अमेरिका के मिशिगन के एक शहर वारेन में इन दिनों कामकाजी आम अमेरिकी यह शिकायत कर रहे हैं कि उनका शहर अब मुस्लिम बहुल होता जा रहा है। फॉक्स न्यूज के अनुसार वे इसकी तुलना डेयरबोर्न (Dearborn) से कर रहे हैं?
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक 80 साल से ज्यादा पुरानी लूथरन चर्च की इमारत है। चर्च की इमारत तो वहीं खड़ी है, मगर अब क्रॉस गायब है। लगभग छह साल पहले इस संपत्ति को बेच दिया गया था और बाद में इसे Al-Ihsaan Islamic Center में बदल दिया गया।
यह कहा जा सकता है कि इस इमारत का स्वरूप पूरी तरह से बदल दिया गया। वहां रहने वाले लोगों का कहना है कि इस केंद्र के बनने के बाद से ही उनका जीवन प्रभावित हो रहा है। लगातार ट्रैफिक बढ़ने के कारण तनाव होता है, पार्किंग का शोर होता है। फॉक्स न्यूज से ही बात करते हुए 57 साल के जस्टिन टे कहते हैं कि 13 साल पहले वे वारेन आए थे। अब उन्हें यहां का माहौल देखकर झटका लग रहा है, वे हर चीज को मस्जिद में बदल देंगे! जस्टिन का कहना है कि उनके शहर में बाहर पैदा हुए मुस्लिमों की जनसंख्या पिछले दशक में बहुत तेजी से बढ़ी है।
क्या हुआ है ऐसा ?
यह प्रश्न भी उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि जस्टिन जैसे लोग ये बातें कर रहे हैं? जस्टिन का कहना है कि उनके लौटने के बाद 1990 और 2000 के दशक में मध्य पूर्व के अप्रवासियों के चलते, सब कुछ बदल गया। अमेरिका ने खुलकर मुस्लिम शरणार्थियों को शरण देना शुरू किया और ऐसी नीतियां बनाईं कि वे अपने परिवार भी साथ ला सकते थे। इन नीतियों के चलते इस शहर में सस्ते श्रम के लालच में लोग आते गए और बसते गए। यही उस शहर की कहानी है, जिसे लेकर जस्टिन परेशान हैं। अन्य लोगों का भी यही कहना है कि उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
जस्टिन का कहना था कि ईद वाले दिन अचानक से 100 से ज्यादा लोग इकट्ठे हुए और स्पीकर के साथ नमाज पढ़ी, जिससे काफी शोर हुआ। डेली मेल लिखता है कि कुछ नागरिकों का यह भी कहना है कि शुक्रवार और मुख्य इस्लामिक छुट्टियों वाले दिन समस्याएं दिखती हैं, क्योंकि बहुत अधिक संख्या में लोग नमाज पढ़ने आते हैं।
एक और नागरिक वेंडि शेन्डर ने कहा कि यहां इतना ट्रैफिक रहता है कि शुक्रवार की दोपहर को मेडिकल अप्वाइन्ट्मेन्ट भी नहीं ले सकते हैं। वारेन के मेयर का कहना है कि उन्हें इस विषय को लेकर कुछ ठोस शिकायत मिली ही नहीं। एक बार पहले शिकायत मिली थी, तो अवैध पार्किंग जैसा कुछ नहीं मिला।
मेयर की बात से लोग सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि उनके शहर पर मुसलमानों का कब्जा हो रहा है। एक ने कहा कि ऐसा हो रहा है कि एक अमेरिकी रेस्टोरेंट बंद होता है तो उसकी जगह पर एक इस्लामिक रेस्टोरेंट खुल जाता है और ऐसा तीन चार रेस्टोरेंट के मामलों में हो चुका है।
जस्टिन ने फॉक्स न्यूज को बताया कि उनकी मुलाकात मेयर से हो ही नहीं पाती है और अक्सर उनकी मुलाकात उनकी मुस्लिम सेक्रेटरी से होती है। सेक्रेटरी के अनुसार जस्टिन और शेष लोगों को मुसलमानों का आदर करना चाहिए, क्योंकि वे मुसलमान हैं।
क्या है डेयरबोर्न मामला, कैसे हुआ इस्लामीकरण?
