पिछले सप्ताह पूरे विश्व ने एक अजीब नज़ारा देखा। और वह नज़ारा था स्पेन के शहर सेउटा और मेलिला में मोरक्को से हजारों की संख्या में लोगों का प्रवेश। पूरे विश्व ने देखा कि कैसे दीवारों से कूदकर, समुद्र में तैरकर और तमाम तरीकों से 70,000-80,000 लोग घुस आए। कहने के लिए इन्हें शरणार्थी कहा गया और यह कहा गया कि ये सभी सोशल मीडिया की अफवाहों से प्रभावित होकर स्पेन में घुसे थे।
और देखते ही देखते स्पेन के ये दो शहर अराजकता की पकड़ में आने लगे। सबसे हैरान करने वाली बात यही थी कि जो भी कथित शरणार्थी आ रहे थे, उनमें महिलाओं की संख्या नगण्य थी। उनमें मध्य आयु के ऐसे पुरुष सम्मिलित थे, जो लड़ाकू कौम के लग रहे थे। लोगों ने तमाम प्रश्न उठाए कि आखिर जो भी शरणार्थी आ रहे हैं, उनमें महिलाएं क्यों नहीं हैं?
स्थिति बिगड़ने पर स्पेन सरकार ने सेना तैनात की
जब इस मामले ने तूल पकड़ा और पूरे सोशल मीडिया में हलचल मच गई तथा यह कहा जाने लगा कि स्पेन पर हमला हो गया है, तब स्पेन की सरकार जागी और उसने सेना को भेजा। सेना ने इन लड़ाकों को भगाना शुरू कर दिया। स्पेन पर इन कथित शरणार्थियों के चलते स्थानीय प्राधिकरणों और शेल्टर परिसरों पर दबाव बनने लगा था। इन लोगों के साथ तमाम बच्चे और किशोर भी थे। सोशल मीडिया पर अफरा-तफरी के वीडियो वायरल होने लगे।
लोगों ने इसे स्पेन पर हमले की संज्ञा दी। लोगों ने कहा कि कई दशकों पहले स्पेन ने मुसलमानों को स्पेन से भगा दिया था, मगर अब ऐसा लग रहा है कि जैसे स्पेन पर मुसलमान फिर से हमला कर रहे हैं। लोग नावों से आए। मगर सोशल मीडिया पर लोगों ने प्रश्न किए कि आखिर मोरक्को से लोग स्पेन क्या करने आ रहे हैं? मोरक्को तो कोई भी युद्धग्रस्त क्षेत्र नहीं है, फिर भी मोरक्को से मुसलमान स्पेन क्यों आ रहे हैं?
दो दिनों की घटना ने व्यवस्था पर उठाए बड़े सवाल
यह स्थिति एक या दो दिन ही रही। परंतु दो ही दिनों में इसने यह बता दिया कि अफवाहों के चलते भी यदि हजारों की अनियंत्रित भीड़ किसी भी शहर में प्रवेश कर जाए तो क्या होता है?
इसने बताया कि अगर केवल लगभग 85,000 लोगों की आबादी वाले शहर में अचानक ही 60 या 70 हजार लोगों की अनियंत्रित भीड़ आ जाए, तो क्या होता है? कैसे राशन, पानी और आधारभूत सुविधाएं ठप पड़ जाती हैं। ऐसा रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि जिन 70,000 लोगों ने स्पेन के इस शहर में प्रवेश किया, जो वहां से होकर यूरोप जाना चाहते थे या फिर पूरे स्पेन में फैलना चाहते थे, जब उन्होंने देखा कि शेल्टर होम ठप हो गए हैं और आधारभूत सुविधाएं भी प्रभावित होने लगी हैं, तो वे अपने आप ही वापस चले गए।
सेना और पुलिस की कार्रवाई के बाद लौटने लगे लोग
चूंकि स्पेन की सरकार ने पुलिस और सेना को इस निर्देश के साथ तैनात कर दिया कि किसी भी स्थिति में स्पेन के इस शहर में जबरन प्रवेश किए हुए ये लोग स्पेन के अन्य हिस्सों में या फिर यूरोप के शेष हिस्सों में न जाने पाएं।
इटली की तरफ से इस पूरी घटना का काफी विरोध हुआ। और जब सेना ने धरपकड़ शुरू की तथा अराजक तत्वों को वापस भगाना शुरू किया तो लोग अपने आप वापस जाने लगे। परंतु इस वापस जाने की प्रक्रिया में 80 या 90 लोगों की मौत या तो डूबने से या फिर कुचले जाने से हो गई। और इसका विरोध मोरक्को में बहुत हुआ।
आखिर यह सब हुआ क्यों?
