बसेरा (चित्तौड़गढ़, राजस्थान)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चित्तौड़ प्रांत के बसेरा में आयोजित तीन दिवसीय प्रांत स्तरीय ‘प्रभात ग्राम’ विषयक कार्यशाला का भव्य समापन हो गया है. समापन सत्र को संबोधित करते हुए संघ के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार जी ने कहा कि नई पीढ़ी की बदलती रुचि और प्रकृति के अनुरूप ही सामाजिक कार्यों का नियोजन किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि प्रत्येक अच्छे कार्य को अपने आरंभिक दौर में विरोध और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, परंतु इन बाधाओं को धैर्य के साथ पार करने के बाद ही सफलता प्राप्त होती है. समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए निरंतरता और धैर्य की आवश्यकता होती है.
“गांवों के विकास में आधुनिक तकनीक और श्रम का समन्वय आवश्यक”
सह सरकार्यवाह आलोक कुमार जी ने गांवों के विकास पर चर्चा करते हुए कहा कि गांवों के उत्थान में आधुनिक तकनीक और पारंपरिक श्रम का बेहतरीन समन्वय होना जरूरी है. गांव के भीतर मौजूद श्रेष्ठ तकनीकी विशेषज्ञों और जानकारों का सम्मान किया जाना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ग्राम विकास समिति को सभी प्रकार की केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं की पूरी जानकारी होनी चाहिए, ताकि जरूरतमंद और पात्र लोगों को उन योजनाओं का पूरा लाभ दिलाया जा सके.
“दिव्यांग सहायता, वृद्धावस्था पेंशन सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी ग्राम विकास समितियों के माध्यम से पात्र व्यक्तियों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। जिस कार्य में हमारी माताओं-बहनों की भागीदारी होती है, वह कार्य तेजी से आगे बढ़ता है और गांव के विकास को नई गति मिलती है।” – आलोक कुमार जी, सह सरकार्यवाह, RSS
उन्होंने गांव की विकास समितियों में महिलाओं की सक्रिय सहभागिता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया और कहा कि महिलाओं के जुड़ने से सामाजिक बदलाव की गति कई गुना बढ़ जाती है.
जैविक खेती और आत्मनिर्भर ग्राम अर्थव्यवस्था पर जोर
किसानों से जैविक खेती को अपनाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत हर व्यक्ति को अपने परिवार से ही करनी चाहिए. रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग को धीरे-धीरे कम करते हुए गैर-रासायनिक एवं पूरी तरह जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाने की आज सबसे बड़ी आवश्यकता है.
प्रभात ग्राम योजना के प्रमुख आयाम और कार्यशाला के बिंदु:
- प्राचीन और आधुनिक अर्थव्यवस्था: प्राचीन काल में भारत आत्मनिर्भर था और गांव आधारित अर्थव्यवस्था थी। अब गांवों को पुराने दौर में लौटाने के बजाय आधुनिक, आत्मनिर्भर और सुविधायुक्त बनाने की जरूरत है।
- प्रभात ग्राम चयन प्रक्रिया: जो गांव 7 आयामों (सामाजिक शिक्षा, स्वास्थ्य, समरसता, स्वावलंबन, सुरक्षा, गौ-आधारित जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण) में से कम से कम 4 आयामों पर उत्कृष्ट कार्य कर आदर्श बन जाते हैं, उन्हें प्रांत टोली के अवलोकन के बाद ‘प्रभात ग्राम’ घोषित किया जाता है।
- कार्यशाला की सहभागिता: इस तीन दिवसीय कार्यशाला में 30 प्रभात ग्रामों से आए 205 कार्यकर्ता बंधु-भगिनियों ने हिस्सा लिया, जिनका निवास भी स्थानीय ग्रामीण परिवारों के यहां ही था।
यह कार्यशाला ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी.

















