केरल की राजनीति में 2021 के बाद माकपा में परिवारवाद देखा जा रहा हैं। एक बड़ा परिवर्तन हैं। माकपा परिवारवाद से अछूती थी मगर केरल के माकपा में यह परिवर्तन 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पी विजयन द्वारा अपने दामाद मोहम्मद रियास को अपने मंत्रिमंडल में स्थान देना हैं। मोहम्मद रियास की शादी केरल विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले 2020 में हुआ था। प्रथम बार के विधायक मोहम्मद रियास को लोक निर्माण और पर्यटन विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रयालयो का कैबिनेट मंत्री बनाना वाम राजनीती के लिए बड़ी राजनितिक घटना थी।
मुख्यमंत्री पर आरोप और दामाद को सत्ता सौंपने का दावा
केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन का प्रयास हैं की वो अपनी कुर्सी अपने दामाद को सौप दे। अगर फिर से माकपा नीत लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार बनी और पी विजयन मुख्यमंत्री बनते हैं तो अगले कार्यकाल में कभी भी मुख्यमंत्री की कुर्सी अपने दामाद मोहम्मद रियास को सौप सकते हैं।
अपने वर्तमान और प्रथम मुख़्यमंत्रातित्व काल में महत्वपूर्ण मंत्रयालयो का प्रभार देकर पी विजयन ने अपने पार्टी और गठबंधन की मानसिकता अच्छे से समझ लिया हैं की वो विरोध का स्वर नहीं उठाएंगे।
मोहम्मद रियास का राजनीतिक जीवन
मोहम्मद रियास का कोई बड़ा राजनितिक जीवन भी नहीं रहा हैं और 2021 से पूर्व महज एक बार 2009 में माकपा और एलडीएफ उम्मीदवार के तौर पर कोझिकोड से लोकसभा का चुनाव लड़कर हार गए थे।
बेपोर सीट और चुनावी रणनीति पर आरोप
मुख्यमंत्री पी विजयन ने अपने दामाद मोहम्मद रियास के लिए केवल चुनाव बाद मंत्रिमंडल में ही स्थान देकर पक्षपात नहीं किया बल्कि अपने प्रभाव का प्रयोग उन्होंने मोहम्मद रियास के लिए 2021 के विधानसभा चुनाव में सीट चुनने में भी किया। उन्होंने अपने प्रभाव से केरल में माकपा के लिए सबसे मजबूत और मुफीद सीट का चयन अपने दामाद के लिए करवाया। कोझिकोड जिले की बेपोर विधानसभा सीट जिस पर 1982 के बाद से लगातार माकपा जीत रही थी। इसके अलावे यह एक मुस्लिम बाहुल्य सीट भी हैं और 1982 के बाद इस सीट से केवल मुस्लिम उम्मीदवार ही जीतते रहे हैं ।
राजनीतिक समझौते और गठबंधन पर आरोप
पी विजयन की पूरी राजनीति अपने परिवार और दामद के इर्द गिर्द ही घूम रही हैं। राजनितिक संकेतो के मुताबिक पी विजयन और सोनिया गाँधी के बीच राजनितिक साठगांठ हैं जिसके तहत वायनाड लोकसभा सीट से गाँधी परिवार के सदस्यों को एलडीएफ कमजोरी से चुनाव लड़कर वायनाड लोकसभा सीट से चुनाव जितने में मदद करेगी वही इसके एवज में कांग्रेस पार्टी विधानसभा का चुनाव कमजोरी से लड़कर पी विजयन को मुख्यमंत्री बने रहने में मदद करेगी। केरल में कुल 140 विधानसभा की सीटों में 60 ऐसी सीटे हैं जिनपर 2021 में एलडीएफ ने जीत दर्ज़ किया था मगर 2024 के लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी उनपर आगे रही थी। इतना बड़ा परिवर्तन किसी राजनितिक समझौता के तहत ही हो सकता हैं।
वायनाड और रायबरेली सीट का संदर्भ
2024 में राहुल गाँधी द्वारा राय बरेली और वायनाड से लोकसभा की सीट जितने के बाद उन्होंने वायनाड लोकसभा सीट से इस्तीफा दिया जबकि गाँधी परिवार के लिए देश में सबसे मजबूत सीट राय बरेली मानी जाती हैं और वहां से प्रियंका वढेरा को उपचुनाव जितना वायनाड से भी ज्यादा आसान होता। 2019 से पूर्व गाँधी परिवार के किसी सदस्य ने केरल से चुनाव नहीं लड़ा था। इंदिरा गाँधी ने 1978 में उपचुनाव कर्नाटक के चिकमंगलूर से और 1980 का आम चुनाव तत्कालीन आंध्र प्रदेश में मेडक सीट से लड़ी थी। सोनिया गाँधी 1999 में कर्नाटक के बेल्लारी से लोकसभा का चुनाव लड़ी थी। विदित हो की इंदिरा गाँधी की सीट मेडक पर 1984 में कांग्रेस पार्टी हार गई थी वही बेल्लारी लोकसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी सोनिया गाँधी के चुनाव लड़ने के बाद 2004, 2009, 2014 और 2019 का आम चुनाव हार गई थी। गाँधी परिवार का कोई भी सदस्य दक्षिण के किसी सीट से 2024 के पूर्व दुबारा चुनाव नहीं लड़ा था वायनाड को छोड़कर।
कांग्रेस और एलडीएफ पर गठबंधन के आरोप
गाँधी परिवार वायनाड सीट से लगातार तीन बार चुनाव पी विजयन के साथ गुप्त समझौते के तहत ही लड़ रही हैं। इस गुप्त समझौते में जहाँ पी विजयन को अपने दामद मोहमद रियास को मुख्यमंत्री बनाना हैं वही सोनिया गांधी को अपनी संतानों के लिए रायबरेली के अलावे एक मजबूत सीट की अदद जरूरत हैं साथ ही लोकसभा में अधिक से अधिक सीटों की। यह भी आश्चर्यजनक हैं की 2019 और 2024 के लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने सर्वाधिक सीट केरल से ही जीती हैं।
















