अयोध्या पर्व' में गूंजा रामराज्य और सामाजिक समरसता का स्वर
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अयोध्या पर्व’ में गूंजा रामराज्य और सामाजिक समरसता का स्वर

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में अयोध्या न्यास के सहयोग से 3 से 5 अप्रैल 2026 तक आयोजित आठवें ‘अयोध्या पर्व’ ने राजधानी को भगवान राम की आध्यात्मिक चेतना से सराबोर कर दिया।

Written byआशीष कुमार 'अंशु'आशीष कुमार 'अंशु'
Apr 6, 2026, 05:01 pm IST
inउत्तर प्रदेश

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में अयोध्या न्यास के सहयोग से 3 से 5 अप्रैल 2026 तक आयोजित आठवें ‘अयोध्या पर्व’ ने राजधानी को भगवान राम की आध्यात्मिक चेतना से सराबोर कर दिया। तीन दिवसीय इस पर्व में वैचारिक विमर्श, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और प्रदर्शनियां रामकथा के विभिन्न आयामों को जीवंत बनाती रहीं। आईजीएनसीए परिसर राम भक्ति की दिव्य ऊर्जा से प्राणवान रहा, जहां देशभर से आए विद्वान, संत, कलाकार और श्रद्धालु राम के आदर्शों पर चर्चा करते नजर आए।

राम की सनातन चेतना का जागरण

पर्व का भव्य शुभारंभ 3 अप्रैल को हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में अयोध्या के पूज्य महंत कमल नयन दास जी महाराज ने आशीर्वचन दिया। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, राजस्थान की उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक सुरेश भैयाजी जोशी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। आईजीएनसीए के अध्यक्ष पद्म भूषण रामबहादुर राय, सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, अयोध्या पर्व के संयोजक एवं फैजाबाद के पूर्व सांसद लल्लू सिंह तथा पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक वाजपेयी की गरिमामय उपस्थिति ने उद्घाटन को यादगार बनाया।

महंत कमल नयन दास ने कहा कि भगवान राम का आदर्श सबमें परस्पर प्रीति का है। उन्होंने शबरी और जटायू प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि राम ने सबको अपनाया। आज देश में समरसता के लिए राम की आवश्यकता है। सुरेश भैयाजी जोशी ने राममंदिर निर्माण को राष्ट्र निर्माण की शुरुआत बताया और कहा कि अयोध्या से देश बनने की प्रक्रिया शुरू हुई है। मनोज सिन्हा ने अयोध्या को भारतीय सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बताते हुए कहा कि यह केवल जन्मभूमि नहीं, बल्कि सभ्यता का उद्गम स्थल है। दीया कुमारी ने राजस्थान और अयोध्या के प्राचीन संबंधों का जिक्र किया तथा राजस्थान में भी ऐसे पर्व आयोजित करने का आग्रह किया। डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने पर्व के कार्यक्रमों की जानकारी दी, जबकि अशोक वाजपेयी ने आयोजकों को बधाई दी। उद्घाटन सत्र में ‘रामोत्सव’ फोटो प्रदर्शनी, ‘बड़ी है अयोध्या’ प्रदर्शनी और पंडित रामकिंकर उपाध्याय से जुड़ी प्रदर्शनी का भी उद्घाटन हुआ। चित्रांजलि संस्था द्वारा रामोत्सव पर आधारित फोटोग्राफी पुस्तक का लोकार्पण और प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए।

प्रथम दिन: भविष्य की अयोध्या पर गहन चिंतन

पर्व के पहले दिन ‘भविष्य की अयोध्या-नगर योजना’ विषय पर सत्र आयोजित हुआ। रामबहादुर राय ने काशी विश्वनाथ धाम के विकास का उदाहरण देते हुए कहा कि अयोध्या धाम के विकास में भी संतों की आशंकाओं का समाधान जरूरी है। डॉ. बी.एल. गौड़, डॉ. शैलेष शुक्ल और लल्लू सिंह ने भी अपने विचार रखे। दिन का समापन पंडित डॉ. अभय मानके द्वारा गीत रामायण की मनमोहक प्रस्तुति से हुआ, जिसने श्रोताओं को भक्ति रस में डुबो दिया।