जब भी कोई घटना होती है तो यह प्रश्न सबसे पहले उठता है कि आखिर यह हुआ क्यों था? इस पूरी घटना के पीछे के क्या कारण रहे होंगे? दरअसल, यह सब सोशल मीडिया पर फैली कुछ अफवाहों का परिणाम था। सोशल मीडिया पर कुछ अकाउंट्स थे, जो यह दावा कर रहे थे कि सीमाएं खुल जाएंगी और वे बिना किसी आधिकारिक पहचान के यूरोप में जा सकते हैं।
कई समूह और पृष्ठ सक्रिय थे। जैसे कि Haraga Ceuta, जिसमें Haraga का अर्थ होता है ऐसे युवा शरणार्थी, जो अपने पहचान के कागजात नष्ट कर देते हैं और यूरोप में अवैध रूप से प्रवेश करते हैं। Fnideq Bab Sebta जैसे समूह फेसबुक पर थे, जो यह बताते थे कि कब कोस्ट गार्ड की पेट्रोलिंग कम होती है। कुछ लोगों ने नावों से जाना चुना, तो कुछ लोग वहां वेटसूट बेच रहे थे।
सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों ने बढ़ाया भ्रम
मीडिया के अनुसार सोशल मीडिया पर ऐसे कई दावे किए गए कि बॉर्डर खोल दिए गए हैं। और जिन खातों ने ये सभी दावे किए, वे कुछ ही समय के बाद बंद कर दिए गए। अब इसे लेकर प्रश्न उठ रहे हैं कि आखिर वे कौन लोग रहे होंगे, जिन्होंने यह सब किया।
तो वहीं कुछ लोगों ने स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ के पुराने बयान को गलत तरीके से लिया। सांचेज़ ने हाल ही में कहा था कि 1 जनवरी 2026 से पहले स्पेन आए हुए शरणार्थियों को कानूनी रूप से मान्यता दी जाएगी। और उनमें से अधिकतर लैटिन अमेरिका से आए हुए लोग हैं, जो वैध रूप से आए हैं, मगर उन्हें वहां रहते हुए काफी समय हो गया है।
परंतु मोरक्को के कुछ लोगों ने इस नीति को गलत समझा और यह माना कि उन्हें टिकने की अनुमति मिल गई है। इसी दावे के चलते लोगों की भीड़ एकदम से स्पेन में प्रवेश कर गई।
घटना के बाद भी उठ रहे हैं कई सवाल
वहीं लोग इस पर प्रश्न उठा रहे हैं कि यह कैसे हो सकता है कि एक ही समय पर इस तरह की अफवाहें फैल जाएं और एकदम से 70,000 के करीब लोग दूसरे देश में प्रवेश कर जाएं।
हालांकि अब यह कहा जा रहा है कि लगभग सभी वयस्क आप्रवासी लौट गए हैं, मगर प्रश्न काफी उठ खड़े हुए हैं। फिर भी सोशल मीडिया पर यह भी दावे किए जा रहे हैं कि कई हजार आप्रवासियों को स्पेन भेजा जा रहा है। अब इन दावों में कितनी सच्चाई है, वह तो पता चल ही जाएगा।
अनियंत्रित भीड़ के खतरे पर बनी बहस
मगर फिर भी एक सप्ताह का यह घटनाक्रम यह बताने के लिए पर्याप्त है कि बिना किसी हथियार के भी अनियंत्रित भीड़ यदि किसी शांत शहर में प्रवेश कर जाए, तो वह कितनी घातक हो सकती है।
लोग कह रहे हैं कि अगर 70,000 लोग इस तरह से शहर में प्रवेश कर सकते हैं, तो फिर आम लोगों की सुरक्षा का क्या होगा?











