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होम संघ @100 पंच परिवर्तन कुटुम्ब प्रबोधन

‘परिवार व्यवस्था को मजबूत करना समय की आवश्यकता’

नई दिल्ली में ‘विश्वमांगल्य सभा’ द्वारा आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन बैठक में देशभर से आईं महिलाएं। इनका मार्गदर्शन करते हुए सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कहा कि परिवार के लिए समय निकालें और घर के सदस्यों से संवाद जारी रखें

Written byPanchjanyaPanchjanya
Aug 6, 2026, 10:16 pm IST
inकुटुम्ब प्रबोधन, संघ @100, दिल्ली
दीप प्रज्ज्वलित कर प्रबोधन बैठक के समापन सत्र का शुभारंभ करते श्री मोहनराव भागवत। साथ में हैं आचार्य स्वामी जीतेंद्रनाथ जी और विश्वमांगल्य सभा की अन्य पदाधिकारी

दीप प्रज्ज्वलित कर प्रबोधन बैठक के समापन सत्र का शुभारंभ करते श्री मोहनराव भागवत। साथ में हैं आचार्य स्वामी जीतेंद्रनाथ जी और विश्वमांगल्य सभा की अन्य पदाधिकारी

गत 23 और 24 जुलाई को नई दिल्ली में ‘विश्वमांगल्य सभा’ के तत्वावधान में उत्तर भारत की राष्ट्रीय प्रबोधन बैठक आयोजित हुई। पहले दिन की बैठक चाणक्यपुरी स्थित विश्व युवक केंद्र में हुई। इसमें करीब 250 महिला कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इसमें पूरे देश से आई प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। बैठक के उद्घाटन सत्र में विश्वमांगल्य सभा के संस्थापक एवं गुरुजी श्री दत्ता पीठ परंपरा के 18वें पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी श्री जितेन्द्रनाथ जी महाराज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं संगठन के मार्गदर्शक श्री प्रशांत हलतरकर तथा विश्वमांगल्य सभा की राष्ट्रीय अध्यक्षा नलिनी हावरे, राष्ट्रीय संगठन मंत्री वृषाली जोशी भी उपस्थित रहीं। इस अवसर पर वृषाली जोशी ने कहा कि ‘मातृ निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ के ध्येय के साथ कार्यरत विश्वमांगल्य सभा आज देशभर में मातृशक्ति के संगठन और संस्कार आधारित समाज निर्माण की दिशा में कार्य कर रही है। आचार्य स्वामी श्री जितेन्द्रनाथ जी महाराज ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में मातृत्व की भूमिका और चुनौतियों पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। वहीं, श्री प्रशांत हलतरकर ने कहा कि किसी भी संगठन की सबसे बड़ी शक्ति उसके समर्पित और स्थिर कार्यकर्ता होते हैं, जो संयुक्त परिवार की भावना के साथ राष्ट्र निर्माण के कार्य को आगे बढ़ाते हैं।

दक्षिण भारत की प्रबोधन बैठक 26 जुलाई को भाग्य नगर (हैदराबाद) में संपन्न हुई। इसमें आईं बहनों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत का मार्गदर्शन मिला। ऊपर बैठक के मंच पर श्री मोहनराव भागवत के साथ विराजमान हैं विश्वमांगल्य सभा के पदाधिकारी और अन्य अतिथि

दूसरे दिन यानी 24 जुलाई का मुख्य कार्यक्रम डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित हुआ। इसका विषय था- युगानुकूल मातृत्व। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कहा कि मातृत्व विषय पर विश्वमांगल्य सभा द्वारा व्यापक चर्चा हो चुकी है और इस विषय में अपना दृष्टिकोण क्या है, अपनी परंपरा क्या है, आज के युग में कैसे चलना है आदि के बारे में भी प्राचीन काल से बहुत सारा चिंतन हुआ है। स्वामी विवेकानंद जी, गांधी जी, रविंद्रनाथ ठाकुर जी आदि ने समग्रता से चिंतन करके हमारे सामने अपने विचार रखे हैं। उन्होंने कहा कि मातृत्व की शाश्वत बातें वही हैं, वे युग के अनुसार बदलती नहीं हैं। उन्हीं बातों के कारण युग में परिवर्तन करने वाले उत्पन्न होते हैं। आदिकाल से सृष्टि मातृत्व के आधार पर ही चलती आई है। हर जीव की उत्पत्ति होती है तो उसमें मातृत्व आता ही है, माता रहती ही है।

सृष्टि का सृजन, संवर्धन और पोषण बिना मातृत्व के संभव नहीं है। मातृत्व सृष्टि के संवर्धन, पोषण और निरंतरता का मूल आधार है। मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति उसका विचार है, लेकिन उसे सही दिशा देने का कार्य माता ही करती है। माता ही मनुष्य की पहली गुरु होती है तथा जीवनभर भावनात्मक संबल का सबसे बड़ा केंद्र भी वही रहती है। उन्होंने कहा कि परिवार में समय देना और संवाद बनाए रखना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
बच्चों की जिज्ञासाओं का समाधान माता-पिता को करना होगा, जिसके लिए स्वयं का ज्ञान भी निरंतर बढ़ाना आवश्यक है। बच्चे उपदेश से अधिक अनुकरण से सीखते हैं, इसलिए माता-पिता को स्वयं आदर्श आचरण प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में अनेक विमर्श भ्रम के कारण चलते हैं और कई बार जानबूझकर भ्रम भी फैलाया जाता है। भारतीय संस्कृति के बारे में भी लंबे समय तक भ्रम फैलाया गया कि हमारी परंपराएं गलत हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि हमारा सांस्कृतिक आधार अत्यंत प्रबल और प्रत्यक्ष है।

हमें अपने इतिहास, ज्ञान और परंपराओं पर विश्वास रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि एकता ही सत्य है और विविधता के बीच एकात्म भाव भारतीय संस्कृति का मूल संदेश है। भारत में रहते हुए भारतीय संस्कृति और जीवन-मूल्यों के अनुरूप जीवन जीना चाहिए। अन्य देशों की जीवनशैली को बिना विचार किए अपनाने के बजाय भारतीय दृष्टिकोण के आधार पर समाज और परिवार व्यवस्था को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।

Topics: परिवार व्यवस्थायुगानुकूल मातृत्वमातृत्व और संस्कारसरसंघचालकराष्ट्रीय प्रबोधनमोहन भागवतमातृ निर्माणराष्ट्र निर्माणआदर्श आचरणसंयुक्त परिवारपाञ्चजन्य विशेषभारतीय दृष्टिकोणविश्वमांगल्य सभा
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