दूसरा दिन: शबरी के राम और रामराज्य का भाव

4 अप्रैल को दूसरे दिन की शुरुआत ‘शबरी के राम’ विषयक विमर्श से हुई। इस सत्र में भगवान राम के लोकनायक स्वरूप पर चर्चा हुई, जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचते हैं। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि शबरी के चरित्र में भाव का अभाव नहीं है। उन्होंने भारत को आर्यावर्त और जम्बुद्वीप दोनों बताते हुए सांस्कृतिक विरासत की राजनीतिकरण पर चिंता जताई। डॉ. गुरु प्रकाश पासवान, डॉ. विनोद तिवारी, डॉ. कौशल पंवार, डॉ. राजेश पासवान और डॉ. राजीव कुमार वर्मा ने भी शबरी प्रसंग के माध्यम से भक्ति, समर्पण और सामाजिक समरसता पर प्रकाश डाला।

इसके बाद ‘पंडित रामकिंकर उपाध्याय की दृष्टि में रामराज्य का भाव’ सत्र में रामराज्य को केवल शासन नहीं, बल्कि मानवीय चेतना के रूपांतरण के रूप में देखा गया। पंडित रामकिंकर उपाध्याय की मानसपुत्री दीदी मां मंदाकिनी रामकिंकर ने कहा कि रामराज्य के लिए राम के साथ भरत, हनुमान और लक्ष्मण जैसे सहयोगी जरूरी हैं। राम और भरत दो विचारधाराएं हैं। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि पंडित रामकिंकर उपाध्याय शबरी और केवट को रामराज्य के प्रथम नागरिक मानते थे। भक्ति ही वह आधार है जो रामराज्य को संभव बनाता है। रामराज्य भाव से आएगा, सेवा भाव से आएगा। आचार्य कृष्णकांत ने प्राण प्रतिष्ठा के दो रूपों – अचल और चल – की व्याख्या की तथा अयोध्या पर्व को दिल्ली में अयोध्या की ‘चल प्रतिष्ठा’ बताया। देवेंद्र रावत ने श्रद्धा और भक्ति पर बल दिया। सत्र के अंत में लल्लू सिंह ने आभार व्यक्त किया।

शाम को माधवी मधुकर झा ने संस्कृत स्तोत्र गायन से मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रेरणा अग्रवाल द्वारा लिखित और नवीन अग्रवाल द्वारा निर्देशित नाट्य प्रस्तुति ‘शबरी के राम’ ने शबरी की अनंत भक्ति और राम की यात्रा को भावपूर्ण ढंग से चित्रित किया।

समापन दिन: शासन, समाज और राम के आदर्श

5 अप्रैल को अंतिम दिन ‘भविष्य की अयोध्या – शासन और समाज’ विषय पर चर्चा हुई। आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण, पूर्व मुख्य सचिव मनोज सिंह और चंद्रशेखर प्राण ने अयोध्या को सनातन पुरी बताते हुए परंपरा और आधुनिकता के संतुलन पर जोर दिया। आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि अयोध्या राम की स्मृति से परिभाषित होती है और यह त्यागी लोगों का आश्रय है। समापन सत्र में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और रामबहादुर राय मुख्य रूप से उपस्थित रहे। चंपत राय ने रामजन्मभूमि आंदोलन को समाज जागरण का माध्यम बताया तथा अयोध्या के भौतिक और सांस्कृतिक विकास पर प्रकाश डाला। रामबहादुर राय ने अयोध्या पर्व की निरंतरता को विशेष बताते हुए कहा कि यह वर्तमान और भविष्य की अयोध्या का आधार है। लल्लू सिंह को सांस्कृतिक राजदूत कहते हुए वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र पांडेय ने पर्व की पृष्ठभूमि साझा की।

संध्या में दुलाल राय द्वारा निर्देशित ‘श्री राम विजय’ की भव्य नाट्य प्रस्तुति ने रामकथा के प्रसंगों को सजीव कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। यह प्रस्तुति संगीत नाटक अकादमी, गुवाहाटी के सौजन्य से हुई।

राम के आदर्शों की यात्रा

तीन दिनों तक चले इस पर्व में प्रदर्शनियों, विमर्श सत्रों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने राम भक्ति को न केवल स्मृति में, बल्कि वर्तमान आचरण में उतारने का संदेश दिया। अयोध्या पर्व ने दिखाया कि राम केवल अतीत के नहीं, बल्कि भविष्य की प्रेरणा भी हैं। अयोध्या न्यास और आईजीएनसीए के प्रयासों से दिल्ली में अयोध्या की चेतना का विस्तार हुआ, जो सामाजिक समरसता, भक्ति और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

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आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार अंशु पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और दस वर्षों तक मानवीय विकास से जुड़े विषयों की पत्रिका सोपान STEP से जुड़े रहे हैं। [Read more]
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