क्या केरल की सत्ता का रिमोट कंट्रोल अब पूरी तरह से मुस्लिम लीग के हाथों में जा चुका है? के.सी. वेणुगोपाल को किनारे कर वीडी सतीशन को आगे करने की कहानी कुछ यही बयां करती है…
केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भाजपा के लिए राह आसान कर दिया है। आईयूएमएल ने वी.डी. सतीशन को मुख्यमंत्री पद पर पहुंचाकर केरल की जनता को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि इस सरकार के पूरे कार्यकाल में पर्दे के पीछे से सत्ता का संचालन करेगा। आईयूएमएल को संदेह था कि के.सी. वेणुगोपाल के मुख्यमंत्री बनने की स्थिति में वह अपने एजेंडा को पूर्णतः लागू नहीं कर पाता, अतः आईयूएमएल ने वी.डी. सतीशन को इस पद के लिए उपयुक्त समझते हुए उन्हें इस पद के लिए कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बनाया है।
राजनीतिक प्रभाव और जनता की प्रतिक्रिया
मगर आईयूएमएल के इस कदम का राज्य की राजनीति पर गहरा असर हो रहा है, जिसका असर 2029 के लोकसभा चुनाव से दिखना शुरू होगा। राज्य की जनता आईयूएमएल के इस तानाशाही रवैये का प्रतिकार करते हुए भाजपा के पक्ष में लामबंद हो रही है। राज्य की जनता अब माकपा और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट को नकार चुकी है।
माकपा के आखिरी मुख्यमंत्री पी. विजयन परिवारवाद में आकंठ डूबे रहे हैं। उन्होंने अपने दामाद और पहली बार के विधायक मोहम्मद रियाश को मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण मंत्रालयों का प्रभार देते हुए अपनी पार्टी के पुराने और वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर दिया था।
माकपा का शीर्ष नेतृत्व पी. विजयन के इस परिवारवाद पर आंख मूंदे रहा। इस कारण न सिर्फ आम जनता बल्कि माकपा के समर्पित मतदाताओं ने भी पार्टी से दूरी बना ली है। अब वे कांग्रेस और यूडीएफ को छोड़कर अन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
केरल में भाजपा का उभरता प्रदर्शन
भाजपा अब ऐसे मतदाताओं का विकल्प बनती जा रही है। भाजपा ने इस बार तीन विधानसभा की सीटें जीती हैं और छह सीटों पर दूसरे पायदान पर रही है। भाजपा, जो अब तक केवल 2016 में एक विधानसभा सीट जीतने में कामयाब हुई थी, इस बार जनता को आश्वस्त करने में कामयाब हो गई है कि अब वह राज्य में इतनी मजबूत हो गई है कि चुनाव जीत सके।
आईयूएमएल और कांग्रेस की राजनीति पर सवाल
आईयूएमएल एक साम्प्रदायिक पार्टी है और अनेक अवसरों पर उसने देश के नायकों और हिंदुओं के साथ खुलकर खिलवाड़ किया है। कांग्रेस हमेशा आईयूएमएल के इन कुकृत्यों पर चुप्पी साधे रही क्योंकि उसे केरल और तमिलनाडु में मुस्लिम वोट बैंक की चिंता रही है। अब इस सरकार के पूरे कार्यकाल में कांग्रेस पार्टी केवल आईयूएमएल के इन साम्प्रदायिक कुकृत्यों पर पर्दा डालने का ही काम करेगी।
देशभर में भाजपा को मिल रहा समर्थन
भाजपा को देश के कई राज्यों में मुस्लिम साम्प्रदायिकता के प्रतिउत्तर में अब जनता का समर्थन मिलना शुरू हो गया है। पश्चिम बंगाल की जनता ने ममता बनर्जी की साम्प्रदायिक राजनीति के खिलाफ भाजपा के पक्ष में खुलकर मतदान किया है। न सिर्फ पश्चिम बंगाल बल्कि महाराष्ट्र, बिहार, असम, दिल्ली, हरियाणा सहित सभी प्रदेशों में भाजपा को मुस्लिम साम्प्रदायिकता के खिलाफ जनता का समर्थन मिल रहा है। भाजपा का केरल में आने वाले दिनों में राजनीतिक सफलता पश्चिम बंगाल की तरह ही होती दिख रही है।
अलग-अलग विधानसभाओं में भाजपा का प्रदर्शन
| प्रदेश | प्रथम चुनाव | अगला चुनाव |
|---|---|---|
| त्रिपुरा | 0 | 36 |
| असम | 5 | 60 |
| हरियाणा | 4 | 47 |
| मणिपुर | 0 | 21 |
| ओडिशा | 23 | 78 |
| अरुणाचल प्रदेश | 11 | 41 |
| दिल्ली | 8 | 48 |
केरल में भाजपा की संभावनाएं
भाजपा केरल में आगामी विधानसभा चुनाव में सीधे सत्ता प्राप्त कर सकती है। भाजपा ने ऐसा कारनामा कई प्रदेशों — त्रिपुरा, ओडिशा, मणिपुर, असम, हरियाणा और दिल्ली में किया है।
