डेयरबोर्न एक ऐसा शहर है, जिसमें अरब लोगों का बाहुल्य है। यहां पर छुट्टियों की नीतियां भी शेष शहरों से अलग हैं। 2023 में यहां ईद जैसे त्योहारों के लिए म्युनिसिपल इमारतों को बंद करने का आदेश जारी किया गया था और पब्लिक स्कूलों को भी।
वहां के मेयर अब्दुल्ला के खिलाफ इस आधार पर मुकदमा दायर किया गया था कि वे लोग मुसलमानों के त्योहारों को प्राथमिकता देते हैं और दूसरों को अनदेखा करते हैं। फॉक्स न्यूज के ही अनुसार डेयरबोर्न में टाउनहॉल में एक मीटिंग में स्थानीय चर्च के पादरी ने आरोप लगाया था कि शहर शरिया कानून के अंतर्गत काम कर रहा है। हम यह शहर खो चुके हैं। यह शहर अब अमेरिकी कानून से नहीं बल्कि शरिया से चलता है।
लोगों का कहना है कि मिशिगन में मुस्लिम लोग अपने समुदाय के लोगों को लगातार बाहर से बुलाकर अपनी जनसंख्या बढ़ा रहे हैं। हालांकि यहां के मेयर का कहना है कि ऐसा कुछ नहीं है कि इस शहर मे शरिया का कानून है और अमेरिका का नहीं। वारेन शहर के लोगों को यही डर है कि उनका हाल भी कहीं डेयरबोर्न जैसा न हो जाए।
नौकरियों का केंद्र बना था डेयरबोर्न
इस शहर का भी रोचक इतिहास है। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद फोर्ड और जनरल मोटर्स के लिए काम करने के लिए यहां पर कई पूर्व सैनिक बस गए थे। ऑटो निर्माण में यह इलाका एकदम से सुर्खियों में आ गया था। यहां कामकाजी लोगों का एक समुदाय वर्ष 1957 तक पनप चुका था।
2020 की जनगणना के अनुसार Dearborn की लगभग 54.5% आबादी Middle Eastern/North African (MENA) मूल की है (लगभग 1.1 लाख में से)। 2023 में यह अमेरिका का पहला अरब-बहुमत वाला शहर बना।
अमेरिका पर कैसे मंडरा रहा इस्लामीकरण का खतरा
मुस्लिम आबादी की वृद्धि दर उत्तरी अमेरिका में सबसे अधिक रही, जहां 2020 में मुसलमानों की संख्या 5.9 मिलियन थी (52% की वृद्धि), इसके बाद उप-सहारा अफ्रीका का स्थान रहा, जहां मुसलमानों की संख्या बढ़कर 369 मिलियन हो गई (34% की वृद्धि)।
हर क्षेत्र में मुसलमानों की आबादी गैर-मुस्लिम आबादी की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ी, सिर्फ एक अपवाद रहा। लैटिन अमेरिका-कैरेबियन क्षेत्र, जहां मुस्लिम आबादी सबसे कम है, वहां मुसलमानों की संख्या में 6% की वृद्धि हुई, जबकि क्षेत्र की गैर-मुस्लिम आबादी में 10% की वृद्धि हुई।
इसके परिणामस्वरूप, लैटिन अमेरिका और कैरेबियन को छोड़कर सभी क्षेत्रों में कुल आबादी में मुसलमानों का प्रतिशत बढ़ा। मुस्लिम आबादी के हिस्से में सबसे अधिक वृद्धि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हुई, जहाँ 2020 में मुसलमान कुल आबादी के 26% हो गए (1.4 प्रतिशत अंक की वृद्धि)। वहीं, उप-सहारा अफ्रीका में मुसलमान कुल आबादी का 33% हो गए (0.8 प्रतिशत अंक की वृद्धि) और यूरोप में मुसलमानों की हिस्सेदारी बढ़कर कुल आबादी की 6% हो गई (0.7 प्रतिशत अंक की वृद्धि)।












