दिल्ली को केंद्र सरकार का बड़ा तोहफा! अनधिकृत कॉलोनियां होंगी वैध, जानिए नया नियम, 50 लाख को होगा फायदा
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दिल्ली को केंद्र सरकार का बड़ा तोहफा! अनधिकृत कॉलोनियां होंगी वैध, जानिए नया नियम, 50 लाख को होगा फायदा

दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों को ‘एज इज वेयर इज’ आधार पर वैध करने का बड़ा फैसला। TOD नीति, सर्कल रेट एकीकरण और 50 लाख लोगों को मिलेगा फायदा। जानें पूरी योजना

Written byएजेंसीएजेंसी
Apr 7, 2026, 04:45 pm IST
in भारत, दिल्ली

नई दिल्ली (हि.स.) । दिल्ली में लंबे समय से चली आ रही अनधिकृत कॉलोनियों की समस्या के समाधान की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। शहरी विकास को गति देने और नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार ने ‘एज इज वेयर इज’ (जैसा है, जहां है) के आधार पर कॉलोनियों के नियमितीकरण के साथ-साथ यातायात आधारित विकास (टीओडी) योजना लागू करने की घोषणा की है।

योजना की घोषणा और कार्यक्रम

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को यहां आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में इन योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली के मेयर राजा इकबाल सिंह, मुख्य सचिव राजीव वर्मा, आवासन एवं शहरी विकास मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव डी थारा, दिल्ली विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एन सरवणा कुमार और एमसीडी कमिश्नर संजीव खिरवार मौजूद रहे।

नियमितीकरण प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

मनोहर लाल ने बताया कि अनधिकृत कॉलोनियों को अब बिना लेआउट प्लान की स्वीकृति के वैधता दी जाएगी और मालिकाना हक की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा। दिल्ली में कुल 22 प्रकार की प्रमुख समस्याएं चिह्नित की गई हैं, जिनमें विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय की कमी सबसे बड़ी चुनौती थी।

संस्थाओं के बीच समन्वय

दिल्ली सरकार, डीडीए, एमसीडी, एनडीएमसी, एलएनडीओ और दिल्ली जल बोर्ड के बीच अधिकारों का टकराव (ओवरलैपिंग अथॉरिटीज) होने से आम नागरिक परेशान होते थे। अब सभी संस्थाओं को एक साथ ऑन बोर्ड लाकर समाधान निकाला जा रहा है।

सर्कल रेट और शुल्क में एकरूपता

उन्होंने कहा कि पहले दिल्ली सरकार, डीडीए और एलएनडीओ के अलग-अलग सर्कल रेट थे। इस साल एक जनवरी को जारी अधिसूचना के माध्यम से अब दिल्ली सरकार द्वारा तय सर्कल रेट को डीडीए और एलएनडीओ दोनों के लिए लागू कर दिया गया है। इससे कन्वर्जन रेट, रजिस्ट्रेशन शुल्क और लीज होल्ड संपत्तियों से जुड़ी समस्याएं सुलझ रही हैं। कन्वर्जन की प्रक्रिया को जल्द ही कैबिनेट में फाइनल कर लागू किया जाएगा।

टीओडी नीति में संशोधन

उन्होंने कहा कि टीओडी नीति पहले भी घोषित हुई थी और 2021 की मास्टर प्लान में इसका उल्लेख था, लेकिन कुछ अड़चनें थीं। अब नीति में बदलाव किए गए हैं।

पीएम-उदय योजना का एकीकरण

रेगुलराइजेशन के लिए 2019 में पीएम-उदय योजना के तहत मालिकाना हक देने का प्रावधान किया गया था, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ पाया। अब इसे रेगुलराइजेशन के साथ जोड़ा गया है। आज से रेगुलराइजेशन के सारे नियम लागू करके लोग मालिकाना हक की रजिस्ट्री करा सकेंगे। नए मकान बनाने के लिए एमसीडी के माध्यम से प्लान तैयार करके दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि 2019 की पीएम-उदय योजना के तहत अब तक लगभग 40 हजार संपत्ति हस्तांतरण विलेख (कन्वेंस डीड) और अनुमति पर्ची (ऑथराइजेशन स्लिप) जारी हो चुकी हैं, लेकिन तकनीकी अड़चनों के कारण प्रक्रिया धीमी थी। अब इन समस्याओं को पूरी तरह दूर कर दिया गया है। नई योजना से लगभग 50 लाख लोगों और 10 लाख परिवारों को लाभ मिलेगा।

कॉलोनियों का विवरण

दिल्ली में कुल 1731 अनधिकृत कॉलोनियां हैं, जिनमें से 1511 को इस योजना के तहत नियमित किया जा रहा है। रिजर्व एरिया, ओजोन, फॉरेस्ट क्षेत्र और संरक्षित स्मारकों के आसपास स्थित कॉलोनियां ही इससे बाहर रखी गई हैं।

