जब हिंदू सैनिकों ने पठानों की रक्षा में तानी छाती : मजहबी उन्माद फैलाने वालों के लिए बड़ा सबक है पेशावर कांड का इतिहास
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जब हिंदू सैनिकों ने पठानों की रक्षा में तानी छाती : मजहबी उन्माद फैलाने वालों के लिए बड़ा सबक है पेशावर कांड का इतिहास

पेशावर काण्ड सन् 1857 के बाद भारतीय सैनिकों का पहला विद्रोह था। इस घटना से सारे देश में आजादी के आन्दोलन को नई स्फूर्ति मिली। भारत से लेकर ब्रितानियां तक गढ़वालियों का नाम हुआ।

Written byराकेश सैनराकेश सैन — edited by Shivam Dixit
Apr 23, 2026, 10:01 pm IST
inभारत, जनजातीय नायक
Veer Chandra Singh Garhwali Peshawar Kand 1930 and Hindu Bravery History

23 अप्रैल 1930: जब हिंदू गढ़वाली वीरों ने ब्रिटिश हुकूमत के आगे झुकने से इनकार कर दिया।

कुछ जिहादी किस्म के लोग मजहब के नाम पर देश में खूनखराबा कर रहे हैं तो कई जबरन कन्वर्जन व लव जिहाद जैसे आपराधिक कृत्यों में पड़ कर हिन्दू समाज को मिटाने को प्रयासरत हैं परंतु आज का दिन का इतिहास ऐसे लोगों की आंखें खोलने वाला है, क्योंकि आज के दिन पेशावर में हिन्दू सैनिकों ने अपने हमवतनी पठान प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से इंकार कर दिया था और अपना सीना तान कर उनकी रक्षा को खड़े हो गए थे।

गढ़वाली सैनिकों की ऐतिहासिक वीरता

हिंदू शौर्य व देशभक्ति की ऐसी मिसाल गढ़वाली सैनिकों ने पेशावर में 23 अप्रैल 1930 को पेश की थी। यही नहीं इस काण्ड के नायक चन्द्रसिंह गढ़वाली के नेतृत्व में इन हिन्दू विद्रोही सैनिकों ने निहत्थे पठानों पर गोलियां बरसाने के बजाय गोरों के सैनिकों के आगे अपने सीने तान लिए थे।

आज के दिन 2/18 रॉयल गढ़वाल रायफल्स के उन बहादुर सैनिकों को भी अवश्य ही नमन किया जाना चाहिए, जिन्होंने अपने जीवन और नौकरी की परवाह न कर चन्द्रसिंह के आदेश पर 23 अप्रैल 1930 को पेशावर में निहत्थे स्वाधीनता प्रेमी पठानों पर गोली चलाने से इंकार कर दिया था।

इस घटना ने सारे देश में स्वाधीनता आन्दोलन में एक नया जोश पैदा किया। माना जाता है कि बाद में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने गढ़वाली सैनिकों और अफसरों को उनके देश प्रेम और बलिदान के लिए सहर्ष तत्पर रहने की भावना से प्रभावित हो कर उन्हें आजाद हिन्द फौज में महत्वपूर्ण पदों पर रखा।

नेताजी की आइएनए में ढाई हजार से ज्यादा गढ़वाली सैनिक थे।

सैन्य विद्रोह जिसमें बहादुरों ने बन्दूकें झुका दीं

पेशावर काण्ड सन् 1857 के बाद भारतीय सैनिकों का पहला विद्रोह था। मगर विद्रोह भी ऐसा कि किसी पर बंदूक उठा कर नहीं बल्कि सीने तान कर। इस घटना से सारे देश में आजादी के आन्दोलन को नई स्फूर्ति मिली। भारत से लेकर ब्रितानियां तक गढ़वालियों का नाम हुआ।

गढ़वाली दिवस और कानूनी कार्यवाही

मोती लाल नेहरू के आह्वान पर देश के प्रमुख नगरों में ‘‘गढ़वाली दिवस’’ मनाया गया। इस काण्ड में चन्द्रसिंह एवं अन्य गढ़वाली सैनिकों को मृत्युदण्ड भी मिल सकता था, लेकिन बैरिस्टर मुकन्दीलाल की जबरदस्त पैरवी से उन्हें फांसी की सजा नहीं हुई, मगर सारी उम्र कालापानी की सजा अवश्य मिली।

कोर्ट मार्शल और सजा

अंग्रेजों की गुलामी से हिन्दुस्तान को आजाद कराने की मांग को लेकर 23 अप्रैल 1930 को पेशावर में भारी संख्या में प्रदर्शन कर रहे पठानों पर गोली चलाने के अंग्रेज अफसर के हुक्म की नाफरमानी करने के आरोप में चन्द्रसिंह सहित सभी गढ़वाली सैनिकों पर एबटाबाद में कोर्ट मार्शल की अदालती कार्यवाही चली।

