IUML pressure on Kerala CM VD Satheesan । क्या केरल में मुख्यमंत्री की कुर्सी का रिमोट कंट्रोल अब ‘मलप्पुरम’ से चलेगा? 2026 के नतीजों के बाद केरल में सीएम पद के लिए नाम की घोषणा के बाद से ही आईयूएमएल ने जिस तरह से सतीशन सरकार की घेराबंदी शुरू की है, वह राज्य के लिए एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है…
केरल में मुख्यमंत्री पद के लिए सतीशन के नाम की घोषणा ने केरल की राजनीति के1979 के दौर को याद करवा दिया, जब इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सी. एच. मोहम्मद कोया मुख्यमंत्री बने थे। सतीशन का जिस प्रकार से मुख्यमंत्री के पद पर चयन हुआ है, उससे 1979 का दौर फिर से सामने आ गया है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट गठबंधन के तहत इस बार आईयूएमएल का प्रदर्शन सर्वोत्तम रहा है। इस बार पार्टी ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की है, जो उसके राजनीतिक इतिहास का सबसे अच्छा प्रदर्शन है।
आईयूएमएल की दबाव की राजनीति: 1979 के कोया युग की वापसी?
आईयूएमएल इस बार चुनाव बाद नहीं बल्कि चुनाव पूर्व की स्थिति में ही कांग्रेस पार्टी पर अत्यधिक दबाव की राजनीति का तरीका अपनाया था। इस बार आईयूएमएल ने यूडीएफ के गठन के बाद सर्वाधिक 28 विधानसभा की सीट अपनी पार्टी के लिए आवंटित करवाई थीं। आईयूएमएल को पता था कि कांग्रेस पार्टी के पास उसकी मांगों को मानने के अलावा कोई भी विकल्प नहीं है।
मुख्यमंत्री चयन में आईयूएमएल की भूमिका
आईयूएमएल ने अपनी दबाव की राजनीति को चुनाव बाद भी बनाए रखा है और पार्टी ने विगत विधानसभा में पार्टी ने नेता सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की थी। कांग्रेस पार्टी के पास आईयूएमएल की मांगों को मानने के अलावा अब कोई भी दूसरा उपाय नहीं बचा है।
मजहबी एजेंडा: शिक्षा और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालयों पर लीग की नजर
आईयूएमएल का चुनाव पूर्व अधिक सीट और चुनाव बाद अपनी पसंद का मुख्यमंत्री बनाना पार्टी की मांगों की केवल शुरुआत है। आने वाले दिनों में आईयूएमएल कई अन्य प्रकार की मांगों के साथ कांग्रेस पार्टी के सामने आती रहेगी और कांग्रेस के पास उसकी मांगों के आगे झुकने के अलावा कोई भी दूसरा विकल्प नहीं रहेगा। आईयूएमएल अपनी अगली मांग के साथ कांग्रेस पार्टी के सामने आने को तैयार दिख रही है, जिसमें मंत्रिमंडल में अपने पसंद के विभागों की मांग करना शामिल है। प्राप्त सूचना के मुताबिक आईयूएमएल समाज कल्याण, उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी, लोक निर्माण विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण, शिक्षा मंत्रालयों की मांग करने की तैयारी में है। कांग्रेस पार्टी के पास इन मांगों को मानने के अलावा कोई दूसरा उपाय नहीं रहेगा।
सतीशन की राजनीतिक मजबूरी
केरल के नए मुख्यमंत्री सतीशन के पास अब आने वाले दिनों में आईयूएमएल की मांगों को मानना मजबूरी होगी क्योंकि वे आईयूएमएल के सहयोग से ही इस पद पर पहुंचे हैं। सतीशन को आईयूएमएल की साम्प्रदायिक राजनीति के आगे घुटना टेकना मजबूरी होगा। सतीशन यह जानते हैं कि कभी भी आईयूएमएल उन्हें पद से बेदखल करवा सकती है, अतः वे आईयूएमएल की हर मांग को चुपचाप मानते रहेंगे।
कांग्रेस की स्थिति और निर्भरता
आईयूएमएल इस मौके का इंतजार लंबे समय से कर रही थी, जब कांग्रेस पार्टी उसके समर्थन पर राज्य में निर्भर रहे, जो इस बार हो गया है क्योंकि कांग्रेस पार्टी के पास 63 सीट हैं, जो स्पष्ट बहुमत से आठ कम हैं। अब आईयूएमएल खुलकर अपनी साम्प्रदायिक राजनीति को अमलीजामा पहनाएगी।