नई स्वीकृति प्रक्रिया

उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था में लेआउट प्लान की स्वीकृति की कोई जरूरत नहीं रहेगी। सभी भूखंडों और भवनों को जैसा है उसी रूप में मान्यता दी जाएगी। स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाते हुए नोडल अधिकारी अब दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग के एडीएम होंगे। सर्वे का काम पटवारी और नायब तहसीलदार संयुक्त रूप से करेंगे।

समयबद्ध प्रक्रिया

प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने के लिए सख्त समयसीमा तय की गई है। जीआईएस सर्वे रिपोर्ट 7 दिनों में, एप्लीकेशन में कमी दूर करने का मेमो 15 दिनों में और पूर्ण आवेदन पर कन्वेंस डीड 45 दिनों में जारी करनी होगी। आवेदन 24 अप्रैल 2026 से स्वगम पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शुरू होंगे।

टीओडी नीति में नई शर्तें

डीडीए उपाध्यक्ष एन सरवणा कुमार ने बताया कि पहले टीओडी जोन के लिए न्यूनतम 8 हेक्टेयर भूमि और 1 हेक्टेयर प्लॉट साइज की शर्त थी, जिसके कारण निजी क्षेत्र ज्यादा आगे नहीं आ पा रहा था। अब न्यूनतम प्लॉट साइज मात्र 2000 वर्ग मीटर रखा गया है।

टीओडी जोन का विस्तार

मेट्रो लाइन के दोनों तरफ 500 मीटर क्षेत्र को टीओडी जोन माना जाएगा, जबकि बड़े रेलवे स्टेशनों के 500 मीटर रेडियस को नोड। यह नीति वर्तमान और प्रस्तावित मेट्रो एवं रेल नेटवर्क पर भी लागू होगी।

एफएआर और किफायती आवास

उन्होंने कहा कि नई नीति में भूमि उपयोग प्रतिबंध (लैंड यूज रेस्ट्रिक्शन) को पूरी तरह हटा दिया गया है, लेकिन कुल एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) का 65 प्रतिशत किफायती आवास (100 वर्ग मीटर तक के फ्लैट्स) के लिए अनिवार्य रखा गया है। इससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए अधिक घर बन सकेंगे।

सिंगल विंडो सिस्टम

प्रोजेक्ट सैंक्शन के लिए सिंगल विंडो सिस्टम बनाया गया है। टीओडी कमेटी डीडीए उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में सभी एजेंसियों के प्रतिनिधियों के साथ काम करेगी और 60 दिनों के अंदर बिल्डिंग प्लान की मंजूरी देगी।

टीओडी चार्जेस

टीओडी चार्जेस को भी सरल बनाया गया है। अब 10,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर लिया जाएगा और यह राशि प्रोजेक्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर (सड़क, सीवरेज, ड्रेनेज) सुधारने के लिए ही खर्च होगी। इसके लिए रिंग फेंस्ड एस्क्रो अकाउंट बनाया गया है। कुछ राशि एमसीडी को, कुछ डीडीए को जाएगी और बाकी उसी क्षेत्र में खर्च होगी।

तकनीकी अड़चनों का समाधान

अतिरिक्त सचिव डी थारा ने बताया कि 2019 की योजना में ओनरशिप राइट्स तो दिए गए थे, लेकिन बिल्डिंग रेगुलराइजेशन के लिए लेआउट प्लान की जरूरत पड़ती थी, जिसके कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा था। अब इस अड़चन को पूरी तरह हटा दिया गया है।

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया

कोई भी व्यक्ति पीएम-उदय पोर्टल पर ओनरशिप राइट्स के लिए आवेदन कर सकता है और फिर एमसीडी के स्वगम पोर्टल पर भवन नक्शा अपलोड कर नियमितीकरण करा सकता है। लगभग 700 एम्पैनल्ड आर्किटेक्ट्स नक्शे तैयार करेंगे।

कॉलोनियों का अंतिम आंकड़ा

थारा ने बताया कि 1731 कॉलोनियों में से 220 ओजोन, फॉरेस्ट या रिज एरिया में हैं, जिन्हें बाहर रखा गया है। शेष 1511 कॉलोनियों की सीमाएं डीडीए ने तय कर दी हैं। नियमितीकरण केवल रेजिडेंशियल उपयोग के लिए होगा।

सड़क और विकास प्रावधान

छह मीटर रोड वाले क्षेत्रों में भवन आसानी से नियमित होंगे। चार मीटर रोड वाले क्षेत्रों में पुनर्विकास के दौरान एक-एक मीटर जगह छोड़कर सड़क चौड़ी की जाएगी। छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी सीमित क्षेत्र में नियमित किए जाएंगे।

ड्रोन सर्वे और निगरानी

एमसीडी हर महीने ड्रोन सर्वे करेगी और नई अनधिकृत निर्माण गतिविधियों पर सख्ती से नजर रखेगी। आधारभूत सुविधाओं का विकास सरकार की जिम्मेदारी होगी।

आवेदन की अंतिम जानकारी

जिन लोगों ने पहले ही ओनरशिप राइट्स ले लिए हैं, वे 24 अप्रैल से सीधे स्वगम पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं।

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