नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन स्थित एक पीजी की बिल्डिंग ढहने से प्राइवेट पीजी संचालन को लेकर एक बार फिर से चर्चा शुरू हो गई है। इस हादसे में सात छात्रों की मौत हो गई थी। घटना के बाद दिल्ली सरकार ने राजधानी में पीजी (PG)अकोमोडेशन को रेगुलेट करने के लिए एक ड्राफ्ट पॉलिसी तैयार की है। यह प्रस्तावित पॉलिसी है जिसमें पीजी रजिस्ट्रेशन,सुरक्षा मानक, किराया, सिक्योरिटी डिपॉजिट, बेदखली और छात्रों की शिकायतों जैसे मुद्दे शामिल होंगे। सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद यह बात निकलकर सामने आ रही है कि जिस इमारत में हादसा हुआ है, उसके पास मंजूरशुदा बिल्डिंग प्लान नहीं था। उसमें अनधिकृत बेसमेंट भी था। फायर NOC नहीं थी। बिल्डिंग की पांचवीं मंजिल नियमों के खिलाफ बनी थी।
दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद का कहना है कि सरकार पहले से ही इस सेक्टर को रेगुलेट करने पर काम कर रही थी,सत्य निकेतन त्रासदी ने इस प्रक्रिया को तेज कर दिया है। दरअसल इस घटना के बाद छात्रों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब दिल्ली के सभी PG बिल्डिंगों का भी स्ट्रक्चरल ऑडिट होगा। जिसका मकसद है कि इन पीजी बिल्डिंगों में रहने वाले छात्र सुरक्षित हैं या नहीं। इस फैसले के साथ PG में सुरक्षा नियमों की भी समीक्षा होगी। दिल्ली सरकार इसे लेकर बैठक भी कर चुकी है जिसमें बिल्डिंग सेफ्टी, छात्रों के रहने की व्यवस्था और PG नियमों पर चर्चा हुई है।
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आशीष सूद की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी दिल्ली में चल रहे पीजी नियमों की समीक्षा करेगी। प्रस्तावित नीति के तहत, पीजी संचालकों को पीजी ऑपरेटिंग लाइसेंस हासिल करना होगा। पुलिस और नगरपालिका वेरिफिकेशन से गुजरना होगा और हर रजिस्टर्ड संपत्ति को एक रजिस्ट्रेशन नंबर मिलेगा। एक प्रस्तावित डिजिटल प्लेटफॉर्म GovPG वेरिफाइड पीजी को लिस्ट करेगा और किराए में बदलाव, जांच की तारीख और नियमों के पालन से जुड़ी जानकारी देगा। इसके जरिए छात्र बिना नाम जाहिर किए शिकायतें भी दर्ज करा सकेंगे।
नाइट गार्ड, सीसीटीवी…और पीजी के पास रखना होगा ऑफिस….
प्रस्तावित ड्राफ्ट में कड़े सुरक्षा नियमों का भी प्रस्ताव है। एंट्री गेट्स और सामान्य क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य होंगे। इनकी फुटेज 30 दिनों तक रखी जाएगी। 15 या इससे अधिक छात्रों वाले पीजी को रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच एक लाइसेंस प्राप्त नाइट गार्ड उपलब्ध कराना होगा। साथ ही पीजी संचालकों को विजिटर रजिस्टर रखना भी अनिवार्य होगा। वार्डन को PG के 500 मीटर के दायरे में रहना होगा या वहां अपना ऑफिस रखना होगा।
किराए का भी होगा रेगुलेशन…
प्रस्तावित पॉलिसी में छात्रों द्वारा दिए जाने वाले किराए को भी रेगुलेट करने की कोशिश होगी। किराया रेगुलेशन कमेटी अलग-अलग इलाकों के लिए किराए की रेंज तय करेगी। PG चलाने वालों को तीन महीने से ज्यादा का किराया एडवांस में मांगने की इजाजत नहीं होगी। इस ड्राफ्ट में लिंग, जाति, धर्म या मूल राज्य के आधार पर भेदभावपूर्ण कीमत तय करने पर रोक लगाने का भी प्रस्ताव है।
इस ड्राफ्ट में एक ‘इंस्टीट्यूशनल अकोमोडेशन कमेटी’ बनाने का प्रस्ताव है। जिसमें कॉलेज के अधिकारी, छात्र प्रतिनिधि, नगर पालिका के प्रतिनिधि और पुलिस के संपर्क अधिकारी शामिल होंगे। यह कमेटी हर तीन महीने में जांच करेगी, नियमों का पालन न करने वाले PG को नोटिस जारी करेगी और नियमों के पालन से जुड़ी रिपोर्ट पब्लिश करेगी। सरकार छात्रों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए हॉस्टल की क्षमता बढ़ाने को तैयार है।

