सैनिकों को दी गई सजा का विवरण

  • चन्द्र सिंह गढ़वाली को आजन्म कालापानी की सजा दी गई
  • 16 सैनिकों को सख्त और लंबी अवधि के कारावास की सजा
  • 9 सैनिकों को नौकरी से बर्खास्त कर उनका संचित वेतन जब्त किया गया
  • 7 अन्य सैनिकों को भी सेना से बर्खास्त किया गया

चन्द्र सिंह भण्डारी गढ़वाली को आजीवन कालापानी, संपत्ति जब्ती, हवलदार से सिपाही पद पर डिमोशन और अंततः बर्खास्तगी

लंबी सजा पाने वाले सैनिक

  • हवलदार नारायण सिंह गुसाईं
  • नायक जीत सिंह रावत
  • नायक भोला सिंह बुटोला
  • नायक केशर सिंह रावत
  • नायक हरक सिंह धपोला
  • लांस नायक महेन्द्र सिंह
  • लांस नायक भीमसिंह बिष्ट
  • लांस नायक रतन सिंह नेगी
  • लांस नायक आनन्द सिंह रावत
  • लांस नायक आलम सिंह फरस्वाण
  • लांस नायक भवान सिंह रावत
  • लांस नायक उमराव सिंह रावत
  • लांस नायक हुकम सिंह कठैत
  • लांस नायक जीतसिंह बिष्ट

कोर्ट मार्शल के बाद नौकरी से बर्खास्त सैनिक

  • पाती राम भण्डारी
  • पान सिंह दानू
  • रामसिंह दानू
  • हरक सिंह रावत
  • लछमसिंह रावत
  • माधोसिंह गुसाईं
  • चन्द्र सिंह रावत
  • जगत सिंह नेगी
  • ज्ञानसिंह भण्डारी
  • शेरसिंह भण्डारी
  • मानसिंह कुंवर
  • बचन सिंह नेगी
  • रूपचन्द सिंह रावत
  • श्रीचन्द सिंह सुनार
  • गुमान सिंह नेगी
  • माधोसिंह नेगी
  • शेरसिंह महर
  • बुद्धिसिंह असवाल
  • जूरासंध सिंह रमोला
  • रायसिंह नेगी
  • किशन सिंह रावत
  • दौलत सिंह रावत
  • करम सिंह रौतेला
  • डबल सिंह रावत
  • हरकसिंह नेगी
  • रतन सिंह नेगी
  • हुक्म सिंह सुनार
  • श्यामसिंह सुनार
  • सरोप सिंह नेगी
  • मदनसिंह नेगी
  • प्रताप सिंह रावत
  • खेमसिंह गुसाईं
  • रामचन्द्र सिंह चौधरी

सेना से डिस्चार्ज किए गए सैनिक

  • त्रिलोक सिंह रावत
  • जैसिंह बिष्ट
  • गोरिया सिंह रावत
  • गोविन्द सिंह बिष्ट
  • दौलत सिंह नेगी
  • प्रताप सिंह नेगी
  • रामशरण बडोला

चन्द्र सिंह गढ़वाली का जीवन और संघर्ष

चन्द्र सिंह गढ़वाली के गढ़वाल प्रवेश पर रोक थी 1930 में चन्द्रसिंह गढ़वाली को 14 साल के कारावास के लिए ऐबटाबाद की जेल में भेज दिया गया। जिसके बाद उन्हें अलग-अलग जेलों में स्थानान्तरित किया जाता रहा। पर उनकी सजा कम हो गई और 11 साल के कारावास के बाद इन्हें 26 सितम्बर 1941 को आजाद कर दिया।

इन्हें यहां-वहां भटकते रहना पड़ा और अन्त में ये गांधी जी के पास चले गए।

गांधी जी इनसे बेहद प्रभावित रहे। 8 अगस्त 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में इन्होंने इलाहाबाद में रह कर इस आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई और फिर से 3 तीन साल के लिए गिरफ्तार हुए। 1945 में इन्हें आजाद कर दिया गया।

आज देश को गर्व है इन हिन्दू सैनिकों की वीरता, साहस व देशभक्ति पर।

Topics: Indian Freedom StrugglePeshawar KandChandra Singh GarhwaliGarhwali DiwasHindu Valor23 April 1930
राकेश सैन
राकेश सैन
वरिष्ठ पत्रकार। पंजाब के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक मुद्दों पर लेखन। [Read more]
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