C.O.C.K.R.O.A.C.H. के नौ अक्षरों में कइयों को विपक्षी राजनीति, वामपंथी विचारधारा, राजनीतिक व्यंग्य और डिजिटल सक्रियता से जुड़े कई चर्चित चेहरे और संगठन दिखाई दे रहे हैं। अंग्रेजी के इन नौ अक्षरों के तालमेल से निकलता है कॉकरोच और जन्म लेती है कॉकरोच जनता पार्टी” का शोर। यह शोर केवल एक व्यंग्यात्मक अभियान भर नहीं दिखता, बल्कि डिजिटल मंचों पर गढ़े गए एक नए राजनीतिक प्रयोग का रूप भी प्रस्तुत करता है।
इसमें स्थापित राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि चेहरे, वामपंथी विमर्श के वाहक, सत्ता-विरोधी स्वर और सामाजिक माध्यमों पर सक्रिय प्रभावशाली व्यक्तित्व एक साझा कथानक में दिखाई देते हैं। यही कारण है कि कुछ ही दिनों में यह अभियान चर्चा, विवाद और राजनीतिक बहस का विषय बन गया। समर्थक इसे व्यवस्था से असंतुष्ट वर्गों की अभिव्यक्ति बताते हैं, जबकि आलोचकों की नजर में यह राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने और जनमत को प्रभावित करने की एक सुनियोजित डिजिटल कवायद है।
बात निकली है तो दूर तलक जाएगी, मगर पता चला है कि इस कॉकरोच के रीयल जैविक माता पिता तो सामने नहीं है, मगर वैचारिक परिवार में पहले अक्षर C में कांग्रेस, दूसरे अक्षर O में तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेता ओ’ब्रायन, फिर C में सीपीआई, K से केजरीवाल, R से राहुल, O से ओवैसी, A से अभिजीत दीपके यानी आम आदमी पार्टी के पुराने वालंटियर, C से सीपीआई (एम) तथा H से हिबी ईडन, जो केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के डिजिटल मीडिया सेल प्रमुख होने के साथ सांसद भी हैं, को जोड़ा जा रहा है।
माना जा रहा है कि इनसे ही इस कॉकरोच की उत्पत्ति हुई,जिसका इस्तेमाल एक खास मकसद से हो रहा है। हालांकि इसमें कितनी सफलता मिलेगी आज से भारत में बंद हुए इसके अकाउंट से जाहिर हो रहा है,लेकिन इसके तुरंत बाद कॉकरोच जनता पार्टी पार्ट टू अवतरित होने की खबरें आई हैं। सब जानते हैं कि कॉकरोच यानी तिलचट्टा। यह कीट गंदगी और खाद्य अवशेषों पर पलता है। उसके नाम का प्रयोग कथित रूप से नाराज युवकों की आवाज तो कतई बन नहीं सकता। कई लोग जानते होंगे कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत 16 मई 2026 को हुई मानी जाती है। इसके संस्थापक के रूप में महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से संबंध रखने वाले लगभग 30 वर्षीय अभिजीत दीपके का नाम सामने आता है, जो लंबे समय से सामाजिक माध्यमों और जन अभियानों से जुड़े बताए जाते हैं। कई समाचार रिपोर्टों में दीपके का उल्लेख आम आदमी पार्टी के पूर्व वालंटियर के रूप में किया गया है। यही तथ्य इस पूरे अभियान को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है, क्योंकि इसके बाद यह सवाल उठने लगे कि क्या यह केवल एक व्यंग्यात्मक पहल है या इसके पीछे कोई व्यापक राजनीतिक सोच काम कर रही है।
रिपोर्टों के अनुसार अभिजीत दीपके ने जनसंपर्क विषय में अध्ययन किया और आगे की शिक्षा के लिए अमेरिका भी गए। सामाजिक माध्यमों पर उनकी सक्रियता पहले से रही है और उन्हें जनमत को प्रभावित करने वाले अभियानों का अनुभव रखने वाला व्यक्ति माना जाता है। हालांकि वर्तमान में उनका स्थायी निवास कहां है, इसे लेकर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट और प्रमाणित जानकारी उपलब्ध नहीं है।इसी तरह जिन्हें लगता है कि नौ अक्षरों में वे छुपे हैं,जिनके बल से यह बिसात बिछाई गई है,उसके तथ्य भी जुटाने की आवश्यकता है,क्योंकि इनके अलावा भी कई नामों को सीधा तौर पर उजागर करने के साथ उनके समर्थन की बात को रखा जा रहा है।
दरअसल इस अभियान से जुड़ने वाली कई हस्तियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण इसलिए हैं क्योंकि इनके नाम कई रिपोर्ट में सामने आ चुके हैं। इन रिपोर्ट के अनुसार महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद जैसे राजनीतिक चेहरों ने सार्वजनिक रूप से इस अभियान के प्रति समर्थन अथवा जुड़ाव के संकेत दिए। इसके अलावा प्रसिद्ध अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण, यूट्यूब पर राजनीतिक विषयों पर चर्चा करने वाले ध्रुव राठी, व्यंग्यकार कुणाल कामरा तथा लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति राय जैसे नामों का उल्लेख भी इस अभियान के समर्थकों या अनुयायियों की सूची में किया गया। इन नामों के सामने आने के बाद यह अभियान केवल एक इंटरनेट मजाक भर नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि नेपथ्य में उपरोक्त नौ अक्षरों में विराजमान शक्तियों ने इसे बल देने का काम किया। यह अभियान किसी टीका-टिप्पणी से नहीं, बल्कि मौके का लाभ उठाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।

















