Science Letters में इस संग्रहालय और इसके महत्व का उल्लेख प्रकाशित किया जा चुका है। आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, यह संग्रह 20 वीं और 21 वीं सदी के सबसे समृद्ध वनस्पति कला संग्रहों में से एक माना जा सकता है और यह पौधों तथा कला-दोनों के प्रेमियों को समान रूप से आकर्षित करेगा।

ब्रिटेन और अमेरिका के प्रसिद्ध संस्थानों से भी अलग पहचान

विश्व के प्रसिद्ध संस्थान Royal Botanic Gardens, Kew तथा Hunt Institute for Botanical Documentation में वनस्पति कला का समृद्ध संग्रह मौजूद है। वहाँ तैलीय चित्र, वॉटरकलर पेंटिंग्स, स्केच और अन्य कलात्मक अभिलेख सुरक्षित रखे गए हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर व्यवस्थित और वैज्ञानिक रूप से वर्गीकृत कैनवास पेंटिंग्स का संग्रह वहां भी अपेक्षाकृत दुर्लभ है। भारत में भी Central National Herbarium के पास लगभग 3,280 बड़े वनस्पति चित्रों का ही संग्रह है, जिनमें प्रसिद्ध रॉक्सबर्ग चित्र भी शामिल हैं। इसके बावजूद पतंजलि के पतंजलि अनुसंधान फाउंडेशन में मौजूद यह संग्रह अपने आकार, विविधता और प्रस्तुति के कारण एक अलग वैश्विक पहचान बना रहा है।

Topics: Uttarakhand NewsHaridwar NewsUttarakhand Latest NewsAcharya BalkrishnaPatanjali Research Foundation
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