IUML का विवादित इतिहास: हमास का समर्थन और हिंदुओं के खिलाफ भड़काऊ नारों का सच
आईयूएमएल की सांप्रदायिक राजनीति की लंबी दास्तान है। 26 अक्टूबर 2023 को कोझिकोड में आईयूएमएल केरल प्रदेश के अध्यक्ष पनक्कड़ सैयद सादिक अली शिहाब थंगल ने अपने भाषण में भारत सरकार पर हमेशा इजरायल का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए कहा था-
जो भी इजराइल के साथ हाथ मिलाता है, वह आतंकवाद का समर्थन करता है।
इस रैली में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के वरिष्ठ नेता और विधायक एम. के. मुन्नेर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस और अमर बलिदानी भगत सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की तुलना हमास आतंकियों से करने के आरोप हैं।
मगर कांग्रेस पार्टी इसके बावजूद भी आईयूएमएल के खिलाफ कोई भी वक्तव्य तक जारी करने का हिम्मत नहीं जुटा सकी थी।
जुलाई 2023 में मुस्लिम लीग की युवा शाखा ने केरल के कासरगोड की एक रैली में हिंदुओं के खिलाफ भयंकर भड़काऊ नारे लगाए थे।
यूडीएफ सरकार के दौरान आईयूएमएल के शिक्षा मंत्री पी. के. अब्दुर रब्ब ने अपने आधिकारिक आवास का नाम गंगा से बदलकर ग्रेस कर दिया था।
इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा था कि क्लास में लड़के और लड़कियां को एक साथ नहीं बैठना चाहिए और इनके अलग-अलग क्लासेस होने चाहिए।
2015 में मुस्लिम लीग ने अपने मंत्रालय से जुड़े किसी भी कार्यक्रम में दीपक जलाने से इंकार कर दिया था क्योंकि उनके अनुसार दीप प्रज्वलन इस्लामिक मान्यताओं के खिलाफ है।
वहीं फरवरी 2013 में एक मुस्लिम लीग के एक नेता ने केरल यूनिवर्सिटी के सिंडिकेट में मुस्लिम सदस्यों के लिए अधिक से अधिक सीटों की मांग की, जिससे विवाद खड़ा हो गया था और उसे सांप्रदायिक आधार पर शिक्षा नीति को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखा गया था।
तमिलनाडु से यूपी तक विस्तार: क्या कांग्रेस की मजबूरी बनेगी आईयूएमएल?
आईयूएमएल ने कांग्रेस पार्टी से पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में भी अपनी मांगों को मनवाते हुए वहां अपना विस्तार करती जा रही है। तमिलनाडु में आईयूएमएल कांग्रेस पार्टी के गठबंधन से 2019 और 2024 लोकसभा के चुनावों में रामनाथपुरम लोकसभा की सीट से चुनाव लड़ रही है। रामनाथपुरम लोकसभा सीट भी आईयूएमएल के लिए केरल की पोन्नानी और मलप्पुरम लोकसभा सीट बनती जा रही है। आईयूएमएल रामनाथपुरम लोकसभा सीट को आधार बनाकर पूरे राज्य में अपने विस्तार करने की योजना पर काम कर रही है।
अन्य राज्यों में संभावित रणनीति
आईयूएमएल इस बात से अवगत है कि 2027 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी कांग्रेस पार्टी से समझौता नहीं करेगी क्योंकि कांग्रेस पार्टी अपनी ताकत से अधिक सीटों की मांग करने की आदी है। बिहार में राजद को इसी प्रकार अनावश्यक दबाव बनाकर कांग्रेस पार्टी ने 2025 में 61 सीट आवंटित करवा लिया और महज छह सीट ही जीत सकी थी। ऐसा ही प्रयास कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सपा के साथ करेगी और गठबंधन न होने की पूरी संभावना है। उस स्थिति में कांग्रेस पार्टी आईयूएमएल को उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार और सहयोगी के रूप में इस्तेमाल कर सकती है।
















